JaiBhojpuri.com

Come, let's do something for Bhojpuri...

प्रनाम आ जय भोजपुरी 


तब -

गांवे मे सब केहु से घरे घरे घर पाछे चांदा असुलाई , फलानवा के घर से पिअर साडी , होकरा घरे असवे बिआह परल रहल ह , उ अपना भउजी के नवका लुगा ले ले आवत बा , तले ले एगो धउरल आवत बा कहत बा हई ल लो ई पंडाल मे खाति सही रही ।

कुछ अईसही गांव मे हेने से होने से जुटाई के साडी से पंडाल सजावल जाई , ताव किना के आई आ बांस प साटल जाई , चमकउवा ताव से तिकोना काटि काटि के लप लप झप झप करे वाला झालर बनी , रोज जगरम होई , गांवे के लोग गवनई करी, गांव के मय मेहरारु लईका फईका लईकी ओईकी रोज सांझि खा आ सबेरे आरती खाति जुटिहन स आ भसान के दिने दुआरी दुआरी जाई के सब केहु के दुर्गा जी के दर्शन करावल जाई फेरु कोलनाला भसान होई । भसान भईला के बाद सब केहु दुखि मन से घरे आई ।


अब -

ढाला प चार गोडा भांग खईले , मुह मे एक लंगे खईनी दबले भा एगो दु गो महुआ पिअले भा गुटखा के डबल पाकिट मुह मे फारत आवत जात सब गाडी वालन से पईसा असुलत ( चँदा त कहे के बा ) रोज सांझि खा ओहि मे से कुछ निकाल के ठेका प चहुंप जाये के बा ।

अब बरिआरी असुलात बा त फेरु अउलाह पईसा भेटा जात बा फेरु शुरु होत बा डरामा , पंडाल के ठीका दिआ जात बा , मुर्ति के अईला के बाद जवन लंगटई शुरु होत बा , अस अ अस फुहर पातर गाना बाजत बा , अतना पियक्कडई होता जवना के कवनो थाह नईखे ।

कहियो कवनो बाईजी आवत बाडी नाचे खाति त कहियो प्रोजेक्टर चलत बा ।

गांव के बड जेठ बुजुर्ग मेहरारु अब दर्शन करे नईखी स आवत स आ भसान के दिने मय पी के देहि भाजत कोलनाला ले जात बाडन स । भसान भईला के बाद ओजुगे से बाजार मे जा के नाक प ले महुआ भा अंग्रेजी आ ओकरा संगे मीट मछरी ।

खैर चलल जाउ हमनियो के बोलल जाउ ! 

जय दुर्गा मईया के ! 

जय भोजपुरी 

Views: 65

Tags: गांव, जय, दुर्गा, पुजा, भसान, भोजपुरी, लईका

Comment by अभिनन्दन गुप्ता on October 24, 2012 at 11:51pm

हमहु गाडी वला सब से चन्दा लेत रहनिहा
मगर आइसन कुछ ना करत रहनी
ओ समय त कुछ ना खात रहनी बच्चा रहनी
अभीओ कुछ ना खानि
लेकिन रौआ सहि कहनि चान्दा के पैसा से
पुकार [गुटका] खा ल  स
आ पाहुच पि के भसावन के दिने गन्गा तिर पे
फ़ुहर गना बजावे ल स
समय बहुत बदल गैल

Comment by RUDRA PRATAP SINGH RAGHUVANSHI on October 26, 2012 at 6:07pm
 ई भाव के भावना में आधुनिकता के समावेश के कारण होता
धन्यवाद
Comment by sanjay kumar singh on October 28, 2012 at 6:46pm

नवीन जी प्रणाम,

भौतिकता के होड में आस्था बहुत पीछे छुट गैल बा । नंगई के पराकाष्ठा दिख रहल बा । भंसान के समय दुर्गा जी के प्रतिमा के आगे अश्लील गीतन के ताल पर जवन नंगा नृत्य देखे के मिल रहल बा ओह से ऐसन लागता कि  माई के बिदाई ना एगो भोगी के बरियात निकलल होखे ।

      जय भोजपुरी

Comment

You need to be a member of JaiBhojpuri.com to add comments!

Join JaiBhojpuri.com

© 2013   Created by Admin.

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service