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आस के दीअरी (दोहा संजीवनी)

आस के दीअरी
(दोहा संजीवनी)

जे जइसन करनी करे, वइसन होखे भाग।
कवनो घर मंगल मने, कतहीं लागे आग।।१।।

जेकर जइसन नियत हऽ, वइसन बने सुभाव।
मुँह मन के अयना हवे, लउके भाव-कुभाव।।२।।

जग हऽ जत्था जुलुम के, जीव रहे लाचार।
हरदम अपना जोस में, करे मुरखई कार।।३।।

गती मती संसार के, नाहीं कवनो थाह।
झूठे मनई कहेला, नीक हमर हऽ राह।।४।।

जे आवे संसार में, राजा ग्यानी संत।
दुखवे में जिनगी बिते, दुखवे से हो अंत।।५।।

ना केहू बड़का हवे, ना हऽ केहू छोट।
समय-समय के बात हऽ, कहवावे सब नोट।।६।।

कुछऊ करे न जगत में, पूजा बरत बिधान।
परसन हो जाले प्रभू, लउके जहँ ईमान।।७।।

जे जतने कोसिस करे, ओतने फँसत जाय।
भव-सागर दुरगम हवे, केहू पार न पाय।।८।।

आपन के आसा तजीं, प्रभु पर सौंपी भार।
भव-सागर के डोभ से, उहे करइहें पार।।९।।

मिले जवन आपन हवे, छूटे तवन विरान।
झूठे सोच-विचार से, जीव रहे परिसान।।१०।।

रीझीने प्रभुजी जहाँ, पता न गुन हऽ कौन।
सास्तर वेद-पुरान सब, लउके उहँवा मौन।।११।।

आपन हऽ सब कहे के, आपन हवे न देंह।
फेरू आपन का बनी, अनका मन के नेह।।१२।।

स्वारथ से संसार बा, स्वारथ बसे परेम।
स्वारथ बिन संसार में, चले न कवनो नेम।।१३।।

आपन नइखे थाह जब, अनकर के ली थाह।
थाहे लेते जगत में, भटके सबके राह।।१४।।

अपना ओर निहार के, तब दीं अनके दोस।
काहें ना माछी झुकी, मइल रखी जे पोस।।१५।

अइसन मत बोली बचन अइसन करीं न कार।
जवना से थू-थू करे ई सगरे संसार।।१६।।

घर में अवते कहीं से माई टोवे पेट।
घर में जे दोसर रहे सभ्भे टोवे चेट।।१७।।

करी प्यार भगवान से गाईं प्रभु के गीत।
करत रहीं सेवा सदा, बन के सबके हीत।।१८।।

भगवन के लीला हवे समझल ना आसान।
मोती भेंटे सीप में, हीरा भेंटे खान।।१९।।

गढ़ी आस के दीअरी, भरीं नेह के तेल।

बतिहर बर बिसवास के, देखीं प्रभु के खेल।।२०।।

......

 आगे पढे खातिर "आस के दीअरी" (दोहा संजीवनी) के उपहार स्वीकार करीं. जय भोजपुरी परिवार के सप्रेम भेंट-

आस के दीअरी- दोहा संजीवनी

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Tags: आस, के, दीअरी, दुबे, दोहा, भोजपुरी, विकल, व्रतराज, संजीवनी

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on September 29, 2012 at 6:19pm

गुरुजी प्रनाम आ जय भोजपुरी 

बहुत बेजोड , माने एक से बढि के एक , भोजपुरी के साहित्य महासागर मे कतने मोती भेटाई एकर थाह नईखे , सांचो ई आस के दिअरी भोजपुरी साहित्य खाति महासागर ही बाटे । 

बस पढि रहल बानी आ आराम से सरिहारी के पढब , एक एक दोहा पढब आ ओकरा बाद हम आपन सोच लिखब ! 

जय भोजपुरी 

Comment by Manoj Kumar on September 29, 2012 at 7:28pm

गुरु जी प्रणाम आ जय भोजपुरी

दोहा - माने दू लाईन के कविता जेमे जीवन के सार देखे के मिलेला. अभी ले हमनी के किताबन में कबीर, रहीम , बिहारी,  सूरदास, तुलसीदास आदि के दोहा पढत रहनी ह , बाकि आस के दियरी में जवन दोहा बाडी सब ऊ कवनो दृष्टिकोण से, कहीं से कमतर नईखे. सब उच्चस्तरीय, एक से बढि के एक, जीवन के सारतत्व, अद्भुत शिक्षा आ दर्शन से भरल- पुरल एगो संग्रह्णीय उपहार जेके गागर में सागर कहल जाव त कवनो अतिशयोक्ति ना होई. आस के दियरी के एक-एक दोहा सांचो जीवन खातिर संजीवनी के समान बा, एमे कवनो दू राय नईखे.

कहल जा सकेला कि ई दोहा संकलन के रूप में आजु भोजपुरी साहित्य के खजाना में एगो अनमोल रतन जुड गईल ह.

ई अनमोल उपहार खातिर  हमनी के आभारी बानी जा.

जय भोजपुरी. 

Comment by Ashutosh Ranjan on September 29, 2012 at 8:31pm

गुरु जी प्रणाम,

गजब..बेजोड़ दोहा..एक एक दोहा कई कई मन के...गुने समझे आ बुझे के प्रयास में बानी..एगो निमन सन्देश.
जय भोजपुरी 
Comment by Sudhir Kumar on September 30, 2012 at 3:50pm

गुरु जी प्रणाम,

बुझाते नइखे कि का लिखीं ई कुल्ह दोहा के पढला के बाद... एक से बढ के एक, आ जीये के कला के शिक्षा से भरल...  किताब भी डाउनलोड कइ के पढ रहल बानी, राउर ई उपहार वाकई अनमोल बा...। धन्यवाद...

Comment by sanjay kumar singh on September 30, 2012 at 7:13pm

गुरु जी प्रणाम ,

पढला के बाद लिखे खातिर कुछ बांचत नैखे । एक एक दोहा बार बार पढे के मन करत बा । जीवन के हर पहलू के देखावत राउर ई अनमोल थाती हमनी खातिर  धरोहर लेखा  बा । अद्भुत , बेजोड , जबरदस्त .........

     जय भोजपुरी 

Comment by Bishwajit yadav on October 4, 2012 at 9:36pm
जय भोजपुरी
गुरू जी परनाम
राऊर रचना पढ के बहुत कुछ सिखे के मिलल ह

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