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भोजपुरी के शेक्सपियर के दर्जा पा चुकल भिखारी ठाकुर के जनम दिन काल्ह 18 दिसम्बर के आइल, आ चल भी गइल, बिना कवनो हलचल के।
जी हाँ, हम जान तानी कि कुछ जगह कुछ कार्यक्रम भइल ह, आ ओह में भिखारी ठाकुर आ उनुका योगदान के भी याद कइल गइल, लेकिन ऊपरी मन से। भिखारी ठाकुर के समाज पर जवन असर रहे, ओकरा मुताबिक एह कार्यक्रमन में जुटल मुठ्ठी भर लोगन के भीड शायद भिखारी ठाकुर के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लगावत लउकल। उनुकर 122वीं जयंती के अवसर पर छपरा में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में मॉरीशस से आइल सरिता बुद्धु जी का संगे- संगे भोजपुरिया समाज से गणमान्य लोग जुटल रहे। कार्यक्रम त बढिया रहे, लेकिन ओह जज्बा के, ओह बदलाव के कमी खलल, जवन भिखारी ठाकुर के उपस्थिति मात्र से पूरा हो जात रहे। एह तरह के कार्यक्रम त वइसे पूरा हफ्ता अलग- अलग जगह पर चलत रही, लेकिन ना त ओह कार्यक्रम के आयोजकन में भिखारी ठाकुर वाला जुनून बा, आ ना ही आम लोगन के ओह तरह के जुडाव, जवन भिखारी ठाकुर का समय लउकत रहे।
भिखारी ठाकुर एगो गायक रहले, गीतकार रहले, नाटककार रहले... आ ओह सभ से बढ के एगो समाज- सुधारक रहले, जिनकर एक गीत पर समाज के दशा आ दिशा बदल जात रहे। भले ही शायद आज- काल्ह के गायक लोग, फिल्मकार लोग केतनो प्रसिद्ध हो जाव, लेकिन केहू में ऊ माद्दा नइखे कि अपना गीत, अपना कार्यक्रम के बल पर समाज में फैलल कवनो कुरीति के सुधार सकस। ऊ भिखारी के गीत के ही असर रहे कि समाज से "बेटी बेचवा" आ आउर ना जाने केतना कुरिति गायब हो गइली सन। आज से पचास साल पहिले भिखारी ठाकुर अपना नाटकन का माध्यम से नारी-मुक्ति आ नारी-उत्थान के जवन प्रयास कइले, जवन सोच देखवले, आउर जवन बदलाव ले अइले, एह देश में महिला के नाम पर चले वाली कवनो सरकारी भा गैर-सरकारी संस्था शायद अगिला पचास साल में भी ओकर बराबरी ना क पाई।
बिदेशिया से लेके बेटी-बेचवा, भाई-विरोध, पुत्र-वध, गबर-घिंचोर, आ बेटी बियोग ले, उनुकर हर नाटक में समाज खातिर एगो बरियार संदेश छूपल रहत रहे। चाहें ऊ कमाये बाहर गइल पति के याद में कलपत पत्नी के व्यथा होखो, चाहें एगो अइसन बेटी के आंसू, जेकरा के ओकरा से दुगुना उमिर के मर्द के बेचे (बियाहे) के कोशिश होत होखे... समाज में महिला के खराब हालत पर भिखारी से ज्यादा, आ उनुका से बढिया केहू नइखे लिखले। आ उनुका के ई सब लिखे, करे, आ कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाये के खामियाजा भी भुगते के पडल, समाज के तथाकथित ठेकेदार लोग भिखारी के विरोध में खडा हो गइल... लेकिन ऊ शायद सांच के ही ताकत रहे, जेकरा सामने सबके झुके के पडल। समाज में एगो क्रांतिकारी बदलाव लाये में सफल भइले भिखारी। उनुकर सफलता के आलम ई रहे कि प्रसिद्ध साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन उनुका के "भोजपुरी के शेक्सपियर" के उपाधि दिहलन, आ अंग्रेज सरकार "राय बहादुर" के उपाधि से नवजलस... लेकिन एह सभ सम्मान से भिखारी में तनिको गुरुर ना आइल, ऊ आखिरी दम तक ओही तरह अपना नाटकन के माध्यम से समाज के जगाये में लागल रहले।
अब एकरा के सरकारी उदासिनता कहीं या कुछ आउर, 18 दिसम्बर 1887 में छपरा (सारण) के जवन गांव (कुतुबपुर, दियरा) में उनुकर जनम भइल, ओह गाँव तक अब ले विकास के एको किरण नइखे पहुँचल, लेकिन तबो ओकरा के लोग भिखारी के गांव के नाम से ही जानेला। ओह जमाना में ना कवनो माइक होत रहे, ना ही लाउडस्पीकर, लेकिन तबो भिखारी के आवाज समाज के हर तबका के झकझोरे खातिर काफी रहत रहे। अफसोस इहे बा कि भोजपुरिया समाज के नया पीढी एगो महान नाटककार, एगो युग पुरुष, एगो समाज- सुधारक के नाम काफी हद तक भुला चुकल बाटे, आ जवन कुछ बचल भी बा, ऊ भुलाये के प्रयास में लागल बा।
एह आलेख के रउरा एहिजा भी पढ सकेनी:
http://www.bhojpuria.com/v2/index.php/samachar/vishesh/1153-bhikhar...
भिखारी ठाकुर के जीवनी पढे खातिर एहिजा क्लिक करीं
http://www.bhojpuria.com/v2/index.php/culture/our-people/309--bhika...
Comment by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on December 19, 2009 at 9:02am
Comment by mrs. saroj on December 19, 2009 at 11:09am
Comment by FAIYAZ AHMAD [RINKU] on December 19, 2009 at 12:30pm
Comment by nikhil pandey on January 27, 2010 at 8:39pm
Comment by Pankaj Praveen on December 18, 2010 at 10:51am भीखारी ठाकुर के जनम दिन पर शत शत नमन बा ...
Comment by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on December 18, 2010 at 10:54am सुधीर जी प्रणाम आ जय भोजपुरी
जन्मदिन के बहुत बहुत बधाई देब एह महापुरुष के आ हम इहे कहब की आज के समय मे भोजपुरिया समाज आ पुरा देश रउवा के मिस कई रहल बा , राउर कमी के भरपाई आजु ले ना भईल , ना केहु जरियो ले पहुंचल ।
शत शत नमन बा एह दिव्य महापुरुष के ।
जय भिखारी ठाकुर
जय भोजपुरी
Comment by mrs. saroj on December 18, 2010 at 11:12am "भिखारी बाबा "जी के जनम दिन पर कोटि कोटि नमन बा .....
जय भोजपुरी
Comment by Dinesh Thakur on December 18, 2010 at 11:24am सुधीर भईया प्रणाम आ जय भोजपुरी
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