सब केहू के प्रणाम,
एगो गाना सुनत रहनी की "यह देश है वीर जवानों का.............." तलेले हमार एगो मित्र कहले की भाई आरे माडर्न गाना सुन कंहवा उ सब पुरनका गाना में अझुराईल बाड़s आ चट देना लगा देहले- "माई नेम इज शीला, शीला की जवानी....... हम सोंच में पड़ गईनी की इ देश जवान से जवानी के तरफ मुड रहल बा या नवजवान लोग के जवानी के जोश में जवान कम आ जवानी (शीला के..) ज्यादा लउकत बा......केहू कहत बा की देश के बागडोर जवान के हाँथ में होखे के चाँही ताकि देश विकाशशील से जल्दी से जल्दी विकसीत बनो...सवाल कौंधल कौन जवान के हाँथ में, वीर जवान या शीला के जवानी वाला जवान? केहू कहत रहे की बुजुर्ग लोग सठिया गईल बा, एह लोग के सोंच पुरान हो गईल बा, इ लोग देश के तरक्की के का राश्ता देखाई लो? इ लोग त खाली घोटाला में लागल बा लो...हम सोंचे लगनी की यदि इ बात ठीक बा त का राजा जी बुढ हउवन की मधु कोड़ा जी.. केहू कहे लागल की आजकल के जवान कंप्यूटर सैवी बा , ज्यादा टेक्निकली अपग्रेड बा , उहे देश के तरक्की के सही राह दिखा सकत बा. फेर सोंचे लगनी हम की बात त ठीक बा लेकिन का एह जवान लोग के शीला के जवानी के अलावे बुधिया के बेमारी के बारे में भी पता बा..आ यदि पता बा त शशि थरूर जी के कहल ओह वक्तव्य के ध्यान आ गईल..की प्लेन के इकोनोमी क्लास त केटल क्लास ह....अखबारन के ओह टुकरण पर नजर गईल जेइमें आये दिन हो रहल स्नैचिंग,राहजनी, उचक्कागिरी , किडनैपिंग में कंप्यूटर इंजिनियर आ पढ़ल लिखल लोग के नाव लउकत बा......
ध्यान आईल बापू के...ओह बुढ हड्डी में भी केतना ताकत रहे जेहकर एक ललकार पर समूचा भारत हामी भारत रहे...आपन रोजी रोटी के परवाह कईले बानी असहयोग आन्दोलन खातीर जुट जात रहे...इयाद आवे लागल अभी हाल के आंठ्वी क्लास तक पढ़ल आ बुजुर्ग अन्ना के..जेहकर एक हुंकार में दिल्ली के रामलीला मैदान से ले के संसद के गलियारा के भी सलाम कहे के पडल........
सवाल उठल मन में की देश के आगे ले जाए खातीर जवान भईल जरुरी बा, पढ़ल लिखल भईल जरुरी बा? या देश के, समाज के, लोक के, तंत्र के समझ होखल जरुरी बा, देश के प्रती जज्बा होखल जरुरी बा, स्वहित से ऊपर जनहित के सोंच राखाल जरुरी बा?
युवा हुंकार भर सकत बा...लेकिन उ संतुलित सोंच भी होखे इ जरुरी बा का? यदि ना त फेर युवा ही काहे? युवा केन्द्रीत राजनीति कईसन? का इहो खाली वोट बैंक बनावे के राजनीति नईखे बुझात?
शायद एह देश के जवान आ जवानी से ज्यादा एगो निःस्वार्थ सही आ सन्चा सोंच के जादे दरकार बा..
राउर लोग के प्रतिक्रिया के इंतज़ार बा.
जय भोजपुरी
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