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पहिला भाग - ई कईसन अगुवाई होता ?

प्रनाम आ जय भोजपुरी

अगुआ - एह शब्द के माने सभका पता होई , आ अगुआ अगर सर्वनाम ह त अगुवाई क्रिया कहाई । हम ब्याकरन नईखी सिखावत हम त बस ई कहल चाहत बानी की भोजपुरी भाषा के अगुवाई करे वाला अनघा लोग बा बाकि ई कईसन अगुवाई होता की चिचिलईलो प आवाज खलिहा चिचिलाये वाला के काने मे ले जाsता केहु अउरी नईखे सुनत ? आखिर ई कईसन अगुवाई ह ?

आजु सबेरवे नाया अंक मिलल ह एगो भोजपुरी पत्रिका के , ओह मे एगो लेख पढनी ह , भोजपुरी के बारे मे रहल ह , भोजपुरी के संविधान मे शामिल होखे के चाही ओकरा खाति तर्क रहल ह आ भोजपुरी शामिल हो जाई त ओह से हिन्दी के कवनो नुकसान ना होई एह प कुछ तर्क दिहल गईल रहल ह ।

हम साफ साफ तर्क प आवत बानी कि " भोजपुरी के आठवा अनुसुची मे काहे शामिल करे के चाही के बारे मे तर्क " -

1- लोक सेवा संघ आयोग के इंतहान भोजपुरिया लोग भोजपुरी मे दे सकेला
हम बी ए भा एम ए हिन्दी इतिहास समाजशास्त्र दर्शनशास्त्र भा अउरी कवनो बिषय से( भोजपुरी छोड के ) कईले होखब आ हमरा खाति ई छुट बा की हम भोजपुरी मे इंतहान दे सकेनी तबो हम भोजपुरी मे ना देब ! आखिर काहे ना देब ? त ओकर कारन ई बा की हम भोजपुरी बोलेनी , हम भोजपुरी लिख सकेनी हम भोजपुरी बुझि सकेनी बाकी हम भोजपुरी के मानक नईखी जानत , हम प्राईमरी जुनियर स्कुल , हाईस्कुल , इंटर , बी ए , एम ए मे भोजपुरी नईखी पढले । जब ले ई शुरुवाती शिक्षा के विषय ना बनी त पाल पुतई प चढाई के भसवला से का फायदा ? 

2- भोजपुरी फिलिम दुरदर्शन आ राष्ट्रीय चैनल प देखावल जा सकेला

आछा ई बतावल जाउ की एह से का होई ? जवना सिनेमा के आपन सेंसर बोर्ड नईखे ओह के दुरदर्शन आ राष्ट्रीय चैनल प देखा के ई लो का साबित कईल चाहत बा लो ? एह ले नीमन त जवन भोजपुरी चैनल बा ओह के नीमन से चलावे के आ नीमन चलावे के निहोरा ई लो करित आ जहा ले राष्ट्रीय चैनल के बात बा त हम जी सिनेमा प कई हाली भोजपुरी फिलिम देखले बानी बाकी उ साउथ के डब रहेला । त एजुगा जरुरी बा सिनेमा के नीमन करे के ओकरा खाति कुछ बेवस्था करे के ओकरा खाति सेंसर बोर्ड बने जवन खांटि भोजपुरी के होखे । तब नु कुछ बात बनी । आहे प गरई धईल हमरा नईखे बुझात ।

3- भोजपुरी फिलिम के राष्ट्रीय पुरस्कार नईखे मिल सकत

हम बतावल चाहब की 2009 ले ई बात सांच रहल ह की भोजपुरी फिलिम के राष्ट्रीय पुरस्कार ना मिल सकत रहल ह बाकी 2009 मे एगो नियम आईल जवना के हिसाब से भोजपुरी फिल्म के भी अब कम्प्टीसन मे राखल गईल बा । बाकि बात ई बा की का भोजपुरी मे ओइसन फिलिम बनत बाडी स ? पुरस्कार त रोई रोई के नाचि नाचि के भोजपुरी के दुआरी ले आई जे फिलिम बढिया रही । अब टेढ-बम्बक फिलिम बनिहन स त का राष्ट्रीय पुरस्कार मिली ? भोजपुरी फिलिम वाला त अपने मे ईनाम बांटे लन स आ गील होलन स आ ओकनी खाति उहे मय बा त फेरु कवन आ कहवा के राष्ट्रीय पुरस्कार ?

4- भोजपुरी के साहित्य के बिकास खाति आर्थिक सहायता

जे खोंखे के उ त खोंखतो नईखे बाकी सरकार से दाम अईंठे खाति भोजपुरी के आठवी अनुसुची मे ठेले के ई प्रयास कहा ले सही बा ? हम बतावल चाहब की बिहार मे भोजपुरी संस्थान जवन की भोजपुरी के साहित्य खाति बनल बा आ दिल्ली मे भोजपुरी मैथिली संस्थान भोजपुरी आ मिथिला के कला संस्कार संस्कृति के बिकास खाति बनल बा त लोग एह कुल्हि से काहे नईखे नाफा लेत ? बिहार मे बा दिल्ली मे बा बाकि यु पी मे नईखे ( कम से कम हमरा नईखे मालुम )  त फेरु केहु के काहे नईखे बकार निकलत की युपियो मे होखे के चाही ? आ बा त नीमन से चलो । का एकरा बेरी मय जाना गुंगी सधले बा ?

5- साहित्य के क्षेत्र मे पुरस्कार ईनाम ज्ञानपीठ लेखा

भोजपुरी मे अब ले का लिखाईल बा , भोजपुरी मे के के लिखत बा , भोजपुरी मे कब कब लिखाईल बा , गद्य कतना बा पद्य कतना बा कहानी काथा , निबन्ध , दोहा सोरठा चौपाई गजल कविता काव्य महाकाव्य , का लिखाईल बा केने बा के के लिखले बा जईसन चीजन प काम केहु ना करी बाकी सोझे सोझे ज्ञानपीठ के लेमनचुस देखाई । ई कहा ले सही बा ? का नईखे लागत की आजु जे भोजपुरी के साहित्यकार लो बा ओह लोगन के जुटान होखे ओह लोगन के काम जवन अब ले भईल बा ओह के जुटान होखे ओह के प्रचार प्रसार होखे ? एजुगा त दु कवना गायक के त दु कवना गायिका के दुउ का दु का घोषित करे से फुरसतिये नईखे मिलत त साहित्य माने त इहे नु भईल की चोंचा प झुलुहा झुलावs ता लो ? 

अउरी कुछ खास नईखे ओह लेख मे , भोजपुरी के आठवा अनुसुची मे शामिल करे खाति दिहल कुल्हि मय दलील मे 20 करोड से बेसी भोजपुरिया लोग बाटे जईसन बात कहल गईल बा , आ ई कुल्हि बात हति चुकी लईको जानत बा बाकि एजुगा बात ठोस आधार आ कारवाई के होखे के चाही , कुछ अईसन चीझु के जवना से भोजपुरिया लोग के ई बुझाउ की भोजपुरी के आठवा अनुसुची मे शामिल कईला से क्षेत्र भाषा आ लोगन के नाफा होई । हमरा देखे से जवन कुछ बुझाता उ कुछ अईसन बा  -

1- भोजपुरी मे पढाई लिखाई खउराहवा दल / गदाहवा पाटी ( केजी -1 भा लोर केजी ) से ले के जुनियर स्कुल , हाईस्कुल , बी ए , एम ए , रिसर्च ले होखे के चाही ।

2- भोजपुरी क्षेत्र चुकि कृषि प्रधान क्षेत्र ह खेती बारी वाला क्षेत्र ह एह से , हाईस्कुल , इंटर से ले ले एह क्षेत्र मे जतना बिश्वबिद्यालय बाडन स ओह मे खेती बारी ( 10 कृषि से , 12 कृषि से  बी एस एजी , एम ए सी एजी ) प पढाई भोजपुरी मे होखे के चाही आ एह लोगन के भोजपुरिया इलाका मे नोकरी लागे के चाही ।

3- भोजपुरी मे प्राईमरी से पढाई होई त फेरु ओहि हिसाब से मास्टर लोगन के भकेंसी , किताब कापी छपाईल आ भोजपुरी के नाव प ढेर लोग पढे मे ना लजाई ।

4- भोजपुरी मे अईसन पढाई लिखाई होखे त फेरु रोजगार गते गते आपन जगहि एहि क्षेत्र मे बनावे लागी ।

5- फिल्म खाति एगो सेंसर बोर्ड बने के चाही चुकि भोजपुरी क्षेत्र कवनो राज्य सरकार के जिम्मे ना आवेले एहि से केन्द्र एह के आठवा अनुसुची मे ले के दुनो राज्य से बतिया के फिल्म जगत के भला कई सकेला । शिक्षा आ खेती बारी के क्षेत्र मे भोजपुरी के आधिकारिक रुप मे शुरुवात सिनेमा के एगो नया दिशा आ दसा दे सकेला ।

6- भोजपुरी के संगे सबसे बडहन कमी ई बा की ई भाषा अभी ले शिक्षा आ रोजगार ( सिनेमा के छोड दिहल जाउ त ) के भाषा नईखे बनि पावल , सरकार सोचत बिआ की एह मे सिनेमा बनते बा एह से एकरा खाति कुछ कईला के का काम बा , जबकि सिनेमा के हाली मय लो जानत बा , आ शिक्षा , रोजगार के भाषा बने खाति यु पी आ बिहार के सरकार के संगे संगे अगुवाई करे वाला लोगन के जमीन धरे के परी काहे की ई कुल्हि चीज अईसन बा जवन जमीनिये प होई हावा मे ना ।

7- आजु जहवा लोग गांव से शहर जाता काहे की कमाये खाये के हिसाब अब गांव प नईखे बनत , त एह समय मे जरुरी बा की भोजपुरी के अगुवाई करे वाला लोग एह लोगन के बीचे आओ एगो माहौल बनाओ की का का करे के बा आ कईसे कईसे होई ।

8- भाषा बरिआर होई , सरकार से समर्थन मिली , लोग पढी लिखी , खेती बारी मे बैज्ञानिक तौर तरिका आई , एह से कम्पनी अईहन स कम से कम खान पान से जुडल कम्पनी त गारंटी से अईहन स , काहे की पंजाब कवनो समुन्दर के किनार प नईखे , आ फेरु ई त अईसन क्षेत्र ह जहवा मजदुर से ले के डाईरेक्टर ले जनम ले ले त फेरु ?

9- आठवी अनुसुची मे शामिल करे खाति जब ई कुल्हि सोझा आई त फेरु नेतवन के तरहा चटकी आ ओकरा बाद देखी , जवन जवन मांग उपरा अगुवा लो कईले बा उ मय गते गते एह मे आवे लागी ।

10 - आठवा अनुसुची खाति बात अईसन होखे जवन जमीन से जुडल होखे , हावा मे खावा काटला से ना गडहे बनी ना बनी डीह ।

ई कुल्हि अईसन चीझु बा जवना के हमनी के सोचे के होई , ई जवन आठवा अनुसुची मे शामिल होई की ना होई की होखे के चाही आदि चीझु त बडले बा बाकी ओह ले पहिले क्षेत्र भाषा आ लोगन के कईसे बरिआर कईल जाउ कईसे नीमन कईल जाई ओह के सोचे के जरुरत बा । लोकसेवा संघ आयोग मे भोजपुरी अईला से केहु आई ए एस पी सी सी ना हो जाई ओह खाति पढे के पडी ओह खाति पढे के माहौल बने के चाही ओह खाति भोजपुरी शुरु से होखे के चाही । रोजगार आ पढाई लिखाई एक संगे चलेले आ ई तब ले ना होई जब ले लोग एह बात के बुझि ना आ बुझि कब जब कुछ देखी आ देखि कब जब ओह लोगन के बीचे जाईल जाई ।

त फैसला ओह लोगन के करे के बा जे भोजपुरी के नीमन खाति सोचत बा , बाकि खावा काटे के त सभे काटे मे लागल बा ।

जय भोजपुरी

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Tags: अगुआ, अनुसुची, आठवा, भोजपुरी, संविधान

Comment by Ashutosh Ranjan on September 14, 2012 at 9:45am

नवीन भाई प्रणाम,

बहुत संतुलित, गंभीर आ विश्लेषित आलेख.
भोजपुरी के आठवी सूचि में शामिल होखही के चाँही.आ इ भईला से जवन जवन फ़ायदा होई ओहकर उल्लेख सही में काबिले तारीफ़ बा.
ओह लेख के जिक्र आ ओह बात के बढ़ावत राउर जिक्र....साँचहू बात होखे त जमीनी बात भईला से बात में वजन त अईबे करेला.
अब सब के आपन आपन कहे के सोंचे के तौर बा तरीका बा....शायद इ समय आवाज उठवला के बा....हाँ आवाज में दम त होखही के चाँही...आ ओह दृष्टीकोन से राउर बात बहुत जायज बा.
शायद इहे कुलही कारण बाड़ी सन जे चिदंबरम साहब के जुबान पर भोजपुरी त आईल लेकिन शिंदे साहब के मौक़ा ही ना मिलल एह सत्र  में, आ शायद मामिला के गंभीरता भी या त सरकार लगे ढंग से ना चन्हुपल भा सरकार एह्कर गंभीरता के गंभीरता से लेवे के ही नईखे चाहत......खैर अभी तक के घटनाक्रम पर नजर दालाल जाओ त जेह तरीका से एह मुद्दा के उठावल जा रहल बा, जवन तरह से प्रजेंटेसन हो रहल बा ओहापर अंगूरी त उथल लाजिमी बा काहे से की नेता लोग वोट बैंक त समझ रहल बा लेकिन ठोस कार्रवाई के अभी हाल फिलहाल में चानस मिले में संदेहे लागत बा.
हालांकि इ बात भी ओतने सांच बा की भोजपुरी भाषा के सम्रीधी खातीर जमीनी स्तर पर भी ढेर कुछ कईल जरुरी बा .
हालांकि हम इहो जोड़ल चाहेम की कवन पाहिले आ कवन बाद में के फेर में पडला ले निमन बा की दुनु साथे साथे होखो.....दुनु के आपन आपन महत्वा बा, जरुरत बा, आ कम से कम दुनु एक दूसरा के विरोधाभासी नईखी सन....जेकरा जवने बुझाय तवने करो..लेकिन प्रयास हमेशा भोजपुरी के बंचावे के भोजपुरी के बढ़ावे के, भोजपुरी के स्म्रिधि के होखे के चाँही....
हमनी आम भोजपुरिया त जुग्नुवो के चनरमा माने के तैयार बानी जा..बशर्ते की राह सही देखावत होखे......तनी कमे नु लौकी लेकिन मंजिल पर त आदमी चन्हुपी नु? लेकिन जे भी मंजिल भटकावे के कोशिश करी, गलत राही पे ले जाए के कोशिश करी ओयिसन टार्च से भी दूर रहला के काम बा...अब इ समझे बुझे के अपने बा.
राउर दुसरका भाग के इंतज़ार रही.
धन्यवाद,
जय भोजपुरी 
Comment by संजीव सिंह on September 14, 2012 at 10:05am

नवीन भईया प्रनाम,

देखी कवनो बतकही प सभकर आपन एगो अलग राय होला, अउर खास कर के ऐह घरी अगर कही भोजपुरी के बात होत बा त ऐह भाषा के आठवी अनूसुची मे घुसावे के बारे मे बात जरूर होत बावे। हम मानत बानी कि ई कईल जरूरी बावे बकीर अभी भोजपुरी खतिरा ओहू से बेसी अउर बडका समस्या मुँह बवले आगा खाडा बावे। समस्या ऊहे बावे “मानक”। हमरा ई लागेला कि भोजपुरी के आठवी अनूसुची मे शामिल होखे से पहिले आपन एगो मानक तईयार करे के चाही।  काहेकि प्राथमीक शिक्षा के संगे भोजपुरी के जुडाव मे शायद सबसे बेसी ऐह “मानक” के ही अडंगा बावे।

समस्या अउर समाधान के संगे-संगे बतलावत राउर ई लेख वाईक बहुत बढिया लागल। अउर हम चाहेम कि भोजपुरी के अगुआ ले ढेर ना त कम से कम ऐह लेख के एक बेर जरूर पढो। ई गारंटी बावे कि ढेर नाहीयो होखी तबो थोडकी सा जरूर ओह लोग फायदा होई।

जय भोजपुरी 

Comment by Anoop Srivastava on September 14, 2012 at 2:00pm

नवीन जी प्रणाम आ जय भोजपुरी,

बहुत नीमन ढंग से आ विस्तार से सगरो बाति एक क्रम से धइले बानी ....भाई आशुतोष जी आ संजीव जी के साथे हमहूँ रउरी एकहक बाति से सहमत बानी, आ विश्वास करत बानी कि, राउर ई लेख ए मंच के अभियान के दिशा में एक सार्थक भूमिका अदा करी ..... धन्यवाद आ जय भोजपुरी ।

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