Come, let's do something for Bhojpuri...
खेसारी के आज बुझात बा की अब ज़िन्दगी के आखरी घडी आ गईल बा |नोकरी से रिटाएर भईले १० बरिस हो गईल पत्नी के गुजरल २ बरिस और आज बेटा पतोह के ताना सुनत सुनत खेसारी के आत्मा मर गईल बा बस शारीर जिंदा बा, उहो बुझात बा की बहुत जल्दी साथ छोड़ जाई| ज़िन्दगी भर नौकरी कई के और आपन सपना तुर के बेटा के पढ़व्लन,बेटा पढ़ लिख के इंजीनिर बन गईल और फिर रिटाएर भईला पर जून पईसा मिलल ओह से बेटा खातिर घर बनवा देहलन और बेटा के वियाह कर देहलन| और उहे बेटा-पतोह आज खेसारी के दू बेरा खाना खियावे खातिर उनकर पेंसन हर महिना ले लेला लोग |पिछला दू साल से बहुत आपमान सहत बाडन खेसारी आपना बेटा और बहु से |
आखिर अपमान और ज़िल्लत के ज़िन्दगी से आज खेसारी के छुटकारा मिल गईल| दुपहर तक सारा रिश्तेदार आ गईल और फिर साँझ खान खेसारी के अंतिम संस्कार कर दिहल गईल|
पतोह आज मने-मने बहुत खुश बाड़ी,घर में एगो कमरा खली हो गईल अब केहू के अईला-गायीला में रहे के गजन ना होई,और तनी दुःख भी बा की हर महीने मिले वाला पेंसन के पईसा आब ना मिली|
खेसारी के गुजरला के तीसरा दिने उनकर चौथा कर-करा के कमरा के धो पोछ दिहल गईल सामान के नाम पर एगो मोटरी मिलल जुना में कुछ कागज पतर और बेटा के बचपन के फोटो रहे और एगो बैंक के फिक्स डिपाजिट मिलल जुना के साथै एगो चिठ्ठी रहे "बेटा सदा खुश रहा भगवन के कृपा तहरा पर हमेशा बनल रहो,शायेद तहार बेटा तहरा बुढ़ापा में उहे बर्ताव करी जून तू हमरा साथै कईले और हम जौन दुःख भोगनी उ तहरा ना भोगे के पड़ो और हमरा खानी ज़िल्लत के ज़िन्दगी ना जिए के पड़ो ओही खातिर हम हई फिक्स डिपाजिट छोड़ के जात बानी एकरा के आपना बुढ़ापा खातिर सम्भाल के रखिह" |
चिट्ठी पढला के बाद बेटा के आँख से आंसू निकल गईल लेकिन अब रोवाला से का फायेदा |
{इ कहानी हमर एगो दोस्त मेल कईले रहलन ओकरा के हम भोजपुरी में इहा लिखत बानी}
Comment by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on January 28, 2012 at 9:36pm रिंकु भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी
भोगे के त परबे करी , जे जईसन करी ओकरा ओइसने फल आ एजुगे मिली ।
बहुत बेजोड आ बरिआर सनेस पठावत ई कहानी बहुत कुछ सोचे प मजबुर कई रहल बिआ , उमेद बा लोगन के आंखि खुलि जाई एह के पढला के बाद !
धन्यवाद एह कहानी से हमनी के परिचय करावे खाति
जय भोजपुरी
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on January 29, 2012 at 9:39am
Comment by Sanjeev Kumar on January 29, 2012 at 10:07am रिंकू भाई प्रणाम,
अपना करनी के फल त ऐही संसार मे भोग लेबे के बा फेर चाहे ऊ निमन होखे भा बाउर। बाकीर आदमी के अपने माई-बाप से अईसन बेवहार कबो ना करे के चाही। ना जाने केतना दुख-सितम सह के ऊ लोग अपना लईका सन के पढावे ला-लिखावे ला अउर ऐह काबील बनीवे ला कि लईका सन समाज मे ऊठ-बईठ सकs सन बाकीर लईका जब ओह काबील हे जाले सन त अपने रचईता के भुला जाले सन...। ई एगो समाजीक बेमारी बडुवे आज के समाज मे। बहुत दर्दनांक...
बढीया संदेश दिहल गईल बा ऐह कहानी मे। खास कर के अंतीम वाल ऊ लाईन जवना मे लिखल बा कि "बेटा सदा खुश रहा भगवन के कृपा तहरा पर हमेशा बनल रहो,शायेद तहार बेटा तहरा बुढ़ापा में उहे बर्ताव करी जून तू हमरा साथै कईले और हम जौन दुःख भोगनी उ तहरा ना भोगे के पड़ो और हमरा खानी ज़िल्लत के ज़िन्दगी ना जिए के पड़ो ओही खातिर हम हई फिक्स डिपाजिट छोड़ के जात बानी एकरा के आपना बुढ़ापा खातिर सम्भाल के रखिह" बहुत कुछ कह रहल बावे।
जय भोजपुरी
Pranam Bhaiya , Jai Bhojpuri
Bahute bejod khisa post kaini raua man ke ekdum chakchor dihalas
bahut niman ,,,Dhanywad raur
bhaijaan salam |
bahut marmik kahani ,balki ek sanesa kahal jav ta thik rahi |
beta bahu bhul gail ki e hamar babu ji havan lenin bahu ji beta ke budhapa ke bhi
chinta rahal | wah re jamana |
bahut bahut dhanyavad bhaiya |
jai bhojpuri
sanjay pandey
रिंकू भाई सलाम और जय भोजपुरी..
बहूत बेजोड़ सन्देश छुपल बा रवुआ कहानी "जिल्लत" में.....
जे जइसन करी करम वोकरा भोगे के पड़ी.....इ त त्रिकाल सत्य ह..यकरा के कबो झूठ लावल नइखे जा सकत.
आज के बर्तमान परिवेश में रवुआ ये कहानी के प्रासंगिता और बढ़ जात बा..
बहूत बहूत धन्यवाद..
रिंकू भाई प्रणाम,
बेजोड़ सनेश पठावत राउर कहानी आजू के जमीनी हकीकत बयान कर रहल बिया.
एह कहानी से परिचय करावे खातिर धन्यवाद.
जय भोजपुरी
Comment
© 2012 Created by Admin.
You need to be a member of JaiBhojpuri.com to add comments!
Join JaiBhojpuri.com