रोज होखे लागल बरसात , सजनवा जल्दी से आ जा ।
छुट्टी ना बा हमरा पास , सजनिया चुप लगाजा ।
दिन रात झम झमा झम बरसे , पानी से भरे अँगनवा ।
तोहरा बिन नींद ना आवे , सूना लागता भवनवा ।
छुट्टी के देहनी दरखास , बस इजाजत ना मिलेला ।
तोहरा बिना कटे न रतिया , सोची करेजा हिलेला ।
निहोरा कर कराल छुट्टी पास , अँगनवा जल्दी से आ जा ।
छुट्टी ना बा हमरा पास , सजनिया चुप लगाजा ।
कही गयल सावन में आयब , बीतल सावन मै मुरझाई ।
कहिये से तोहार असरा लगवनी , देखनी अँखिया बिछाई ।
तोहरा बिना नीक न लागे , अकेले आवे रोवाई ।
रोज गुहार कईनी जाके , सोची मन रहे अकुलाई ।
वर्मा बस छोड़ी के आयब, धनिया हाँ में हाँ मिला जा ।
रोज होखे लागल बरसात , सजनवा जल्दी से आ जा ।
श्याम नारायण वर्मा
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