Come, let's do something for Bhojpuri...
सब केहू के प्रणाम,
एह विषय पर कई हाली चर्चा भईल बा..खासकर नवीन भाई कई बार एह मसला पर आपन ब्लॉग भा फोरम के माध्यम से आपन बात रखले बानी...आजू फेर ना जाने इ काहे लागल हा की एहकर चर्चा फेर से कईल जाओ....
का खाली भोजपुरी भोजपुरी चिचियईला से भोजपुरी के कल्याण हो जाई? काल हम एगो ब्लॉग लिखले रहनी की "हम विरोध काहे ना करीं?" यदि एह चर्चा के ओह ब्लॉग से आगे बढावल जाओ आ ओकरा के भोजपुरी से जोड़ के देखल जाओ त रौवे बतायीं की एको गो भगजुगनी भी लउकत बा, भोजपुरी के सही राही दिखावे के? अब या त हमार आँखी कमजोड बा या हमार बुध्ही.... लेकिन फिलहाल हमरा नईखे लउकत...रउवा लउकत होखे त जरुर बताएम सभे.... त अब सवाल उठत बा की भोजपुरी के आवाज उठावे खातीर अगुवा के कमी बा की अगुवा लोग के मंशा के?
अगुवा? अगुवा त ढेरे लउकत बा लो...एक खोजेम त हजार भेंटइहन ...त फेर ओह लोग के मंशा में कमी लउकत बा? हम इ त ना कहेम की सभकर मंशा में ही खोट बा....लेकिन कुछ लोग के मंशा में खोट त साफे लउकत बा...आ कुछ लोग के तरीका ही सवाल के घेरा में बा..... तरीका पर सवाल काहे? त हमरा समझ से कवनो भी तरीका तब तक कारगर ना हो सके जब तक की ओकरा में व्याप्त बुराईयाँ के विरोध के साथे साथे ओकर अछायीयाँ के आगे ना बढावल जाओ.....मानत बानी की जन्हवा अच्छाई रहेला उन्हवा बुराई भी रहेला...दुनु समाज के हिस्सा ह...आ दुनु के अलग अलग क के समाज के कल्पना कईल कुछ ज्यादा ही आशावादी आ आदर्शवादी कहाई.....लेकिन तबो इ हमार मानना बा की जब तक बुराईयाँ के विरोध ना करेम..तब तक समाज के इ सन्देश की एह जुगनू में सही राही देखावे के क्षमता बा .. देवे में कामयाबी हासिल होई एहमें संदेह बा ......
भोजपुरी के ढेर फिलिम बनत बाड़ी सन..स्वागत होखे के चाँही..काहे से की केहू त हिम्मत करत बा की रीजनल भाषा में ,आपन बोली में फिलिम बनावल जाओ...लेकिन का इ समाज के कवनो सन्देश देवे में सक्षम बा? यदि ना त इ सिनेमा भोजपुरी के कवन राह देखावत बा? का इ सब सिनेमा भोजपुरी संस्कृति के चित्रण करत बा? यदि ना त इ कईसन भोजपुरिया सिनेमा? मानत बानी की एह भोजपुरी फिल्मान के भी कुछ दर्शक बाडन..यदि ना रहीते त फिलिमवा सिनेमा हाल में लागीत ही कान्हे? लेकिन का सगरो भोजपुरी समाज एह सब फिलिमवन के देखत बा? यदि ना त बाकी समाज खातीर भी फिलिम बनत बाड़ी सन? यदि कुछेक के छोड़ दिहल जाऊ त एहुमें उत्तर मिली न....त यदि ना त कईसे इ सब सिनेमा भोजपुरी आ भोजपुरियन के प्रचार प्रसार आ उथान करत बा? आ यदि निमन नईखे करत त का इ बाउर कर रहल बा? यदि बाउर कर रहल बा त इ बहुत ही विचारणीय प्रशन बा....एहाकरा पर लगाम लगावे के चाँही भा प्रेरित करे के चाँही की नीमनका आवो ना त बांचलो खुन्चलो के आता पाता ना बांची... अब एहाकर जवाब इ मत देम सभे की भाई तुंही आगे आव आ निमन फिलिम बनाव त आंटा दाल के भाव मालुम पड़ी..... त हमरो सुन लीन्ही सभे..हमरा में उ हुनर रहीत त हम एह्बेरा कंप्यूटर के की बोर्ड ना तुरत रहती..हम एगो आम भोजपुरिया हईं..आ इ हमार हक़ बा की गलत के गलत कंही आ कर्त्तव्य बा की आपन भाषा , आपन संस्क्रीती के विलुप्त करे के साजिश के पर्दाफास करीं.......हमार त रउरा सब से इहे निहोरा बा की यदि भोजपुरी फिलिम बनावत बानी त सगरो भोजपुरी समाज के ध्यान में राखीं, भोजपुरियन के ध्यान में राखीं, भोजपुरी माटी के ध्यान में राखीं, भोजपुरी भाषा के ध्यान में राखीं, भोजपुरी संस्कृति के ध्यान में राखी......आ अब यदी इ सब रउवा ध्यान में नईखी राख सकत..त माफ़ करी सभे ..हमनी के हमनिए के हाल पर छोड़ दीन्ही सभे...ना त कंहवा रउवा सभे एह बात के क्लेम कर रहल बानी की रउवा सब भोजपुरी माई के सेवा करत बानी जा..आ हमरा भोजपुरी माई के सिसकारी लउकत बा...भोजपुरी माई के संसरी टगइला के उजबुजायील लउकत बा.................................
सिनेमा से भी जादा सुगमता से कवनो चीझ अवेलेबुल होला त उ बा संगीत....जन जन तक आपन मिठास से कानन के , आत्मा के, दिल के सुकून पहुन्चावेवाला संगीत..से बड कवनो सन्देश वाहक ना होखे..मन के उदगार, समाज के बेचैनी, सामाजिक मैसेज .....बोली, संस्कार पहुँचावे के......कब कान से सुनत सुनत इ संगीत होंठ के द्वारा हमनी के जुबान हो जाला..पता ना पड़े.................... संगीत हर मौक़ा, हर मूड खातीर हो सकेला..अलग अलग तरह के हो सकेला.....लेकिन आजकाल के अधिकतर संगीत का रउवा लागत बा की कर्णप्रिय बा? का रउवा लागत बा की कान से होते हुए इ संगीत रौरी जुबान तक भी आवो? का रउवा लागत बा की एहकर प्रवेश रउरी दिल आ आत्मा तक होखो? यदि ना त संगीत के माध्यम से इ कईसन समाज सेवा? यदि नईखे होत त का एहकर विरोध ना होखे के चाँही? हमरा त ना गावे आवेला ना गाना लिखे.....लेकिन जे लिखत आ गावत बा का उनुकरा से हामार इ डीमांड अनुचित बा? यदि ना त हम त हर ओह फुहर संगीत के विरोध करेम जवन हमरा कान के जरिए हमरा आत्मा में प्रवेश करे के कोशिश करी, ओकरा के गंदा करे के कोशिश करी.......यदी रउवा सभे के एही तरह के संगीत बनावे आ सुनावे के बा त माफ़ करेम सभे..एहसे भोजपुरी के सेवा ना भोजपुरी के आत्मा के तार तार कईल जात बा...आ इ शायदे कवनो भोजपुरिया चाहि की ओहाकर आत्मा के अईसे तार तार कईल जाओ..
भोजपुरी के संविधान के आंठ्वी सूचि में शामिल करे के मांग होत बा...भोजपुरिया सम्मलेन हो रहल बा..देश विदेश में रहे वालन भोजपुरियन के जुटान हो रहल बा....आ बतकही, पोस्टर बैनर सब अंग्रेजी आ हिंदी में...कईसन उठान होत बा भोजपुरी के? इंहवा लोग गर्व से कहत बा की देश के संसद में चिदंबरम साहब भोजपुरी में कहनी की "हम रउवा लोग के भावना के समुझत बानी" फेर हमही आ रउवा, भोजपुरियन से ही, भोजपुरिया मंच से ही हिंदी आ अंग्रेजी में बतकही क के कवन सन्देश देवल चाहत बानी जा? कंही इ सन्देश एह रूप में आम भोजपुरिया तक त नईखे चन्हुपट की " भोजपुरी गंवारण के भाषा ह" काहे से की देखि हम हईं राउर अगुवा, हम नेत्रीत्वा देत बानी, हम सुट बुट टाई लगा के मंच पर आगे बयीथत बानी..हमार चमकत फोटो रोज रोज अखबार में निकलत बा, हम कहात बानी भोजपुरी के अगुवा....आ हम भोजपुरी मंच पर भी अंग्रेजी भा हिंदी बोलत बानी..एह से भाई लोगन यदि रउवो सभ्य आ सुसंस्क्रीत कहाए के बा त रउवो हिंदिये आ अंग्रेजी बतियायीं......यदि इ मंशा बा त निसंदेह भोजपुरी के अईसन कर्न्धारण से नोकसान ही बा.....मानत बानी की रउवा, हमारा आ सगरो भोजपुरिया समाज के भोजपुरी के अलावे भी ज्यादा से ज्यादा दोसर भाषा के ज्ञान होखे के चाँही..रोजी रोटी खातीर, दोसर समाज में संपर्क संवाद खातीर...लेकिन जब अपने समाज में अपने मंच पर यदि भोजपुरी के कर्णधार लोग ही दोसर तीसर भाषा में बतकही करे लागी..त भगवान बन्चावास भोजपुरी के अईसन कर्न्धारण से.....
हम आ रउवा का कर सकत बानी? आपन आवाज त उठाईये सकत बानी....आ आवाज उठावाही के चाँही ना त फेर रोवला से का भेंटाई? जवने हुनर बा..ओकरे तनी तनी सदुपयोग भोजपुरी खातीर कईल जाओ त कुछो त सेवा होई...उ चिरईया वाला कहानी सुनले बानी नु जे आपन ठोड़ीसे पानी ढोवत रहे आग बुझावे खातीर...यदी ओह चिरयीयो नियर कुछऊ क दिहल गईल त बुझ लीं की आपन माटि के प्रती आभार हो गईल...यदी रउवा फिलिम लाईन में बानी त निमन निमन माटि से जुडल, सर्व समाज ला, सामजिक सन्देश वाला एक आधे सही फिलिम त बनायीं...यदि रउवा गायक बानी त निमन निमन भोजपुरी गाना लिखी आ गई..यदि रउवा कवी आ साहित्यकार बानी त कुछ कर्जा त भोजपुरी के भी चुकायीं..यदि रउवा विचारक बानी त कुछ विचार भोजपुरी के भी दे के लाभान्वित करीं..........................................................
हमार इचिको उद्देश्य नईखे केहू व्यक्ती विशेष भा संस्था विशेष पर कवनो तरह के कवनो अंगूरी उठावे के ....इ एगो आत्मावलोकन बा, विचार मंथन बा,,,,,,
रउरा लोग के प्रतिक्रिया के इंतज़ार रही......
जय भोजपुरी
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on September 8, 2012 at 5:02pm आशुतोष भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी
सोरह आना सही बात लिखले बानी ! लोगन के एह बात के , भोजपुरिया लोगन के एह बात के बुझे के जरुरत बा , जुझे के ना !
बेहतरीन लेख !
जय भोजपुरी
आशुतोष जी प्रणाम,
एकदम वाजिब उदगार बा राउर ....बहुत कुछ हमेशा भितरे-भीतर कचोटत रहेला ... सब कुछ जनले बुझले के बावजूद ..अगर हमके भोजपुरी के वाकई भला करे के बा त ...भोजपुरी में जीए के पड़ी ... आ शुरुआत अपने घर से करे के पड़ी ... जय भोजपुरी भाई जी ।
Comment by Brij Kishor Tiwari on September 8, 2012 at 7:28pm जय भोजपुरी आ प्रणाम आशुतोष जी .......
बात त वाजिब बा राउर ..........लेकिन कबो कबो, चिका फेकत फेकत ,टिकोरा पर सटीक निशाना लाग जाला ........
कम से कम चिका त फेकत रहल जाव ...
टिकोरा एकही बा .....
केहू के निशाना साध जाव .....
कम से कम एही आशा और विश्वास से .......
एक बार जोर से चिचियावल जाव ...............जय भोजपुरी ,जिया भोजपुरी
Comment by Umesh Gautam on September 9, 2012 at 8:50pm
Comment by Umesh Gautam on September 9, 2012 at 8:50pm Comment
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