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आँखी मेँ से लुती चुए , रोए बाता बाता ।
कतना महँगाई कइ देल ए बिधाता ।।
सोनिया जी के राज मेँ त अरु जहुआईल बा ।
मए मनमोहिनी मुसुकिए भुलाईल बा ।।
बाबा बाजपेई कहाँ भईल नापाता ?
कतना महँगाई कइ देल ए बिधाता ।।
रोटी बा त दाल नाही , दुनो ना भेटाता ।
सब्जी किने जानी जब त माथा चकराता ।।
बाबा मनमोहन , ताहार चालु ना सोहाता ।
कतना महँगाई कइ देल ए बिधाता ।।
ताहारा ना पिज्जा भावे , रुचे नाही छेना ।
हमनी गरीबवनी के ,कइल दुलम चबेना ।।
करी का बिरोध केहुँ ,गोड़ लड़खड़ाता ।
कतना महँगाई कइ देल ए बिधाता ।।
तहरा सँघतियन के बड़े बड़े खेला ।
एके हाली कर लोग करोड़ो के झमेला ।।
एहिजा त बच्चवन के दुधोँ ना भेटाता ।
कतना महँगाई कइ देल ए बिधाता ।।
तह लोग के कुकुर लक्स डभ से नहाला ।
हमनी के लाइफबाँय दु महीना जाला ।।
सउसे जमीन ,अब बढेरा के दिआता ।
कतना महँगाई कइ देल ए बिधाता ।।
कुरुसी रखैल बनली , चोर पाँकेटमार के ।
आगी लागे , बजर परे अइसन सरकार के ।।
बिगुल बजाव ! मन बड़ी खिसीआता ।
कतना महँगाई कइ देल ए बिधाता ।।
Comment by Umesh Gautam on October 19, 2012 at 3:33pm
Comment by Manoj Kumar on October 20, 2012 at 10:29am उमेश भाई,
बहुत खूब!
जय भोजपुरी
Comment by Umesh Gautam on October 20, 2012 at 10:58am
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on October 20, 2012 at 6:30pm bahute niman umesh ji
jai bhojpuri !
Comment by Umesh Gautam on October 21, 2012 at 12:01pm Comment
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