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धरती बनी गवाह पंजवार के,जब माई के मिली सेहरा स्वाभिमान के

सब केहू के प्रणाम,


खींच के आकाश धरती पर झुकावे के बा, आपन माई के हक़ अब दिवावे के बा I
गूंजे चारो दिशा अईसन आवाज उठावे के बा, पत्थर के तोड़ के अब पानी बनावे के बा II


भले केहू खींचे, भले केहू मींचे अब हाँथ से हाँथ मिलावे के बा I
बना के हान्थन के अब मुठी भोजपुरियन के ताकत दिखावे के बा II

चली चली साथे आ मिलिहन जे काँटे, ओह काँटन के फुल बनावे के बा I
ना रुकी नाही झुकीं आ मिलिहन जे रोड़ा, ओह रोडन के धुल बनावे के बा II

कामयाबी त खुदे चुमिहे अब कदम, मंजिल के मंजिल बनावे के बा I
सुनिहें त उहो आ सुनिहें अब इहो, बहिर के गहिर बनावे के बा II


ढेरे भईल हेने, ढेरे भईल होने, अब माई के माई कहावे के बा I
नाही रही अंजर,नाही रही बंजर, अब पत्थर में फुल खिलावे के बाII


जब मिलिहे संघतिया अपनी जवार के, त कईसे ना सुनिहन उ हमनी के हुंकार के I
उठी जब आवाज ओह धरती पंजवार से, तो रोकले ना रोकायी इ लड़ाई स्वाभिमान के II



जय भोजपुरी

Views: 79

Comment by Shyam Narain Verma on September 22, 2012 at 3:47pm
प्रणाम जी

बहुत सुन्दर । एक दम हड़ियान बा ।

जय भोजपुरी ।
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on September 22, 2012 at 3:52pm

आशुतोष भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी

जबरजस्त आगाज कईनी महाराज , बेजोड लिखनी , भाव से भरल आ मन के बेचैन करे वाला गीत जवन बेचैनी पंजवार जाये खाति बिआ ।

ललकार रचना , जबरजस्त !

चले चले चले के पंजवार !

जय भोजपुरी

Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on September 22, 2012 at 5:55pm

प्रणाम भाई जी ,

का बात बा गरदा मचा दिहनीं रउरा त !
जय भोजपुरी जिहिं भोजपुरी !
Comment by jitendra kumar thakur " dev " on September 22, 2012 at 6:00pm

आशुतोष भाई प्रनाम

जय भोजपुरी

                  खींच के आकाश धरती पर झुकावे के बा, आपन माई के हक़ अब दिवावे के बा I
                  गूंजे चारो दिशा अईसन आवाज उठावे के बा, पत्थर के तोड़ के अब पानी बनावे के बा II

                                                                                                       जय भोजपुरी

Comment by Brij Kishor Tiwari on September 22, 2012 at 6:50pm

जय  हो ........
सुजनी, एह लेखा त.............?
जुटान भईला पर कईसन होई .........

Comment by sanjay kumar singh on September 22, 2012 at 7:11pm

जय हो .........

राउर ललकार संवसे भोजपुरिया समाज खातिर प्राणवायु के काम करी । 

जय भोजपुरी

Comment by Vratraj Dubey 'Vikal' on September 24, 2012 at 5:04pm

भोजपुरिया आन, बान आ सान से भरल बबुआ आसुतोस रंजन ही के कविता पढ़ के मन गदगद हो गइल। दीढ़ संकल्प आ साधना के सामने भगवानो के झुके के पर जाला तऽ संसद आ संविधान के का औकात बा कि ऊ भोजपुरिया अभियान के रोक ली।

पत्थर के पानी आ रोड़ा के धूर बनावे के ताकत भोजपुरिये माटी से आवेला। अपरी भोजपुरी स्वाभिमान सम्मेलन के अवसर पर पंजीआरे में सब आँइट-गोइट बतिआवे वाला लोगन के पँजीआ के हरदी तेल बोलवा देवे के बा।

भोजपुरी संकल्प इहे बा डेग न अब पाछे जाई।

संविधान में पूजल जइहें जाके भोजपुरी माई।।

जय भोजपुरी, जय भोजपुरिया।

Comment by संजीव सिंह on September 26, 2012 at 12:03pm

आशुतोष भईया प्रनाम,

बवाल..., एकदम बवाल बावे ई ललकार। गजब कईले बानी रउआ त...। एही त जोश भरत रहला के काम बावे। मंजील जरूर भेंटाई एक दिन अउर “ऊ” त सुनबे करीहे...। सुनीहे ना त जईंहे कहाँ?

जय भोजपुरी

Comment by Bishwajit yadav on September 26, 2012 at 10:28pm
जय भोजपुरी
परनाम रंजन भाई जी बहुत जबरजस्त रचना गरदा....

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