* एह कहानी के हम अपना समझ से दूसरा भाग मेँ खतम क देले रही बाकिर भैया लोग के आगे पढे के ईच्छा रहे । अब बड़ के ईच्छा त आदेश होला एह से तीसरा आ अँतिम भाग हाजिर बा बाकिर निर्णय सुनावल मत भुलाइब जा । प्रणाम आ जय भोजपुरी । * नीली छतरी वाला के अजब अजब खेल होला , हमनी के कबो ना समझ पाइब जा । कबो विकास मेँ विनाश त कबो विनाश मेँ विकास छिपल रहेला । एह से हमनी के आपन आपन करम नीमन से करे के चाही बिना फल के चिन्ता कइले । गाँव मेँ मुखिया जी खाली मुखिये ना रहन , सैकड़ोँ एकड़ खेत आ अथाह धन के मालिको रहन । भगवान नीमन दियानती आ बड़ करेजो देले रहन । इकलौता बेटा त हीरा रहे हीरा ! मुखिया जी के बेटा प्रकाश साचो के प्रकाश रहे । प्रकाश कृषि के क्षेत्र मेँ बड़ डिग्री ले के गाँवे आइल रहे आ सँगे सँगे एगो बड़हन कँपनी से औषधिय पौधन के खेती के काँट्रैक्ट भी ले आइल रहे । अचके मेँ मुखिया जी एक दिन रतन काका के बोला के कहले , '' रतन भाई । तू त हामार बचपन के सँघतिया हव । प्रकाश सैकड़ो एकड़ मेँ औषधि वाला पौधन के खेती करे जातारे बाकि उनुका कवनो अनुभव नइखे । अब बिना अनुभव के किताबी जानकारी त ओसही बा जइसे बिना चाँदनी के चाँद । तनी तु हु हाथ लगा देत त ..... । ह हम आजु ले केहुँ के हक नइखी मरले एह काम मेँ तु पच्चीस फीसदी के पार्टनर रहब ।'' प्रकाश के बुद्दि आ काका के मेहनत अइसन रँग जमवलस कि लक्ष्मी के बरसात होखे लागल । अब देखा देखी पुरा गाँव के लोग नया ढँग से नया नया पौधन के खेती करे लागल । तीन साल बाद काका नाया घर मेँ चिन्तावा के बियाह कइले त लागल कि पुरा गाँव जान लड़ा दी । सुनर आ कमासुत दामाद देख के काकी जुड़ा गइली । काका अब ठाट से गँगा जी नहाए जाले आ गावेले , '' दिनदयाल बिरिदु सँभारी , हरहु नाथ मम सँकट भारी । ''
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