काहें बईठल बाड़ मनवा मारी ।
तोहरा के मरले बा बेकारी ।
बी ए एम ए कईके बाहारा ना जाल ।
केतने जगह फारम भरी के पछताल ।
घरवा ना छोड़ब बनव जी के जंजाल ।
घरे बईठल तोहके के दी कहीं काम ,
सगरे ओर बढ़ता बेरोजगारी ।
तोहरा के मरले बा बेकारी ।
हाथ पैर ना हिलईब काम ना चली ।
खेती में मनवा ना लागे तोहार भली ।
दिन भर सुतल रहब जाने सारा गली ।
खुद निठले रहब कहाँ से आई दाम ,
माई बाबु कब ले दिहन सारी ।
तोहरा के मरले बा बेकारी ।
काम ना करब जब सब खिसिआयी ।
खेती से भागेल रोटी के खिआयी ।
कहिया ले चली सैंया तोहरो ढ़िठायी ।
वर्मा अब डिग्री के कब ले लेब नाम ,
घर में कलह होता भारी ।
तोहरा के मरले बा बेकारी ।
श्याम नारायण वर्मा
You need to be a member of JaiBhojpuri.com to add comments!
Join JaiBhojpuri.com