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हमनी का त रोजे Earth Hour मना रहल बानी

कुछ दिन पहिले एगो नया सिगुफा सुने में आइल ह - Earth Hour। लोग ओह दिन बहुत जोर-शोर से प्रचार कइल बिजली बचाये के, आ अखबार में फोटो भी देखे के मिलल कि कइसे एक घंटा ले इंडिया गेट, पेरिस के एफिल टावर आ कई गो अन्य जगह पर एक घंटा ले बिजली के बन्द कइ दिहल गइल, आ ओहिजा अंधेरा पसरल रहे, आ ओही अंधेरा के देखे खातिर ओहिजा लोगन के भीड लागल रहे।

पता ना काहें, हमरा एह कुल्ह में दिखावा आ तमाशाबाजी से बेसी कुछ ना लउकल। लागल कि जबरदस्ती कुछ लोग बिजली बचाये के सिखा रहल बा, ओह लोगन के, जेकरा एह गर्मी में एसी दफ्तर आ एसी गाडी के आदत पड गइल बाटे। आपन बात बताईं, त हम देश के सबसे अमीर राज्य (खनिज पदार्थ के मामला में) के सबसे बढिया माने जाये वाला शहर जमशेदपुर में रहेनी। देश के पहिला औधोगिक शहर के दर्जा पा चुकल जमशेदपुर के कुछ इलाका (जवन टाटा ग्रुप के अधीन आवेला) में त चौबीसों घंटा बिजली रहेला, लेकिन ओकरा अलावा पूरा शहर पिछला 15-20 दिन से दिन में खाली 10-12 घंटा (कबो-कबो 8 घंटा) बिजली पा रहल बाटे। आ ई हालत तब बा जब झारखंड में ना सिर्फ पनबिजली (दामोदर घाटी निगम द्वारा) के उत्पादन होला, बल्कि बिजली बनाये के काम में आये वाला कोयला भी एहिजा बहुतायत मात्रा में पावल जाला।

बिजली के हाल ई बा कि एक घंटा आयेला, आ फेर एक घंटा (कबो-कबो 2 घंटा) खातिर गायब... ओह एक घंटा में कुछ साथ त इनवर्टर दे देवेला, आ ओकरा बाद या त जेनरेटर (अगर बा तब) चलाईं, या फिर 43 डिग्री सेंटीग्रेड में गरमी के मजा लीं। कई बेर लोग बिजली बोर्ड के कार्यालय के घेराव कइल, लेकिन कवनो नतीजा ना निकलल। सांचो कहीं त हम शुरु से एह शहर में रहल बानी, लेकिन बिजली के एतना किल्लत कबो ना रहे।

आज हमनी का ई सोचे खातिर मजबूर बानी जा कि बिहार से अलग होके आखिर हमनी के का मिलल, 5800 करोड (शायद ज्यादा) के घोटाला के सिवा? का ओह आम आदमी के सपना पूरा भइल, जवन झारखंड का संगे आपन विकास के बात सोचले रहे? एक ओर जहाँ बिना कवनो इंडस्ट्री आ खनिज-संपदा के बिहार रोज विकास के नया कहानी लिख रहल बाटे, ओहिजे दोसरा ओर हमनी का रोज पिछडत जान बानी। बिहार में कोयला नइखे, लेकिन ओहिजा पावर ग्रिड बा, कई गो प्राइवेट कंपनी बिजली बाँटे खातिर तैयार बाडी सन, लेकिन झारखंड के का...? एह हालत के झेलला के बाद बहुत खीस बरेला, जब केहू अलग पूर्वांचल के माँग करेला। ओह लोगन के हम न्योता देब कि एक बेर आईं, आ झारखंड में देखीं कि जरुरी का बा - सुशासन या अलग राज्य? आ अलग राज्य से केकरा आ केतना फायदा हो रहल बाटे, इहो एहिजा साफ लउक जाई।

झारखंड के सरकार एतना कर्मठ बिया कि पिछला 3-4 साल में करीब चार-पाँच हजार करोड रुपया वापस केन्द्र के लवट गइल बा, काहें कि सरकार ओकर इस्तेमाल ही ना कइ पवलस। फिलहाल त हमरा इहे लागता कि झारखंड में पिछला 9-10 साल के सुशासन(?) के ई असर बा कि हमनी का बहुत आगे पहुँच गइल बानी जा। एतना आगे कि हमनी के रोज के 10-12 घंटा के earth hour से अब दुनिया सिखे के कोशिस कइ रहल बिया, कम से कम दुनिया एक दिन एक घंटा तक (जान-बुझ के) पावर-कट के मजा त लिहलस। चौबीसों घंटा पंखा आ एसी में रहे वाला लोगन खातिर ई एगो नया अनुभव होई। लेकिन, कबो ओह लोगन के बारे में जरुर सोचीं, जिनका शायद दिन में 2-4 घंटा भी बिजली ना मिलेला, जिनका खातिर आजादी के 63 साल बाद भी बिजली त दूर, रोटी, कपडा आ मकान भी एगो सपना बा।

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Tags: बिजली, समस्या

Comment by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on April 4, 2010 at 9:25pm
सुधीर जी प्रणाम आ जय भोजपुरी


बधाई बा एह बरियारी के अर्थ दिन , अर्थ सप्ताह आ अर्थ महिना आ उमेद बा अर्थ सालो हो जाई , काहे की अब ई बात घण्टा के नईखे रही गईल ।

झारखण्ड भारत के कई गो तापीय परियोजना के कोयला देला जवना से कई गो शहर , गाव , घर मे उजाला होला लेकिन कहल जाला नु चिराग तले अन्धेरा त बस ई कहानी रउवा किहा नीमन से लउकत बावे ।


झारखण्ड आ यु पी के स्थिति मे कवनो खास अंतर नईखे । बस अंतर बा कि यु पी मे कुछ पार्क रातो मे उजर लउकेला बाकि सगरे अन्हार बा , हम तो कबो कबो सोचेनी की अगर आदमी आकाश मे जा के यु पी के देखी त इहो एगो आकाश लागी ( जहवा बडका पार्क बा उ चनरमा हो जाई आ जहवा जहवा छोटका छोटका पार्क बा उ तारा ) बाकि ता करिया ( अन्हार बडले बा )

जहा तक अर्थ आवर मनवला के बात बा त सही कहनी रउवा की ई ओकरा खातिर बा जेकर मन एसी मे रही रही के अकुता गईल बा भा जेकरा अन्हार नईखे लउकत त उ लोग बिना एसी मे रहे खातिर आ अन्हार देखे खातिर अर्थ आवर मना लेत बा ।


खैर ई स्थिति कब सुधरी इ त सरकार लोगन के हाथ मे बा लेकिन अगर कुछ चाही त जनता के आपन स्वभाव आ डीमांड के एक बार फेरु से निहारे के पडी , देखे के पडी आ जांचे के पडी की हमरा का चाही आ उ चीज के पुर्ति के कई सकेला ।

रउवा बहुत ही नीमन तरिका से अर्थ आवर दुमुहा रुप , झारखण्ड मे बिजली के सम्स्या आ सरकारन , नेतावन के अईसन सब चीजन मे एशो अरामा , मस्ती के अपना लेख मे देखा देले बानी । जे भी झारखण्ड से अंजान होई ओजुगा के स्थिति से अंजान होई शायद आ हम उमेद करत बानी की राउर ई लेख के पढ के राउर एह अर्थ आवर के जिनगी के बुझ गईल होई ।

खैर हम त इहे कहब की शायद आगे के जिनगी मे से कुछ अन्हार निकली आ शायद बाकी लोगन के तरह आ सही मायने मे रउवा भी अर्थ आवर मनावे के मोका मिली फिलहाल त हमार चिंता रउवा संगे बा ।

जय भोजपुरी

राउर आपने
नवीन भोजपुरिया
Comment by Pankaj Praveen on April 4, 2010 at 10:04pm
अभी टी गर्मी के सुरुवात बा सुधीर जी ,, अभी बढे दी गर्मी फिर Earth Hour ना Earth Days मनावे के पड़ी, सुकर बा की हमनी के इंडिया इतना महान जे Global Worming खातिर इतना जादा सचेत बा ..
Comment by FAIYAZ AHMAD [RINKU] on April 4, 2010 at 10:25pm
सुधीर भाई जय भोजपुरी और सलाम,
पिछला साल हमरा बिलासपुर में भी एह बात के खबर एक दिन पाहिले अख़बार में छप गईल रहे,
और जनातानी,ओह दिन जब इ अर्थ घंटा मनावल गईल ओह १ घंटा में २५ गो घर में चोरी हो गईल/
यानि चोरवन सन के पहिलही से पता रहे की हेतना बजे से हेतना बजे तक चारो तरफ अँधेरा रही ,और एह जानकारी से ओकनी के खूब फाईदा उठवला सन/
ओह वजह से एह साल इहा अर्थ घंटा न मनावल गईल हा/
Comment by sanjay panday on April 5, 2010 at 11:29am
सुधीर भैया पर्णाम |
बहुत सही बात कहनी रौआ ई एकदम ज़बरदस्ती बा |आ नाटक के शिवा कुछ ना |
भाई जी हम बाम्बे मे राहीला एह के हालत ई बा की विजली आ पानी बचावे खातिर बहुत कुछ कहाल जाला लेकिन काइल कुछ ना जात |
एह के रोड के लाइट दिन मे भी जलेला आ कहाल जाला की बिजली बचावा पिए के पानी डू घंटा से जाड़ा ना रहित आ बी एम सी के पाइप हमेशा फूटल बा ता ई ता हालत बा हमारा देश के |
पिसाई ग़रीब ही चाहो जैसे ई बात सही बा || धन्यवाद
जय भोजपुरी
रौरे आपन संजय पांडे
Comment by ABHA SINHA on April 5, 2010 at 12:44pm
सुधीर जी ,
एकदम सही कहनी हा रौवा | हमरा देने हमनी के रोज एहे मनावेली जा , पर आज ले कोई चर्चा न भइल ..............:)
Comment by Brij Kishor Tiwari on April 5, 2010 at 1:00pm
जय भोजपुरी ......सुधीर जी

एकदम सही कहत बनी रौवा .....हमनी के ईहा त इ रोज़ के बात ह ,
बलुक इ कहल जा सकेला की हमनी के earth hour न earth day या कबो कबो त earth night मना लेवेलिजा

लेकिन उनकर earth hour के एकदम से नाकारल भी न जा सकेला ,
अब दखी एक जगह खाही के नईखे................. तब के भूखल
आ खाए के इफरात बा ...............तब के भूखल, में
अंतर त बटले बा ..............
और हम त कहब की स्वागत योग्य बा ...........
..
रह गईल झारखण्ड सरकार के बारे में बात कईल त ,ओह पर त .................
कहहु में लाज लागेला ...........
Comment by Mantu Singh on April 5, 2010 at 2:33pm
Abhi tak ta hamni ke ishthiti thik ba bhaiya, na ta earth hour, na hi earth day nahi earth night aage aage dekhi ja ka hot ba........
Comment by binay kumar pandey on April 5, 2010 at 3:36pm
hum t jabse paida janam lele bani tab se hi apna gaon ke earth hour manawat dekhni..uhe ak ghanta ke na ..chaubiso ghanta ke. bahur pahile bijli aawe khatir pole lagal jawan aaj chipri pathe aur gaay- goru bandhe ke kaam aawata. taar jawan lagal rahe tawana ke log kaat ke regni bana lelas..log wohi par kapra sukhawat baa...sarkare ke kahe dos de tani log bhi t kauno kam naeyekhe...
Comment by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on April 5, 2010 at 3:53pm
बिनय भाई प्रणाम आ जय भोजपुरी

अचरज ना भईल हा लेकिन तनी अजीब लागल हा की रउवा गाँव के बारे मे सुन के , काहे की कुछ 15-16 साल पहिले हमरो गाव के स्थिति अईसने रहल लेकिन काफी बदलाव भईल आ आरी कगरी के गाँव के स्थिति मे भी बदलाव भईल ।


ई बात राउर सही बा की ताली दुनो हाथ से ना बाजेला आ दुनो तरफ से प्रयास होखे के चाही ।


रउवा से एगो निहोरा बा कि तनि अपना गाव के बारे मे हेजुगा ( नीचे दिहल लिंक पे ) लिख दी

आई , आपन आपन गांव से एक दुसरा के परिचय करावल जाउ !
http://www.jaibhojpuri.com/forum/topics/3634233:Topic:70309

उमेद बा रउवा लिख देब जवना से हमनी के विस्तार से रउवा गाँव के बारे मे जाने के मिली

धन्यवाद आ जय भोजपुरी

राउर आपने
नवीन भोजपुरिया
Comment by sanjay kumar singh on April 6, 2010 at 9:04am
सुधीर जी ,प्रणाम !

इतना बढ़िया पोस्ट खातिर बहुत -बहुत धन्यवाद |

हमरा गाँव में आज से लगभग बीस साल पहिले बिजली आवत रहे | लेकिन एके रात में बीस किमी तार कटा गइल | तब से लेके आज तक हमनी के अर्थ आवर मनावत बानी जा |
सबसे ढेर अर्थ आवर मनावे में त ओ चोरवन के भूमिका बा जवनकबो कंटिया फंसा के आ कबो तार काट के अर्थ आवर मनावे खातिर मजबूर कर देत बाडन स |

जय भोजपुरी

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