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एफ डी आई कवनो अनतफल ना ह बाकि तबो ....

प्रनाम आ जय भोजपुरी

बडा चर्चा हो रहल बा , हेने होने सगरे जेने देखs ओनिये लोग अझुराईल बा की एफ डी आई एफ डी आई रिटेल मे आवत बा , केहु कहत बा देश एक दम चकचका जाई त केहु कहत बा की ई ईस्ट इंडिया कम्पनी लेखा होई देश बिका जाई ।

केहु तर्क दे रहल बा की एकरा अईला से किसानन के फायदा होई मजदुरन के फायदा होई लोगन के नोकरी मिली त केहु के तर्क ई बा की एकरा अईला से छोट छोट दुकानदार , माने पंसारी के दोकानी बनि हो जईहन स , तुरहा बरबाद हो जईहन स ।

खैर एह कुल्हि मे गईला से पहिले देखे के बा की ई एफ डी आई का ह ?

फारेन ( बिदेस ) डाईरेक्ट ( सीधे/प्रत्यक्ष ) इंवेस्टमेंट ( पईसा लगावल / निवेश ) आ रिटेल माने खुदरा व्यपार - सोझ साफ माने इहे भईल की बिदेस से खुदरा व्यपार वाला जवन क्षेत्र बा ओजुगा बिदेस से सीधे सीधे पईसा आई ।

सवाल ई उठत बा कि का एकरा पहिले एफ डी आई कवनो क्षेत्र मे आईल बा लागु भईल बा ?

त एकर जवाब बा हँ आ उ कुल्हि क्षेत्र बा - सर्विस सेक्टर ( फाईनांस आ नान फाईनांस ) , टेली कम्युनिकेसन ( मोबाईल आ दुर संचार व्यवस्था ) कम्प्युटर साफ्टवेअर आ हार्डवेअर , रिअल स्टेट ( ममल्टी प्लेक्स सिनेमा हाल आ हाउसिंग कालोनी ) , कंस्ट्रक्सन , दवाई आ फार्मा के क्षेत्र मे , बिजली के क्षेत्र मे , आटोमोबाईल के क्षेत्र मे , धातु से सम्बन्धित उद्द्योगन के क्षेत्र मे , पेट्रोल गैस के क्षेत्र मे , फर्टिलाईजर के क्षेत्र मे , होटल मे , ट्रेडिंग के क्षेत्र मे , इलेक्ट्रिकल कल पुर्जा के क्षेत्र मे , प्रिंट मिडिया आ सुचना के क्षेत्र मे , सिमेंट आदि के उद्योग मे , बन्दरगाह आदि के क्षेत्र मे , इंडस्ट्री के मशीनन के क्षेत्र मे , खाये वाला सामान बनावे वाली कम्पनियन के क्षेत्र मे , टेक्स्टाईल माने कपडा लाता के क्षेत्र मे , समुन्दर से आवे जाये वाला ट्रांस्पोर्ट के क्षेत्र मे , खदान के क्षेत्र मे , पढाई लिखाई शिक्षा के क्षेत्र मे खेती बारी से जुडल कल पुर्जा के क्षेत्र मे आ मोटा मोटी धई ली कुल्हि तिरसठ चौसठ ( 63-64)  को क्षेत्र मे एफ डी आई बडुवे ।

कवना कवना राज्य मे ई एफ डी आई बडुवे ?

भारत के लगभग हर राज्य मे एफ डी आई बडुवे बाकि टाप टेन ( सबसे ज्यादा जवन दस गो राज्य ) मे यु पी बिहार नईखे ।

रिटेल मे एफ डी आई के का माने बा ?

रिटेल माने खुदरा व्यपार के क्षेत्र मे एफ डी आई माने की खुदरा के क्षेत्र मे बेचे किने खाति बिदेसी कम्पनी पईसा लगईहन स । ठीक ओइसही जईसे भारत के व्यपारी लोग पईसा लगावे ला , फरक अतने बा की पईसा लगावे वाला बिदेसी कम्पनी होईहन स । आ ओह कम्पनी मे 51 परसेंट हिस्सेदारी बिदेशी कम्पनी के होई ।

का रिटेल मे एफ डी आई माने वालमार्ट ह ?


ना , वालमार्ट एगो कम्पनी ह जवन रिटेल के क्षेत्र मे कई जगहा पईसा लगवले बिआ आ आपन दोकानी खोलले बिआ , एकरा अलावा जायंट , कैरी फोर जईसन कई गो अउरी कम्पनी बाडी स जवन कई गो देसन मे आपन कारोबार चलावत बाडी स ।

अउरी कहा कहा रिटेल मे एफ डी आई ब ?

चीन सिंगापुर ब्राजील भा अउरी कई गो विकसीत भा विकासशील देशन मे 50- 100% एफ डी आई के सुविधा बडुवे ।

एकरा से नुकसान का हो सकेला ?

- लोगन के डर बा की ई आई त फेरु छोट छोट दुकानदार लोगन के कारोबार बन हो जाई ।

- लोगन के डर बा की लोग छोट छोट दुकान से सामान कीनल बन कई दी आ बिदेसी कम्पनियन के दोकान से सामान किनी ।

- लोगन के डर बा की ई कम्पनी देश के अपना हिसाब से चलावे लागी जब चाही त दाम बढाई जब चाही दाम घटाई ।

- लोगन के कहनाम बा कि देस मे बिदेशी सामान के भरमार हो जाई आ देसी सामान के केहु पुछी ना

एकरा से फायदा का हो सकेला ?  कई लोगन के कहनाम बा की एकरा से फायदा कुछउ नईखे बाकी हमार कुछ तर्क बा आ हम एह के पछ मे बानी काहे कि -

- भारत मे पहिलही से कतना बिदेसी सामान भरल पुरल बा , चीन से ले के अमेरिका ले , हर जगहा के सामान बाजार मे भरल बा , एह से ई कहल की बिदेसी सामान भरी जाई गलत बा ।

- सरकारी नियम के हिसाब से ई लोग ओजुगे दोकानी खोली जहवा 10 लाख से बेसी लोग रहेले एह से ई कुल्हि दोकानी खलिहा बड बड शहर मे ही खुल सकेली स , माने एह कुल्हि दोकानन के कुकुरमुत्ता लेखा बढे के चानस ना भेटाई ।

- छोट छोट दोकानी वाला लो रसीद ना देला लो आ देबो करे ला लो त ओकर कवनो भैल्यु ना रहेला बाकी एह मे अईसन कुल्हि ना होई ।

- ई कुल्हि कम्पनी अधिकतर सामान ( कम से कम दाम राखे खातिर ) भारत से खरीदिहन स , खास कई के आनाज , फल आ तरकारी , काहे की ई कुल्हि सामान दोसरा देस से ले आवे मे बेसी पईसा लागी आ ई कुल्हि चीझु भारत मे आराम से भेटा जाई ।

- चुकि आनाज फल आ तरकारी किसानन से किनाई एह से ई एगो उमेद बा की किसान लो के नीमन आ फिक्स रेट भेजाई , गहंकी जोहे के ना परी ।

- सामान नीमन मिली , काहे की ई कुल्हि कम्पनी एहि से मसहुर बाडी स काहे की नीमन सामान कम दाम प बेचल एकनी के असली तरिका ह ।

- चुकि एह कम्पनियन के आपन कीने बेचे वाला टीम रहेले जवना मे लम सम मय लोग भारते के रही माने की रोजगारो मिली ।

- एह कम्पनियन के कीने वाला बिभाग डारेक्ट ओजुगा से सामान किनिहन स जहवा ओह सामान के पैदावार होत बा , उ सामान बनत बा काहे की ई लो कम से कम दाम मे बेचल चाही ।

- चुकि छोट छोट किराना / पंसारी के दोकानी से लोग महीना भर के राशन ना किनेला , आ किनबो करेला त क्रेडिट प किनेला एह से उ लो अईसना दोकानी पे ना जाई ।

- किसानन के सबसे बड समस्या अपना पैदावार के बेचला के बा , कही राखला के बा । अब एह कुल्हि के वजह से कीने वाला त फिक्स होईये जईहे , रेट त नीमन मिलबे करी संगे संगे ई नियम भी बा की एह कम्पनियन के नाफा जवन होई ओकर कुछ हिस्सा ( 30-50 प्रतिशत ) शीत गृह ( कोल्ड स्टोरेज ) , आनाज भंडारण ( स्टोर ) आ अनाज फल तरकारी के ढोवे खाति ट्रांसपोर्ट के बेवस्था मे लागी ।

जवन राज्य एह कम्पनियन के अपना राज्य मे नईखे चाहत ओकरो खाति उपाई बा , कि ई कम्पनी ओहि राज्य मे जईहन स जवन राज्य एकनी के आवे दी , माने नियम कानुन बनाई की एफ डी आई ओहु लो के राज्य मे आ सकेला ।

आपन बात


अउरी कुछ नाफा नुकसान हो सकेला जवना के रउवा सभे जोड घटा सकेनी । ई कुल्हि हम सैध्यांतिक जवन होखे के चाही ओह बात के धईले बानी , हमरा देखे से आ हमार जवन अनुभव कहत बा आ हम चीन , सिंगापुर दुबई अबुधाबी मे जवन देखले बानी ओह आधार प कहत बानी काहे की एह देसन मे अईसन कुल्हि कम्पनी बाडी स आ छोट छोट दुकानदार लो भी बा आ नीमन बिजनेस दुनो के होत बा ।


संगे संगे हम इहो कहल चाहब की वालमार्ट जवना के ढे हाला बा उ दक्षिण कोरिया से आ जर्मनी से आपन दोकानी बन कई के वापस चलि गईल काहे की जर्मनी आ दक्षिण कोरिया के लोगन के अपना छोट छोट दुकानदारन से सस्ता आ नीमन सामान मिलत रहे । त एह एफ डी आई से कवनो ना पहाड टुटत बा आ ना कवनो पहाड ठाड होत बा , हमरा देखे से दु गो फायदा जवन लउकत बा उ ई बा की किसानन के खरीददार , बरिआर खरीददार भेटा जईहे , आ खेती बारी प्रोफेसनल तरिका से होखे लागी काहे की एह कुल्हि से कांट्रैक्ट फार्मिंग , खेती बारी मे इंश्योरेंस जईसन चीझु आ जाई आ संगे संगे एक नीमन कम्पटीसन बाजार मे बने लागी भा बन जाई । माने सब कुछ सरिहरा जाई आ व्यवस्थित ढंग से होई आ जवन हेने होने से बिदेशी माल आवत बा उहो सरिहरा जाई ।

लोगन के ई शंका बा की ई कम्पनी कमाये खाति आवत बाडी स , त हम कहल चाहब की केहु पईसा कमाही खाति लगावेला ,बाकी उ कतना पईसा ले के जात बा कतना पईसा रउवा देश मे लगावत बा एह के भी देखल जरुरी बा ।

चेक प्वाईंट

 

सरकार के संगे संगे समाज के भी अपना के ओस्तवार राखे के जरुरत बा , आर टी आई जईसन चीजन से एह लोगन के नाक मे नाथ लगवले रहे के चाही , कंज्युमर फोरम आदि मे अगर कुछ गडबडी होत बा त एह लोगन के टांगे के चाही ।

 

लम सम इहे बा एह एफ डी आई मे , एकरा वजह से ना छाती उतान कई के चले के जरुरत बा आ ना एकरा वजह से मुडि नवाई के चले के जरुरत बा ! ई कवनो अईसन चीझु नईखे जवना के वजह से केहु गुलाम हो जाई आ केहु रउवा प राज करे लागी । ई रउरा हाथ मे बा , देसी युज करब त देशी कम्पनी चमकिहन स आ बिदेशी करब त देशी आ बिदेसी दुनो चमकिहन स ।

 

भारत के कई गो कम्पनी गल्फ मे रिटेल मे इंवेस्टमेन्ट कईले बाडी स जईसे लु लु बिआ , मनामा बडुवे । अब जब सब कुछ वैश्विक हो गईल बा आ हो रहल बा ओह समय मे एह कुल्हि चीजन प रुढिवादी बिचार राखल उचित ना कहाई ।

 

बिल्कुल एह कुल्हि से किसानन के दीन दासा नईखे बदले वाला बाकी ह काफी हद तक सुधार के गुंजाईस बा !

 

बाकी सब अब बतकही मे आई , कुछ सवाल जवाब होई त ओह मे आई , त रउवा सभ के सुझाव के इंतेजार बा ।

 

 

जय भोजपुरी

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Tags: अनाज, आई, एफ, किसान, डी, दुकान, बिदेशी, भारत, रिटेल, विदेश

Comment by Ashutosh Ranjan on September 22, 2012 at 3:42pm
नवीन भाई प्रणाम,

बहुत बढ़िया लिखनी एकदम संतुलित ...बाकी बहस त कई हाली हो चुकल बा हमनी के एह मुद्दा पर ...लेकिन एक साथे आ पूरा डीटेल में आ सगरी चीझन के छुवत राउर इ पोस्ट अपने आप में सम्पूर्ण बा ...धन्यवाद एतना निमन जानकारी देवे खातीर

जय भोजपुरी .
Comment by Rajnandan singh on September 24, 2012 at 8:39am

नवीन जी प्रणाम!

बात रउर जायज बा। प्र. वि. नि. के कवनो अनत फल ना होइ मगर देशवासियन के मन में बइठल डरो कवनो अनुचित नइखे। जवन अनुभव रउवा के चीन, सिंगापोर, दुबई भा अबुधाबी में भइल ओकरा मोकाबले भारत के सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक, प्रशासनिक, धार्मिक इंहा तक कि नैतिक परिस्थिति बहुते अलग बा। जवन दाढी राखि के अभिषेक बच्चन के ढेर नाम भइल रहे ओइसने दाढी राखला पर हमरा एगो संघतिया के ऑफिस से नोटस मिलि गइल रहे कि दाढी कटवा के ऑफिस आव। संभव बा हमार सोंच गलत भी होई मगर कुछ क्षेत्र जवना में पहिलही से प्र. वि. नि. लागू बा ओकर वर्तमान दशा देखीं जहाँ तक हमरा समझ में आ रहल बा।

अगर टेली कम्युनिकेशन क्षेत्र में मोबाईल क्रांति के बात छोड़ दिहल जाव त

सर्विस सेक्टर- कवनो जीवन बीमा कंपनी भा बहुप्रचारित बचत योजना में निवेश करीं आ दू साल बाद आपन खाता के जानकारी मांगीं पत्ता चल जाई केतना नफा-नुकसान बा। आ केऽ तरहे लोगिन के मेहनत आ पेट काटि के बचावल पइसा  बचत के नाम पर लुटल जा रहल बा।

कंप्युटर सॉफ्टवेयर आ हार्ड वेयर- आम आदमी के हाथ से, घर से लैपटॉप, कंप्युटर आजुओ दूर बा। सॉफ्टवेयर इंजिनियर, हार्डवेयर इंजिनियर खातिर रोजगार आजुओ कुछ गिनल चुनल शहरन तक हीं सिमित बा। आ अबहीं लगभग कम से कम दस साल तक इहे स्थिति रही।

रियल स्टेट आ मल्टीफ्लेक्स- आम आदमी खातिर घर खरीदल सपना बा। सिनेमा के टिकट कम से काम तीन सौ रुपिया हो गईल बा। जवन मजदूर लोगिन के एह क्षेत्र में रोजगार मिलल बा कबो निर्माण स्थल के आस-पास जा के उनुकर रहे के व्यवस्था देखीं दया आ जाई।

बिजली, पेट्रॉल आ गैस- बिजली कटउती, नौ-नौ गो राज्यन में एके हाली बिजली गुल, पेट्रॉल के मंहगाई! गैस के खातिर तऽ किछियो कहे के जरुरते नईखे। एक परिवार के साल में छव गो सिलेंडर देवे के बात सरकारे कह रहल बिया।

पढाई लिखाई के क्षेत्र में- आम आदमी खातिर आपन बच्चा पढावल मुहाल हो रहल बा। शहर में नर्सरी में नाम लिखवावे खातिर पचास हजार से लेके तीन लाख तक रुपिया चाही। ग्रामीण क्षेत्र में खैराती इसकुल(सरकारी स्कूलके दशा एतना खराब बा कि कवनो न कवनो अंग्रेजी माध्यम इसकुल में बाच्चा के भेजल एगो साधारण आदमी के भी मजबुरी बा। हर आदमी डेरायला कि पता नाही कवना दिन कवन बच्चा दूषित खाना खा के अस्पताल चहुँप जाय। सरकारी उच्च शिक्षण संथानन के आजुओ कमी बामोट फीस वाला प्राइवेट शिक्षण संस्थान ढेर बा। एक हाली केहु से एम. बी. . करे खातिर बात करि लिहल जाव तऽ दस हाली उनुकर दस गो सेल्स स्टाफ के फोन आवल शुरो हो जाई।

फर्टिलाइजर- ऊर्वरक के नाम पर का जानीं लोग का बेच रहल बा कि सुने में आइल कि करइला के रस पियला से एगो मिया-बीबी के जान पर आफत आ गइल रहे।

खादान के बारे में भी सुने में आइल कि कोइला घोटाला में सरकार के लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपिया के नुकसान हो गइल। कहे के मतलब बा कि विदेशी निवेश के कवनो गैरफायदा नइखे बशर्ते अधिकारी लोग में ईमानदारी आ राष्ट्रभक्ति दुनो होखे। मगर दुख के बात त इहे बा कि अपना देश के कर्णधार लोगिन में एह दुनो चीज के बहुत बड़हन अभाव बा।

अबहीं तक जेतना भी विदेशी पूँजी अपना देश में लागल ओकर फायदा त कहीं न कहीं जरुरे हो रहल बा मगर केकरा हो रहल बापइसा आखिर कहाँ जा रहल बा? आम आदमी के त भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन भा जीवन स्तर कहंवो कवनो सुधार भा राहत नईखे जवन कि निश्चित रुप से होखे के चाहत रहे।

रहल खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से फायदा-गरफायदा के बात त इ त रामो जी के न पत्ता होई कि आवे वाला समय में कवन भारत के कर्णधार रही आ केतना ईमानदारी से एकर केतना फायदा आम लोगिन तक पहुँचे दी।

Comment by sanjay panday on September 24, 2012 at 11:24am

navin bhai parnam aa jai bhojpuri |

bahut sahi aa saf saf kahani eehe hakikat ba 

chahe kehu apana fayada bha rajnitik fayada khatir

ketano ho halla machave bakir hakikat ehe ba javan raua kahani ha |

sabse bada udaharan mobaile ke bajar ba |

jai bhojpuri 

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on September 24, 2012 at 9:53pm

राजन्दन जी प्रनाम आ जय भोजपुरी 

बहुत बहुत धन्यबाद रउरा बिचार खाति ! 

जईसे की रउरा पोस्ट से हमरा लागत बा , रउवा अनतफल जोहत बानी जवन की कबो भेटाई ना कवनो कीत प ना भेटाई कुबेरो आ जईहे त ना भेटाई । 

एको हाली ई सोचनी ह कि काहे नर्सरी आ पढाई के दाम काहे रिअल स्टेट के दाम बढि गईल बा ? 

जवना गांव मे प्राईमरी स्कुल बा ओह गांव के लोगन के लंकवा मरले बा की उ लोग अपना गांव के स्कुल के ना सुधार सकेला लो ? मोबाईल के त बरगवछ के रउवा निकल गईनी बाकी ट्रेन मेट्रो कम्प्युटर फोन मकान अनाज के पैदावार से ले के हर एक चीझु मे पिछला 20 साल मे का का भईल बा कतना भईल बा ओह के देखे के जरुरत बा । 

जईसे की हम पहिलही कहले बानी की अनतफल ना ह , एह से मय परेशानी दुर ना होई बाकी कुछ परेशानी के दुर करे के इहो एगो तरिका बा । 

राजन्दन जी ई उदारवाद ही की हमनी के आजु एह प बतकही करत बानी जा ना त के नबीन आ के राजनन्दन ? आ सुनी पहिले लईका लईकी कईसे होत रहलन हा स ( हमहु ओइसही भईल बानी ) ई केहु से लुकाईल नईखे । डाक्टर साहेब ना चमईन जनमावत रहली ह स आ हम ढेर पुरान बात नईखी कहत ! उमेद बा रउरो आईडिया होई । 

एक हाली मन से सोचब दिमाग से सोचब ! 

बाकी बहुत नीमन लागल 

Comment by Anoop Srivastava on September 25, 2012 at 3:29pm
नवीन जी प्रणाम,
अबहिन ले हम त उपरे उपर बतियावत रहनी हईं, हमरा ए विषय पे कौनो खास जानकारी ना रहुए, रउआ के धन्यवाद एतना कुल विस्तार से बतवला आ समझवला खातिर .... जय भोजपुरी ।
Comment by संजीव सिंह on September 26, 2012 at 12:04pm

नवीन भईया प्रनाम,

बहुत बढीया जानकारी देहले बानी।  एक दम मजगर...।

जय भोजपुरी

Comment by Sudhir Kumar on September 30, 2012 at 4:08pm

नवीन भाई, प्रणाम आ जय भोजपुरी,

जइसन कि रउआ से पहिले भी चर्चा भइल रहे, एफडीआई से कवनो बडहन खतरा नइखे। मैक्डोनाल्ड, केएफसी आ पिज्जा हट जब आके हमनी के स्वाद ना बदल पइले सन (लेकिन हाँ, ओह से सीख के कई गो भारतीय रेस्टोरेंट भी साफ-सफाई के प्रति जरुर सजग हो गइले सन), त फेर एह रिटेल में बहुत बदलाव ना हो पाई, ई तय बा...।

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