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सपना के संपत
(भोजपुरी माई के दसा दोहावली)
येक रात के बात हऽ रहीं कहीं हम जात।
येगो बुढ़िया से भइल रस्ता में मुलकात।।१।।
सुबहित कपड़ा के बिना लागत रहे भिखार।
बिलख-बिलख रोअत रहे रह-रह पुक्काफार।।२।।
कहनी हम तूँ हऊ के, कहँवा बा घर बार।
काहें रोवेलू इहाँ रह-रह सिसकी मार।।३।।
बोलल बुढ़िया बिलख के कथी सुनाई हाल।
जेके हम आपन कहीं उहे बनल बा काल।।४।।
सब कुछ घर में भरल बा, ना बा कहीं अभाव।
लइकन के मारे सदा, मन में टभके घाव।।५।।
बेटी बड़का के हईं बड़का बात विचार।
अपने घर के लोग सब कइले बा लाचार।।६।।
हमहीं भोजपुरी हईं भसवन के रसधार।
सबके करीं सिंगार हम अपने रहीं उधार।।७।।
अजब कहानी हमर बा कइसे करीं बखान।
रोवे के कारन हमर, बा हमरे संतान।।८।।
सिव के हम बेटी हईं माँ गौरी के प्यार।
सगरे परकिरती हमर करे सदा सतकार।।९।।
देवन के फेरा लगल भइल हमर संस्कार।
सरल सुहावन देंह पर बनल बनावट भार।।१०।।
देव सभे अपनाइके दहलें रूप विगार।
संसकिरित लगले कहे हमरा के चुचकार।।११।।
उपसरगे बीसरग सब, गहना बनल हमार।
विभगति प्रत्यय से हमर, होखे लगल सिंगार।।१२।।
दुलहिन हमरा के बना, छिना गइल अधिकार।
हमरा मौका ना मिलल, देखीं हम संसार।।१३।।
रस के गागर छीन के, पीये लागल लोग।
हमरा के बूझे लगल, विसय बासना भोग।।१४।।
झेलत सब झेला इहे हो गइनी हम बूढ़।
केहू ना खोजल कबो हमके मन से ढूंढ़।।१५।।
अब जे खोजे भिड़ल बा ले के मन में चाव।
लागे साधत बा उहो हमसे आपन दाव।।१६।।
केहू पइसा ला हमें चाहे कइल उधार।
केहू अपना नाव ला खोज रहल आधार।।१७।।
लागेला केहू लगे नइखे सही सहूर।
अपना-अपना लाभ ला सभे करे मजबूर।।१८।।
संस्कार आपन हमर, कुहुकेला दिन रात।
नाहीं केहू सुनेला, सही सनातन बात।।१९।।
हमरा गुन मरजाद के सभ्भे कऽकऽ मोल।
बेंचऽता बाजार में, पोथी-पतरा खोल।।२०।।
येही से घर छोड़ के, रो-रो करीं पुकार।
केहू दिलवा दे हमर, जीये के अधिकार।।२१।।
पिंड चकोड़न से छुटे, मिले हमर पहचान।
फुहर-गँवारन से बँचे तनिका हमरो जान।।२२।।
आजादी सबके मिलल, सबके भइल विकास।
कइसन करम हमार बा, दर-दर फिरीं उदास।।२३।।
हमरा के सीधा समझ सभे चलेला चाल।
नेता ना केहू भइल सुने हमर जे हाल।।२४।।
सहत-सहत कबले सहीं हमहू अत्याचार।
संविधान उफ्फर परे जे देता दुतकार।।२५।।
तब कहनी हम सोच के माई सुनऽ हमार।
करुनाकर भगवान से बतिया कहब तहार।।२६।।
करुनाकर के दया से सुधरी तोहर भाग।
करुनाकर के कथा से किस्मत जाई जाग।।२७।।
अब रोव के ना परी राखऽ ई बिसवास।
तहरा खातिर करब हम, सजी बरत उपवास।।२८।।
जान भले जाई हमर, तहर बँचायब मान।
हमरो ईहे परन बा, मदद करें भगवान।।२९।।
होखे ना देहब कबो तहके हमू उदास।
मरजादा तोहर बढ़ी, होखी ना उपहास।।३०।।
तबले हमरा हाथ में आइल इक अखबार।
जवना में छापल रहे सुग्घर सामाचार।।३१।।
संविधान के सूचि में सामिल होके आज।
भोजपुरी के माथ पर चढ़ल खुसी के ताज।।३२।।
बरतराज के हिया के बिहँसल तब अनुराग।
भोजपुरी सामाज के खुल गइल अब भाग।।३३।।
आईं मिलके करीं जा, माई के गुनगान।
सुन लहले सब बात के, करुनाकर भगवान।।३४।।
.....
भजन
दे दीं तनिका ध्यान प्रभु जी दे दीं तनिका ध्यान।
कऽ दीं अब कल्यान प्रभु जी दे दीं तनिका ध्यान।।
ये दुनिया में बइठल रउये सगरे कार कराईं
जे के जहँवा चाहीं तहँवा ले जाके पहुँचाईं
रउरा किरपा बिन ना होखे कवनो कार महान
प्रभु जी दे दीं तनिका ध्यान।। कऽ दीं....।।
भोजपुरी समाज पर आके संकट आज परल बा
भोजपुरी माई के भगिया, लागे आज जरल बा
संविधान टिरकावऽ ताटे देवे में असथान
प्रभु जी दे दीं तनिका ध्यान।। कऽ दीं....।।
लइकन के सब चाल देख के माई बिलखऽ ताड़ी
मन से केहू मदद करे ना आवे कबो अगाड़ी
लाज लुटावे में सब भीड़ल बा अपने संतान
प्रभु जी दे दीं तनिका ध्यान।। कऽ दीं....।।
लइकन के मनवा में प्रभु जी सरधा भाव जगा दीं
नेक नीयती भीतर भर के हर मतभेद भगा दीं
माई के मरजादा खातिर जागे अब स्वाभिमान
प्रभु जी दे दीं तनिका ध्यान।। कऽ दीं....।।
बरतराज के विनती सुन के आ के लाज बँचाईं
अपना माई के गुनगनवा मन से हमनी गाईं
माईं के इज्जत राखे में हो जाईं बलिदान
प्रभु जी दे दीं तनिका ध्यान।। कऽ दीं....।।
Comment by Manoj Kumar on October 6, 2012 at 10:14pm गुरुजी, प्रणाम आ जय भोजपुरी.
भोजपुरी माई के दशा के दोहारुप में सटीक वर्णन ... आ ओतने नीमन भजन, जे के पढला के बाद मन बरबस गुनगुना रहल बा.
दे दीं तनिका ध्यान प्रभु जी दे दीं तनिका ध्यान।
कऽ दीं अब कल्यान प्रभु जी दे दीं तनिका ध्यान।।
....जय भोजपुरी!
गुरु जी प्रणाम,
Comment by sanjay kumar singh on October 8, 2012 at 7:03pm गुरु जी प्रणाम ,
भोजपुरी माई के व्यथा कथा रौवा एतना करीब जाके लिखले बानी कि एक एक शब्द आंखि में प्रतिबिम्ब बन के दिख रहल बा । जवना माई के संतान अपना माई के माई कहे में लजालन ,उपेक्षा के शिकार ओह माई के दर्द कुछ ऐसने होला जवन रौवा बतवले बानी । राउर ई दोहावली शायद ओह बहिर हो चुकल कानन तक पहुंच जाव जवन अपना माई के चित्कार नैखन सन सुन सकत ।
जय भोजपुरी
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on October 9, 2012 at 9:50pm गुरुजी प्रनाम आ जय भोजपुरी
शब्द नईखे , एह रचना के पढला के बादो अगर भोजपुरियन के करेजा ना फाटल त फेरु उ इंसान त होईये ना सकेला ।
बेजोड ! अदभुत , भाव से भरल ई रचना ना ई चित्कार ह भोजपुरिया माई के !
जय भोजपुरी
Comment
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