डाक मुन्शी भईया , कहिया ले अईब चिट्ठीया हमार ।
जहिया से पिया गईले छोड़ी के विदेशवा , लिहले ना सुधिया हमार ।
रोज कहेल काल आई पतिया ।
बरसो बीतल अब कटे ना रतिया ।
रोज निहारेनी तोहरो रहिया ,
कब देब पतिया हमार ।
डाक मुन्शी भईया , कहिया ले अईब चिट्ठीया हमार ।
कब अईहे कवनो खबर ना देलन ।
बरसों बीतल कबो सुधियो ना लेलन ।
पता रहे त हम लिखीं पतिया ,
बिकल होला जियरा हमार ।
डाक मुन्शी भईया , कहिया ले अईब चिट्ठीया हमार ।
पाती मिले त लिखीं दिलवा के हलिया ।
बिदेशी बलमा के ईहे बा चलिया ।
वर्मा कब से रहिया निहारीं ,
कबो पतिया ना भेजेलन सजना हमार ।
डाक मुन्शी भईया , कहिया ले अईब चिट्ठीया हमार ।
श्याम नारायण वर्मा
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