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“ई बुकुआ का होला”

सबके प्रणाम,

फिलहाल समझे खातिर ई कहल जा सकेला कि, बुकुआ माने देसी फेसियल। दर असल अपने भोजपरिया क्षेत्रन में, बुकुआ ओसिनल सरसों (उबालल) के पीस के तइयार कइल जाला, जवना के लेप पूरा शरीर पे लगा के छोड़ दीहल जाला फेर सुखला पे ओके सरसों के तेल के जरिए रगड़-रगड़ के छोड़ावल जाला, एसे ना खाली पुरान से पुरान मइल त साफ होइए जाला, बालुक देहियाँ में, एगो खास निखार भी आ जाला । अलग-अलग क्षेत्रन में, एकर धार्मिक अउरी सामाजिक महत्व भी बा, जहवाँ कुछ जगहि फगुआ में होलिका दहन के दिन एकर लगावल शुभ आ जरूरी मानल जाला, ओहीं शादी बियाह में भी एकर बकायदा रसम होला । सरसों के अलावा पछाह आ अन्य बहुत जगहियन पे हल्दी-चंदन,रामराज माटी भा बेसन के भी लेप तइयार क के सौन्दर्य आ सफाई खातिर इस्तेमाल कइल जाला । ज्यादातर हिन्दी भाषी लोग एकरा के उबटन भी कहेला। वास्तव में, बुकुआ लगावल एगो बहुत पुरान प्रचलन बा आ प्राकृतिक चिकित्सा के बहुत करीब बा । भोजपुरिया बेल्ट में एहपर कइ गो मुहावरा-कहावत भा टिबोली भी सुने के मिलेला, कि "अब एकट्ठे बुकुआ लगा के नहान होई" भा "का लिसिर-घिसिर बुकुआ छोड़ावत बाड़" ।

धन्यवाद आ जय भोजपुरी ।
अनूप

Views: 52

Comment by sanjay panday on August 29, 2012 at 12:44pm

jai bhojpuri bhaiya |

aab bad ho gaila par saal me ek bar hi lagela khali holi par 

Comment by अभिनन्दन गुप्ता on February 15, 2013 at 8:25pm

hamani ke abtan kahe ni ja

jai bhojpuri

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on February 16, 2013 at 2:41am

अनुप भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी

कोकडउर बुकवा के मन परा देहनी आ बुकवा के नीमन से बिस्तृत जानकारी देहनी ।

जय भोजपुरी

Comment by mukesh kumar on February 17, 2013 at 7:56pm

JAI BHOJPURI   BHAIYA JEE LOG

Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on February 19, 2013 at 10:29am

sahi kahnin anoop bhai jee 

jai bhojpuri 

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