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आव तारे पियवा ई, लागल ह पाता

आव तारे पियवा  ई, लागल ह पाता /

सोची जे अईहे त, धड़कन धधाता //

बेरी बेरी जाई हम देखि दुआर पर,

ठहरे अचरवा ना अब त कपार पर,

कतनो सम्हरला पर सरके ला साड़ीया,

साँच कही खीस बरे हमरा बेआर पर, 

 देहि में ठेके ला तनिको जो पुरुआ, अंग अंग हमरो बदन सिहिरता /// 

सोची जे अईहे त, धड़कन धधाता //

 

चद्दर बिछाई नया, सेज सरिअवनी

 भरी घरे पियवा के फोटो लगवनी

सइआ  के नाम  लिखल पर्दा लगाके

पर्दा के ऊपर से झालर सजवनी

मधुर मिलनवा के बात जब सोची, भीतर भीतर मन बाड़ा लजाता ///

सोची जे अईहे त, धड़कन धधाता //

 

कही बा देहि अउरी कही बा मनवा

दिने में लउके ला राती के सपनवा

सेजिया पर अईहे करब हम चोन्हा

सटी सटी खुबे मनिईहे सजनवा

बीते ना दीनवा पहाड़  जस लागेला, बेकल हियरवा बहुत अगुताता /// 

सोची जे अईहे त, धड़कन धधाता //

 

नाया नमूना के बुना लगाइ के

कजरा आ लाली से रुपवा सजाई के

रची रची सोलह श्रृगार हम कईनी

दर्पण में  देखि ले घुघुटा हटाई के

लागता सुनी के बलमुआ के आवन, साचो में रुपवा बहुत सुघरता ///

सोची जे अईहे त, धड़कन धधाता //

 

धरी ले डेग चाहे कतनो सहेजी

छुपे ना पावेला देहिया के तेजी

दाषा के भाषा त बहुते छुपाईले

तबो जे देखे उ जात बाटे बुझी

आव ना जल्दी तरसी गईल अंखिया, रघुंवंशी तहरा ना काहे बुझाता ///

सोची जे अईहे त, धड़कन धधाता //

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Comment by Rajnish Kumar Singh on October 20, 2012 at 1:11pm

khubsurat rachna ba bhaiya... Salam ba raura ke.........

Comment by Anoop Srivastava on October 23, 2012 at 10:31am
लाजवाब भाई जी .... बहुत खूब !
विरह से श्रृंगार के ओर सरकत राउर ई रचना वाकई गुदगुदावत बा ...नायिका के बेकलाहट, इन्तजार आ तइयारी के बहुत नीमन आ खाँटी ढंग से पेश कइले बानी रउआ ....धन्यवाद आ जय भोजपुरी भाई जी ।

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