हम कईसे रहबी सईंया , जो छोड़ी के जयब परदेश ।
मन करे देखते रहितीं , तोहरा के हरमेश।
अँखिया से दूर जयब , साथ छूटी जाई ।
तोहरा के देखे बिना , चैन कईसे आई ।
चिट्ठी पाती आई जाई , भेंट ना हो पाई ।
तोहरा बिना सूना लागी , बात ना हो पाई ।
बिछड़ी के रहब सैंया , हियरा के होई कलेश ।
मन करे देखते रहितीं , तोहरा के हरमेश।
केकरा से आग माँगबी , केकरा से पानी ।
केकरा से प्यार माँगबी , चढ़ल जवानी ।
जइब त कहिया अयब , करब मनमानी ।
मिले खातिर मन तरसी , आयी आँन्ही पानी ।
वर्मा नोकरी के बात छोड़ , घर ही रह हरमेश ।
मन करे देखते रहितीं , तोहरा के हरमेश।
श्याम नारायण वर्मा
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