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ताल तलैया भरल लबालब , आवेला पानी चुहानी में ।

ताल तलैया भरल लबालब , आवेला पानी चुहानी में ।
कहिया अयब हमरो बलमुआ , छोड़ी गयल जवानी में ।
कभी गरजे कभी बिजली चमके , टिप टिप कबो जोर से बरसे ।
लागे रतिया में दिन हो जाला , तोहरा बिना मोरा मन तरसे ।
कहि के गयल सावन में आयब , बिजली गिरेला दुरानी में ।
कहिया अयब हमरो बलमुआ , छोड़ी गयल जवानी में ।
दिन रात पुरुवा बयार बहे झकझोर , बेसहारा नइया डोले धारा में ।
बिना खेवइया के नाव डोलत बा , बोल कइसे जाई किनारा में ।
वर्मा पाती भेजी भेजी हरनी , रहेल कवना मस्तानी में ।
कहिया अयब हमरो बलमुआ , छोड़ी गयल जवानी में ।
श्याम नारायण वर्मा

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Tags: !, गीत

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on August 26, 2012 at 11:15pm

बढिया बा श्याम जी !

Comment by Anoop Srivastava on August 27, 2012 at 2:44pm

श्याम भाई जी प्रणाम,
हमेशा नीहर प्रकृति के नीमन वर्णन आ विरह के अनुभूति ...धन्यवाद आ जय भोजपुरी ।

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