सब केहू के प्रणाम,
आज हिंदी दिवस ह....हमार, राउर सभकर एह देश के राजभाषा, संपर्क भाषा.
हमरा तरफ से सभकरा के हिंदी दिवस के बधाई आ शुभकामना. भगवान् करस की हिंदी अंग्रेजी के बंधन से मुक्त होके सम्पूर्ण राष्ट्र के संपर्क भाषा बनो. दखिन से ले के उत्तर तक , पूरब से ले के पछीम तक कतहु जब एक दूसरा से बतियावे के होखे त गुलामी के प्रतीक आ विदेशी भाषा के सहारा ना लेवे के पड़ो बलुक आपन देशी हिंदी में सभे बतकही कर सको.
हिंदी दिवस त मानत बा. लेकिन भोजपुरी के का? भोजपुरी खातीर त एको दिन केहू देवे के तैयार नईखे? हिंदी समूचा राष्ट्र के संपर्क भाषा होखो..लेकिन एहसे हमनी के मात्री भाषा के महत्व त कम नईखे हो जात? करोडन लोगन के जुबान के भाषा के एको दिन ना? हमार इ डीमांड नईखे की भोजपुरी दिवस खाली एक दिन मना के एकरो के श्रधांजलि देवे खानी सभे पुष्प भा शाल भेंट कर के मना लेवे..लेकिन आज हजारों लाखों भोजपुरिया आपन मात्री भाषा खातीर एक दिन भी का एक घंटा भी देवे के तैयार नईखन...काहे पर ढेर चर्चा हो गईल बा. अब क्रियान्वयन के वक्त आ गईल बा. भोजपुरी के आंठ्वी सूचि में शामिल करे के डीमांड चलत बा...के करी ? राजनेता लोग? ना जी हमरा त उम्मीद नईखे लउकत. काहे से की कांग्रेस पार्टी सोंची की ना जी ना भोजपुरी यदि आंठ्वी सूचि में शामिल हो गईल त राजस्थानी के का? गहलोत जी के कुर्सी अईसही ख़तरा में पडल बा....बी जे पी के त बस एके नारा बा "हिन्दू, हिंदी, हिन्दुस्थान"...त फेर करी के? काहे करी? आ कंही इ दुनु पार्टी राजी हो भी गईल त एहकर परिणाम सोंची सभे....आजो भोजपुरी क्षेत्र साक्षरता के मामिला में काफी पिछडल बा. यदि जन जन तक पहुन्चेवाला जुबान में पढाई लिखाई होखे लागी, साहित्य, कविता के सृजन होखे लागी..जन जन तक इ बात चन्हुपे लागी..त एह लोग के राजनीति कईसे चली? काहे से की लेखक, कवी, विचारक सामान्यतया दलनिर्पेक्ष होलन..आ एह लोग के पोल खोलत रहिहन..जवन जन जन पढ़ लिख सकत बा..फेर एह लोग के दाल रोटी कईसे चली ? यदि भोजपुरी आंठ्वी सूचि में शामिल भईल, आ एह से रोजी रोजगार के अवसर बढ़ल त एह राजनैतिक पार्टियाँ के झंडा के ढोई? यदि जन जन के भाषा में कृषि सम्बन्धी जानकारी के आदान प्रदान होखे लागी त फेर किसानन के राजनीति के करी?
आ सबसे बड बात इ की राजनेता लोग आ अगुवा लोग के लगे मुद्दा कवन बांची जेहसे उ लोग अपना के इ साबित करी की हमही हईं भोजपुरी के असली कर्णधार?
एहसे एह लोग से इ उम्मीद कईल की जल्दिये इ लोग भोजपुरी के आंठ्वी सूचि में शामिल क लिही लोग ज्यादा आशावादी सोंच बुझात बा. हमनी के शायद और जोड़ लगावे के पड़ी, आपन बात और मजबूती से कहे के पड़ी..जरुरत पडला पर एकरा के वोट के राजनीति से जोड़े के पड़ी (काहे से की राजनेता लोग के भोजपुरी आ हिंदी ना वोट के भाषा जल्दी बुझाला), आपन भाषा आपन बोली में ज्यादा से ज्यादा साहित्यिक सृजन करे के पड़ी..ताकि जन जन तक इ बात पहुँचो....जन जन के इ आवाज बनो...आ जन जन के आवाज दबावल एतना आसान ना होला..
जय भोजपुरी
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