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बबुआ, तीन बरिस पे . . .

हमार ई रचना ओ लोगन के समर्पित बा, जे गाँव से शहर जा के कमात बा, भा पढ़त बा । अइसने लोगन में से कुछ लोग शहरिया रंग में एतना जल्दी रंगा जाला कि, घरे वापस पहुँचला पे, माई-बाप से तेरे को आ मेरे को शुरु क देला । अब अइसन लोग के रउआ बेवकूफ, बद्तमीज़ भा बनतू कुछु कहि सकेनी ।

बबुआ, तीन बरिस पे , अबकि, घरे आइल बा ।
कुकुरो से अंगरेजी बोले, भोजपुरिया भुलाइल बा ।।
बीछौना पे, चाय माँगे , बिना, दतुअन - कुल्ला ।
सिगरेट फूंके बिना लजइले, घर में, खुल्लम-खुल्ला ।।
सूतत - उठत , ओकरी, हथवा में मोबाइल बा ।
कुकुरो से अंगरेजी बोले, भोजपुरिया भुलाइल बा ।। बबुआ . . . .
खबर पाके, मिले अइलन, यार लंगोटिया, नन्दू ।
झार देहलस, उनके कहि के, आई डोन्ट लाइक यू ।।
नन्दू , रोअत बाँड़े , बाति अब, बुझाइल बा ।
कुकुरो से अंगरेजी बोले, भोजपुरिया भुलाइल बा ।। बबुआ . . . .
राही में मिललें चुन्नू चाचा, बबुआ बोललस हैल्लू ।
बड़ी जोर से, चाचा डटलें , होश में, रsह लल्लू ।।
एही बाति पे, बबुआ , चाचा से खिसिआइल बा ।
कुकुरो से अंगरेजी बोले, भोजपुरिया भुलाइल बा ।।
बबुआ, तीन बरिस पे , अबकि, घरे आइल बा ।
कुकुरो से अंगरेजी बोले, भोजपुरिया भुलाइल बा ।।

धन्यवाद ----- जय भोजपुरी ।
अनूप श्रीवास्तव

Views: 10

Comment by Brij Kishor Tiwari on April 15, 2010 at 1:50pm
जय भोजपुरी अनूप जी
इ त धमाल बा जी ...........
इत एकदम रउवा चित्र ना बनवली.........उहे एकदम से लिख देहली

बबुआ, तीन बरिस पे , अबकि, घरे आइल बा ।
कुकुरो से अंगरेजी बोले, भोजपुरिया भुलाइल बा ।।
बीछौना पे, चाय माँगे , बिना, दतुअन - कुल्ला ।
सिगरेट फूंके बिना लजइले, घर में, खुल्लम-खुल्ला ।।
सूतत - उठत , ओकरी, हथवा में मोबाइल बा ।
कुकुरो से अंगरेजी बोले, भोजपुरिया भुलाइल बा ।। बबुआ . . . .

वह बहुत सुन्दर रचना बा .........
साधुवाद बा जी रउवा के
जय हो
Comment by jitendra rs chauhan on April 15, 2010 at 3:14pm
जय भोजपुरी अ प्रणाम अनूप जी

एक दम सच्चाई के उजागार कर देले बानी......
कुछ लोग बा ............बहुत ही बढ़िया तरीका से देखा देहले बानी ....

नविन भैया इन लोग के नाम बहुत बढ़िया रखले बाटे तिनाहिया हीरो .....

बहुत खूब...धन्यवाद
जय भोजपुरी
Comment by नवीन भोजपुरिया ( NB ) on April 15, 2010 at 3:39pm
अनुप भाई प्रणाम आ जय भोजपुरी

जितेन्दर भाई सही कहनी हा ओकनी के नाव हवे 'टिनहिया " ( टिनहिया माने की टिन जईसन , जईसे की टीन के बर्तन पे धीरे से मारी लेकिन आवाज अईसन करेला कि कहे के ना , वोहि तरे ई लोगन बस शहर गईल लो ना कि एक द्म झम झम बाजे लागत बा लो )

कुछ लाईन बा -

बबुवा गईले बहरा सीख के अयिले बानी |
वाटर वाटर कही के मुवले लगिए रहल पानी ||

टिप टाप में घुमे बबुवा बनल टिनाहिया हीरो !
हाईस्कूल में फेल भईल पयिलस नंबर जीरो ||

ई एगो साल आईल बा नया कई के मुक्तक जईसन रहल वोह मे के लाईन हवे

जींस टी - शर्ट मे मताईल , कंघी के राखस पर्स मे
लहरा लहरा के बार झारस , साल आईल बा नया

पइसा उडा दे बूट पे , क्रीच के आबाद कर
झोक दे आपन जवानी , साल आईल बा नया

मौज मस्ती लार लपटा , तु मना ल आज हो
बेकार हो जयिबा त कहबा , साल आईल बा नया

====


अनुप भाई राउर ई रचना एक दम हकीकत के देखावत बिया , आज के समय मे बहुत लोगन के हम देखत बानी जे शहर मे कुछ दिन गुजार लेत बा त अंग्रेजी झारे लागत बा , हमरा गाव मे भी कई लोग हमरा से अंग्रेजी बोलेला आ उहो तब जब हम भोजपुरी मे बात करेनी आ फेरु उ लोग कहेला कि " हाउ यु आर सरवाईविंग इन सिटीज " ।

खैर जहवा जईसन तहव तईसन भाषा के इस्तेमाल करे के चाही , नाही त NASA के नाशा ( Drugs ) हो जाई आ DO के डु कह्गल जाई त Go .... हो जाई ।

बकि त रउवा बहुत नीमन तरिका से सब बता देहनी अब बारी बा टिनहिया लोगन के कि कुछ सीखस लो सही मायना मे सीखस लो ना त टीन के पचके मे टाईम ना लागेला ।


साधुवाद !


जय भोजपुरी

राउर आपने
नवीन भोजपुरिया
Comment by sanjay panday on April 15, 2010 at 6:08pm
anup bhai parnam a jai bhojpuri |
bahut sahi rachana ba bhai ji raur aisan bahut hot bahamani ke
aari kagari , jekara ke na avat uho angreji kharat ba |
aur datato ba , lekin fir bhi bolat ba ,
ekdam jordar ba raur rachana garda uda deni bhai ji |
dhanyavad
sanjay pandey
Comment by Dinesh Thakur on April 15, 2010 at 7:03pm
अनूप जी प्रणाम आ जय भोजपुरी,

बहुत सुन्दर चित्रण बा, अईसन लोग टीनहिया एसपेशल होखलन
आ जे रहेला से बाबू के देहे पे
धन्यबाद यह रचना खातिर
Comment by sanjay kumar singh on April 15, 2010 at 7:19pm
अनूप भाई ,प्रणाम !

राउर इ रचना सच्चाई के साक्षात् प्रमाण बा | हमनी के ऐसन लोगन से सामना होत रहेला | इ टिनाहिया बिचबिचवा कहालन सन | आपन माटी के भाषा आ माटी के भुला के जवन बनल चाहेलन स उहो ना बन पावेलन स | कहे के मतलब इ कि ना एनिए के ना ओनिये के |

बहुत हीं बढ़िया रचना |

जय भोजपुरी
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on April 15, 2010 at 9:43pm
anup bhai ji pranam

aji ka baat ba bhai ji sachhai ehe ba ka jane kaisen log hole, bhai ji hamni ke maai babuji kora main le ke aail rahni ja faridabad , biyah bhai Gurgaon se Aaj NCR kahal duno per humni ke gher main kehu khadi naa bolela jaldi katna haali ta aisen log miljale 3 barish main aapan bhasa bhula jale puchhla pe ki raua purvanchal se hain ta muh baawele auru bhojpuri se muh churawele aisna log pe sahi katakch biya E kavita dhanyawad anup bhai
खबर पाके, मिले अइलन, यार लंगोटिया, नन्दू ।
झार देहलस, उनके कहि के, आई डोन्ट लाइक यू ।।
नन्दू , रोअत बाँड़े , बाति अब, बुझाइल बा ।
कुकुरो से अंगरेजी बोले, भोजपुरिया भुलाइल बा ।
Comment by Sudhir Kumar on April 15, 2010 at 11:03pm
अनूप भाई, एकदम जबरदस्त, झकास आ सच...
लोग जइसहीं शहर में आवता, सबसे पहिला काम ई करता कि भोजपुरी भुलाये के कोशिश में लाग जाता. आ राउर रचना वइसन टिनहिया लोगन के मुँह पर एगो करारा तमाचा हवे, जे अपना के ढेर बने के कोशिस में लाग जाता.
Comment by Kuldeep Srivastava on April 15, 2010 at 11:45pm
vah anoop bhaiya
sahi kahat bad ek bat ba a bhojpuri munch jetna bhai bahin log judal ba sahi mane me dil se lihal ja ta
bahut sudhar ke sambhavana rahi agar humman ke e sandesh o logan tak bhi pahuchaval ja jaun babua net se dur bane par bhojpuri bhulail ba
Comment by s. chauhan on April 16, 2010 at 1:42pm
अनूप जी बहुत सही चित्रण कईले बानी रऊआ आजकल के हीरो लोगन के .....

बहुत बहुत धन्यवाद

जय भोजपुरी

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