सूना बा कबसे भवनवा , बलम अब दिवाली पर आजा हो ।
साल भर से भईल सपनवा , सैंया एक झलक दिखा जा हो ।
होली पर कहल जरूर हम आयब , तोहरा के अपना रंग में डूबायब ।
रंग रंग के साड़ी ला के , अपना हाथ से हम तोहके सजायब ।
करत इंतजार बीतल होली , अबो से आके समझा जा हो ।
सूना बा कबसे भवनवा , बलम अब दिवाली पर आजा हो ।
सावन में आवे के कहल , बीतल भादो तहरा असरा में ।
आवे ना पवनी पाती भेजल , सुनी हियरा लागल तोहरा में ।
अब दशहरा आयल सजन , आके मेला घुमा जा हो ।
सूना बा कबसे भवनवा , बलम अब दिवाली पर आजा हो ।
जस जस दिवाली नियरायल , तोहरा से मिले के हियरा धधायल ।
टिकट कराके डेट बताद , तोहरा बिना मनवा मरुवायल ।
वर्मा कब से असरा लगवनी , सैंया जी अब असरा पुरा जा हो ।
सूना बा कबसे भवनवा , बलम अब दिवाली पर आजा हो ।
श्याम नारायण वर्मा
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