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सब केहू के प्रणाम,
हर साल के तरह एह साल भी पांच सितम्बर के शिक्षक दिवस मनावल जात बा. डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के जन्मदिन के शिक्षक दिवस के रूप में मनावल निश्चय ही गुरु सम्मान बा. हमरा तरफ से श्रधेय गुरूजी के चरण में नमन.
अब सवाल इ उठत बा की गुरूजी के चरण में नमन कह देहला भर से ही गुरूजी के सम्मान हो जाई? का हमनी के आपन गुरूजी के बतावल आदर्शन पर चलत बानी जा? का उन्हा के दिखावल राही के अनुशरण करत बानी जा? यदि ना त कईसन सम्मान? केकर सम्मान? अब एहुसे बड सवाल इ बा की जन्हा सामान्यतया गुरूजी माने स्कूली शिक्षक के मानल जाला, ओयिजा कागजी एक्जाम के पास करे के तरीका बतलावल जात बा भा जिंदगी के इम्तिहान पास करे के भी? नैतिक मूल्यन के बारे में भी पथ प्रदर्शन हो रहल बा या खाली नंबर ले आवे के नुस्खा ही बतावल जा रहल बा? गुरु आ शिष्य के बीच वैचारिक, आत्मीय सम्बन्ध भी स्थापित करे के कोशिश हो रहल बा की खाली व्यवसायिक सम्बन्ध ही बनावल जा रहल बा? जन्हवा महीना के फीस भरल एह बात से जादा महत्वपूर्ण होखे लईकन के काबिलियत आ कौशल पर..उन्हवा गुरु शिष्य परम्परा कईसन? इ कूल्ह आखिर हो काहे रहल बा? का समाज इहे चाहत बा? की समाज की इहे परोसल जा रहल बा? समाज के मज़बूरी बा की व्यवस्था के? पर्याप्त स्कूल के अभाव में स्कूली शिक्षा के व्यवसायीकरण से इ फ़ायदा त भईल की आज गाँव गाँव शहर शहर स्कूल त खुल गईल...लेकिन कवना कीमत पर? समाज में जन्हवा गुरूजी भी डिफरेंट क्लास खातीर डिफरेंट हो गईलन उन्हववे शिष्य भी नंबर के होड़ में अईसन लागल बाडन की कवन गुरूजी कईसन गुरूजी? स्कूल में नैतिक शिक्षा के उम्मीद भी कईसे कर सकत बानी, जन्हवा ज्यादातर स्कूल के प्रबंधन आ मालिक बाहुबली भा अनैतिक कार्य क के धन अर्जित करेवाला शिक्षा के कुछ ठेकेदार लोग के जागीर बन गईल होखे? जन्हवा शिक्षा दिहल एगो रोजगार/ मुनाफ़ा कमाए के जरिया होखे ओईजा कईसन गुरु आ कईसन चेला?
शिक्षा, कवनो भी देश के विकास के रीढ़ होला आ शिक्षक ओह रीढ़ के विकसीत करे के साधन ................................
आज फेर कुछ शिक्षक लोग के सम्मानित कईल जाई, सरकार आ सरकारी तंत्र के तरफ से......लेकिन शिक्षा के गीरत स्तर आ शिक्षक के स्थिती में कवनो सुधार के पहल भी होई एहाकर आशा कम ही बा.....आज शायदे केहू शिक्षक के आपन कैरियर के रूप में च्वाइस करत होई? काहे? एह पर विचार कईल जरुरी बा..तबे गुरु जी लोग के असली सम्मान दिया सकत बा..ना त बस उहे हर दिवस के भाँती इ शिक्षक दिवस भी गुरूजी लोग के दिखावटी सम्मान के साथे ख़त्म हो जाई....
जय भोजपुरी
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on September 5, 2012 at 8:20pm आशुतोष भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी
एक दम सही बात कहनी एह मे कवनो दु राय नईखे की जब ले परिनाम नीमन ना रही तबले कवनो दिवस के कवनो माने नईखे ।
बरिआर सनेस
जय भोजपुरी
Comment by Umesh Gautam on September 5, 2012 at 8:42pm
Comment by Umesh Gautam on September 5, 2012 at 8:42pm
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on September 6, 2012 at 12:48pm sahi kahni bhai jee
jai bhojpuri !
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