Come, let's do something for Bhojpuri...
सिवान। "एक लाख से बेसी लोगन के जमावडा एह सम्मेलन के सफलता के कहानी कह रहल बा, अउर हमरा गर्व बा कि हम एह आयोजन के हिस्सा बानी," भोजपुरी लोक गायक भरत शर्मा ब्यास भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन के मंच पर पहुँचते साथ कहलन। एह सम्मेलन के हिस्सा रहल हर आम अउर खास आदमी के मन में एके भावना रहे - भोजपुरी के विकास, अउर एह लक्ष्य के प्राप्ति खातिर नवहा लोगन के प्रयास देखे लायक रहे।
कार्यक्रम के शुरुआत सबेरे आठ बजे "प्रभात फेरी" से भइल। पंजवार के दूगो स्कूल अउर एगो इंटर कॉलेज के छात्र-छात्रा लोगन का संगे-संगे स्थानीय लोग (भोजपुरिया डॉट कॉम के पहिला पन्ना पर वीडियो देखीं) जब 2 किलोमीटर से लमहर मानव-श्रृंखला (उहो 2 अलग-अलग लाइन के) बना के निकलल, त गाँव के लोग बरबस कह उठल - "जब भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन के आगाज अइसन बा, त फेर अंजाम कइसन होई।" अउर जइसे-जइसे सम्मेलन आगे बढत गइल, ई सम्मेलन कई गो अइसन लोगन के आश्चर्यचकित करत गइल, जेकरा एह तरह के सैकडन गो सम्मेलन में भाग लेवे के अनुभव बा। "मंच पर स्कूली लइकन के भाषण, अउर ओकरा बाद प्रस्तुत भइल नाटक अदभूत रहे। कुल मिला के पूरा आयोजन एह तरह के बाकी आयोजनन से अलग रहे, अउर बाकी संस्था अउर आयोजन करे वाला लोग एह आयोजन से काफी कुछ सीख सकेला," प्रसिद्ध साहित्यकार गंगा प्रसाद 'अरुण' कहलन।
प्रभात फेरी के बाद दोपहर बारह बजे कार्यक्रम के उदघाटन प्रसिद्ध साहित्यकार अउर जय भोजपुरी परिवार के वरिष्ठ सदस्य व्रतराज दुबे 'विकल' दीप जला के और डा. राजेंद्र प्रसाद के फोटो पर माल्यार्पण कर के कइलन। अपना संबोधन में ऊ कहलन कि "भोजपुरी के विकास में भोजपुरिया डॉट कॉम अउर जय भोजपुरी डॉट कॉम नियन वेबसाइटन के अतूल्य योगदान बा। भोजपुरी के कई गो साहित्यकार लोग हिंदी के बढावा देवे के नांव पर भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में शामिल करे के विरोध करेला, जवन गलत बा। हमनी के एकजुट होके एह दिशा में काम करे के चाहीं, अउर भोजपुरी के बदनाम करे वाला अउर अश्लीलता फैलाये वाला लोगन के विरोध होखे के चाहीं।" ऊ इहो कहलन कि भोजपुरी भाषा पर मुठ्ठी भर लोग सांप नियन कुंडली मार के बइठ गइल बाटे, अउर एह भाषा के खतम करे के कोशिश कइ रहल बा, अइसन लोगन के विरोध होखे के चाहीं।
उदघाटन के बाद स्थानीय कलाकार मधुबाला शर्मा "गाय के गोबरे महादेव..." गीत से कार्यक्रम के शुभारम्भ कइली। स्थानीय स्कूल-कॉलेज के पाँच गो लइका-लइकी "भोजपुरी बोले में लाज काहें" विषय पर भाषण दिहलन, अउर नवहा पीढी के भोजपुरी के प्रति जागृत करे के कोशिश कइलन। छोट-छोट लइकन के ज्ञान अउर बोले के अंदाज देख के ओहिजा मौजुद बड-बड साहित्यकार लोग चकित रहे। वरिष्ठ साहित्यकार विश्वनाथ शर्मा के शब्दन में "नवका पीढी के ई अंदाज दिल के छू गइल। पुरनिया लोगन के सहभागिता त हर सम्मेलन में रहेला, लेकिन नवहा लोगन के मंच पर बोलत देख के ई साफ बुझाता कि भोजपुरी के आगे बढे से अब केहु ना रोक सकेला।"
ओकरा बाद स्थानीय "कस्तुरबा गाँधी इंटर कॉलेज" के छात्रा लोग मिल के एगो नाटक (आईं, भोजपुरी खातिर कुछ कइल जाव...) पेश कइल। नाटक के जरिये भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करे के, अउर भोजपुरी गीत-संगीत से अश्लीलता हटाये के माँग पुरजोर तरीका से उठावल गइल। जय भोजपुरी परिवार के वरिष्ठ सदस्य संजय कुमार सिंह द्वारा लिखल एह नाटक के जीवंत मंचन के दौरान कई गो अइसन भावपूर्ण दृष्य आइल, जब अमित झा (फिल्म लेखक) अउर दिग्गज साहित्यकारन का संगे-संगे आम लोग भी आँखि के आँसू पोछत नजर आइल। प्रसिद्ध साहित्यकार जयकांत सिंह 'जय' के शब्दन में - "भोजपुरी माई के दर्द के अइसन जीवंत प्रस्तुति आज से पहिले ना देखे के मिलल रहे। हम एह तरह के अनगिनत प्रोग्राम में गइल बानी, लेकिन अइसन कार्यक्रम आज ले ना देखनी। भोजपुरी के प्रति ई एगो सराहनीय पहल हवे, अउर एकर विस्तार होखे के चाहीं।"
सांझि के चार बजे साहित्यकार लोग मंच पर आइल। एह साहित्यिक सत्र के अध्यक्षता व्रतराज दुबे 'विकल' कइलन, जबकि संचालन सुनील कुमार 'तंग' (तंग इनायतपुरी) कइलन। एक के बाद एक, कई गो दिग्गज कवि अउर साहित्यकार लोग मंच पर आवत गइल, अउर भोजपुरी के रंग बिखेरत गइल। एह सत्र में मुख्य अतिथि गुप्तेश्वर पाण्डेय (पुलिस महानिरिक्षक, तिरहुत क्षेत्र) मंच पर चहुंपलन, अउर ओहिजा के माहौल देख के भावुक हो गइलन। करीब 50 मिनट के अपना संबोधन में हमनी के मुख्य अतिथि एगो भोजपुरिया ज्यादा लगलन, आ पुलिस अधिकारी कम। अश्लीलता पर प्रहार करत ऊ कहलन कि "भोजपुरी के बदनाम कइ रहल गायक, संगीतकार, गीतकार अउर कैसेट कंपनियन के विरोध होखे के चाहीं। जब ले हमनी का भोजपुरी में ना बोलब जा, अउर बाकी लोगन के भोजपुरी बोले खातिर ना प्रेरित करब जा, तब ले भोजपुरी के विकास के कल्पनो नइखे कइल जा सकत।" (उनका भाषण के मुख्य बिन्दु खातिर रिलेटेड आर्टिकल देखीं)

सम्मेलन में सिवान के साहित्यकार शिवजी राय 'सनेही' के किताब "लहरत भोजपुरी" के विमोचन भी आईजी के हाथ से भइल। उनका बाद एगो छोट लइकी "निम्मी" जब शारदा सिन्हा के एगो गीत पर जब भाव-नृत्य शुरु कइलस, तब एक पल खातिर लागल कि पूरा मैदान सांस रोक लिहलस। भाव-नृत्य के बाद मंच पर अइली मधुबाला, अउर अपना मधुर आवाज से कार्यक्रम के अंदाज बदल देहली। तालियन के शोर के बीच भोजपुरी गीतन के दौर में ओह समय चार चाँद लाग गइल, जब भोजपुरी गीतन के बादशाह भरत शर्मा 'ब्यास' मंच पर अइलन। मंच पर भरत शर्मा अउर अराधना सिंह के पहुँचला के बाद त एक बेर अइसन लागल कि पूरा सिवान ओहिजे, ओह मैदान में पहुँच गइल बाटे। कार्यक्रम के एह सत्र के शुरुआत में जय भोजपुरी परिवार के सदस्य सुधीर कुमार भरत शर्मा के माला पहिरा के स्वागत कइलन, उनका संगे-संगे मधुबाला गयिका अराधना सिंह के स्वागत कइली।
भक्ति गीत "काली माई बाडी हमरा गांव में..." से कार्यक्रम के शुरुआत कइला के बाद भरत शर्मा भोजपुरिया समाज के एगो साफ संदेश दिहलन - "दिल्ली, बंबई, कलकत्ता, चाहे रहिह मसूरी में, पढिह लिखिह कवनो भाषा, बतिअह भोजपुरी में..."। अपना उमिर के पांचवा दशक में भी एह कलाकार में उहे जज्बा, उहे जोश देखे के मिलल, जवना खातिर ऊ मशहूर बाडन। भोजपुरी गीतन के एह अगुआ के जलवा एक बेर जब शुरु भइल, तब फेर समूचा दर्शक लोग ओह में डूबत गइल। मैदान में एको तिल राखे भर के भी जगह ना बाँचल रहे, लेकिन मंच के करीब आये के आपा-धापी से कई बेर अइसन लागल कि कार्यक्रम रोके के पडी। लेकिन ओहिजे मुस्तैद हमनी के स्वयंसेवक लोग अउर खास कइ के बिहार पुलिस के जवानन के सक्रियता के कारण कार्यक्रम निर्बाध गति से चलत रहल। अराधना सिंह का संगे-संगे भरत शर्मा एक के बाद एक गीत गावत गइलन, अउर लोग ओह में झुमत रहल। तालियन के गडगडाहट के बीच जब रात के डेढ बजे एगो गीत "हम त चाहिला बिक जइती प्यार में..." का संगे कार्यक्रम के समापन के घोषणा कइलन, तब मंच पे सन्नटा पसर गइल। नाही भरत शर्मा, अउर नाही दर्शक लोग, केहु के ओहिजा से जाये के मन ना रहे, लेकिन कार्यक्रम के समापन कइल भी जरुरी रहे।
अंत में, एह ऐतिहासिक सफलता खातिर हमनी का पंजवार स्थित नवचेतना समिति के सदस्यन के, अउर पंजवार के एक-एक नागरिक के धन्यवाद दिहल चाहेब, जिनका बिना एह कार्यक्रम के कल्पना भी संभव ना रहे। ओकरा अलावा हमनी का सिवान के मीडिया के, अउर खास कइ के हमनी के रेडियो पार्टनर "सनेही एफ एम" के धन्यवाद दिहल चाहेब, जे दिन-रात एह आयोजन के बारे में लोगन के जागरुक कइलस, अउर ओह लोगन के कार्यक्रम से जुडे खातिर प्रेरित कइलस। जय भोजपुरी परिवार का ओर से एह अवसर पर नवीन भोजपुरिया (दुबई), संजय कुमार सिंह (सिवान), नवीन सिंह परमार (सिवान), पंकज प्रवीण, मोंटू सिंह, शशि कुमार सिंह, राजीव भोजपुरिया, सत्येंद्र कुमार उपाध्याय, ब्रजभूषण चौबे (सब दिल्ली से), बृज किशोर तिवारी (सोनभद्र), अवनीश तिवारी (पटना), अमित झा (मुंबई), अभिनंदन गुप्ता (छपरा), अजीत राय (भोपाल), ज्योति राय (देवरिया), भास्कर रंजन (जयपुर), पंकज कुमार, दीपक कुमार, सोनू (सब बक्सर से), अउर सुधीर कुमार (जमशेदपुर) उपस्थित रहलन।
कुल मिला के, भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन के पंजवार सम्मेलन ऐतिहासिक बन गइल। ई कार्यक्रम एगो अइसन मील के पत्थर बन गइल, जेकर अमिट छाप पंजवार के निवासियन अउर ओहिजा मौजुद कुल्ह लोगन के मन में आये वाला कई सालन तक बनल रही। एकरा संगे-संगे ई कार्यक्रम भोजपुरिया समाज के एगो अइसन राह देखा गइल, जवन एह तरह के आयोजन करे वालन खातिर एगो प्रेरणास्त्रोत बनल रही।
एह से संबंधित खबर एहिजो देखल जा सकेला:
एक लाख लोग जुटल भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन में
छा गइलन आईजी गुप्तेश्वर पाण्डेय...
मंच पर भावुक भइलन भरत शर्मा
भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन : झलकियां
आपन बात : ई सम्मेलन खास रहल
Comment by Manoj Kumar on December 6, 2011 at 3:28pm प्रणाम आ जय भोजपुरी.
भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन-२ ई पुरा कार्यक्रम जीवन भर ला एक यादगार छाप छोड गईल. सबसे बड बात ई दिखल कि जेतना भी लोग उहां जुटलें, सभे कुछ अच्छा देखे, सुने आ गुने खातिर चहुंपल रहलें. त्याग आ समर्पन के भावना से भरल एक बेजोड, अनुठा आ विशाल कार्यक्रम के सफल आ जबरदस्त आयोजन भईल. एकरा पीछे केतना मेहनत भईल होई,आ दिन-रात एक करके काम कईल गईल होई..ई त करे वाला ही बुझ सकेला. आयोजन से जुडल सभे केहु के बहुत-बहुत धन्यवाद आ आभार..
जय भोजपुरी!
आइजी गुप्तेश्वर पांडेय के हाथों कवि साहित्यकार शिवजी राय 'सनेही' जी के पुस्तक के विमोचन के दृश्य...
मंच के नीचे अइसे बईठ के कवनो आयोजक लो कार्यक्रम देखेला...? सादगी के एक मिसाल..!
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on December 7, 2011 at 7:51pm
Comment by pankaj kumar on December 7, 2011 at 9:23pm
Comment by amitesh on December 7, 2011 at 10:37pm wah!..jai bhojpuri..
Comment by Rameshwar Vishwakarma on December 9, 2011 at 3:09pm hum ta aa nahi paini bahut dhuk bhail
Comment by arjun rai on December 16, 2011 at 10:07pm प्रणाम आ जय भोजपुरी!
भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन-२ ई पुरा कार्यक्रम जीवन भर ला एक यादगार छाप छोड गईल. सबसे बड बात ई दिखल कि जेतना भी लोग उहां जुटलें, सभे कुछ अच्छा देखे, सुने आ गुने खातिर चहुंपल रहलें. त्याग आ समर्पन के भावना से भरल एक बेजोड, अनुठा आ विशाल कार्यक्रम के सफल आ जबरदस्त आयोजन भईल!सभे केहु के बहुत-बहुत धन्यवाद आ आभार !
Comment by arjun rai on December 16, 2011 at 10:08pm gr8!!!
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