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टूट गईल सपना (व्यंग्य)

सब केहू के प्रणाम,

आजकाल हम कारपूल में आवत बानी. इ मत बुझेम सभे की दिल्ली के ट्रैफिक व्यवस्था देख के कारपूल में आवत जात बानी, बलुक इ खालिस पईसा बंचावे के जोगाड़ बा, ताकि कम पईसा में कार के आनंद भी मिल जाओ आ आफिस जाए के साधन भी. पाहिले मेट्रो से जात रहनी हाँ, लेकिन ओयिमें जादे भीड़ भईला से बैठे के भी जगह ना मिल पावत रहे त सुते के बात त बहुत दूर के बा. अब हमरा जाए के रहेला गाजियाबाद से गुडगाँव , माने दू घंटा के सफ़र..गाडी से गईला पर सुते के मौक़ा मिल जाला त मनवा हरिहरायिल रहेला, ना त डेली सुबह सात बजे घर से निकलना आ राती के आठ नौ बजे ले पहुंचल थोड़ा जादा कष्टकारी भ जात रहल हा. खैर त हमनी के चार जाना एके करवा में आयीले जायीले जा..धीरे धीरे दोस्ती बढ़त गईल आ अब त चर्चा आ परिचर्चा  भी होखे लागेला. अईसही एक दिन आफिस से घर आवत बेर देश के दशा दुर्दशा पर चर्चा होखे लागल. कांग्रेस से ले के बी जे पी ले, सपा, बसपा, राजद, अकाली, डी एम् के, वाय एस आर कांग्रेस, ममता, जया...माने सगरी..बतकही में पता चलल की सब पार्टी भ्रष्ट बाड़ी सन..कवनो के देश के कवनो चिंता नईखे, सभे के आपन तिजोरी भरे के बा...स्वाभाविक रूप से हमरो चिंता भईल..आँखी के आगे अन्हार  छा गईल..मन कुपित हो गईल..बियाह आ लईका फईका भईला के बाद लोग सामान्यतया अपना बारे में कम सोंचे ला अपना बाल बच्चन के बारे में ज्यादा सोंचे लागेला..से स्वाभाविक रूप से हमरा आपन लईकन के चिंता होखे लागल..सोंचे लगनी की हमार त जिनगी जईसे तईसे कटिए जाई..एन्हनी के का होई? एह अंधकारमय वातावरण में एह लोग के भविष्य त औरी अंधकारमय बा..एके गो विकल्प लउकत रहुवे की कंही विदेश में जा के बस जाए आदमी त कम से कम लईकन के भविष्य त सुरक्षित रही...लेकिन हमरा आपन टैलेंट पर पूरा यकीन रहुवे आ एह से इ बात त पक्का रहुवे की हम अपना टैलेंट के हिसाब से त विदेशी नागरिक नाहिये बन पायिब..अब एके गो उपाय लउकत रहुवे कबूतरबाजी वाला..लेकिन ओयिमें जोखिम ढेरे बा..एह से ओह विचार से भी निराशा ही हाँथ लगुवे...अब त माने मत पूछी  जईसे आँखी के आगे अन्हार छा गईल होखे....तलेले एगो हमार मित्र के गर्जत आवाज हमरा कान में पडुवे उ कुछ चुनाव सुधार, राईट टू रीकाल, राईट  टू रिजेक्ट, राजनितिक शुद्धिकरण जईसन शब्द के प्रयोग करत करत बड़ा उत्साहित स्वर में कुछ बहस करत रहूवन. हमरो  तंद्रा भंग भईल..हम कहनी की भाई इ सब त ठीक बा लेकिन इ सब होई कईसे..उ कहलन बस एगो इमानदार कोशिश के जरुरत बा एगो कवनो केजरीवाल जी जईसन सोंच वाला आदमी यदि चुनाव आयोग संभाल लेओ त तुरते सगरो बेमारी दूर...राजनीती से अपराधीकरण के सफाया...जब राजनीति शुद्ध हो जाई तब त अपने आप सगरी व्यवस्था शुद्ध हो जाई. हमरा उनुकर बात निमन लागल..कहनी की भाई रौरी बात में दम त बा..लेकिन भारत देश अईसन बा जन्हवा  भ्रष्टाचार से भी लोग बहुत तंग बा.इंहवा मान लेहनी की निमन नेता लोग सत्तासीन हो जयीन्हे, लेकिन उ योजनवा आम जनता तक पहुंची तब नु? इंहवा त सगरी योजना भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ जात बाड़ी सन...उ कहलन जनलोकपाल..एक बार जनलोकपाल आ जाई त भ्रष्टाचार आ भ्रष्टाचारी छू मन्तर. हम कहनी की भाई चली राउर इहो बात ठीक बा लेकिन भारत जईसन गरीब देश में जन्हवा अभी भी अधिकांशतः जनता गरीबी के कारण भुखमरी के शिकार बा, उन्हवा कवनो योजना कवन कार करी..सरकार यदि इमानदार होई त उ पाहिले लोग के पेट भरे के बेवस्था करी की कल कारखाना, रोजी रोजगार आ इन्फ्रास्ट्रक्चर  के? उ कहलन की काहे घबरायिल  बानी महाराज..भारत के जेतना पईसा काला धन के रूप में स्विस बैंक में बा..उ सगरी यदि आज आ जाओ त देश के सारा आर्थिक समस्या छू मंतर..आ इहे ना आज ले जेतना घोटाला भईल बाड़ी सन उ सगरी पईसा आ जाओ, यदि देश के भीतर के काला धन आ जाओ त देश के प्रत्येक नागरिक के एक एक करोड़ रुपिया मिल जाई..हम बोलनी हैं!!!!! तलेले हमार मोबाईल के घंटी बाजे लागल..देखनी त श्रीमतीजी के फोन रहल...अब बहस चाहे कवनो मोड़ पर रहो..कम से कम हमरा में एतना हिम्मत त  नाहिये रहुवे की श्रीमती जी के फोन ना उठावे के हिमाकत कर सकी...खैर फोन उठवनी त ओने से श्रीमतीजी के आवाज आईल.."कान्हा पहुंचनी?" हम कहनी की अबे त निकलनी हाँ आफिस से अभी टोल क्रास कईले बानी. का बात ह? उ कहली की ना बिजली के बिल आईल बा बहुत अधिका आ गईल बा . हम पूछनी की केतना के? उ कहली की आठ हजार के. हम कहनी की कवनो बात ना जमा क दिहs . उ कहली की रउरा होश में बानी नु महीना के आखिरी चलत बा, एतना पईसा कंहवा बा? कंही त दू सौ रूपया दिवा के बिलवा के कम करा लीन्ही. हम कहनी की ना ना कवनो बात नईखे , अब कवनो चिंता जिन करs . अगिला महीना दियाई पेनाल्टी के साथ दियाई..लेकिन पूरा दियाई अब पईसा रुपिया के चिंता तु एकदमे छोड़ दs . उ कुछ अचंभित कुछ परेशान कहली की आछा ठीक बा घरे आयीं त बतकही होला आ फोनवा काट देहली.  फेर से हम आपन दुनिया में आ गईल रहनी. हम आपन मित्र से कहनी की इ बात त ठीक बा लेकिन विदेशी कम्पनियाँ के सामने आपन अर्थव्यवस्था कब ले टिक पायी..उ कहलन की भूल जा भाई विदेशी अब सगरी चीझ देशी होई..आ खाली एक्सपोर्ट होई इम्पोर्ट ना? अब बतियावत बतियावत कब नींद आ गईल पता ना चलल. नींद आवते सपना शुरू हो गईल.देखत  बानी का जे केजरीवाल जी चुनाव आयोग के अध्यक्ष हो गईल बानी..चुनाव सुधारण पर जवन चर्चा होत रहल हा ओकरा के अमली जामा पहिरा दिहल गईल बा...राजनीती एकदम शुद्ध हो गईल बा..नेतागण सगरो स्वक्छ छवि के चुन के आवत बानी लो...जनलोकपाल के कार्यान्वयन हो गईल बा..माननीय शिशोदिया जी ओकर प्रमुख बानी..देश बिलकुल भ्रष्टाचार   मुक्त बा. प्रधानमंत्री माननीय रामदेव जी हो गईल बानी..विदेश के सगरो काला धन अपना देश में...सगरो खुशहाली बा.....उद्योग मंत्री गोविन्दाचार्य जी हो गईल बानी.....देश के सगरी विदेश कंपनी के भारत निकाला मिल गईल बा...खाली स्वदेशी ही के चारो तरफ बोलबाला  बा. गृह मंत्री श्रधेय अग्निवेश जी बानी नक्सल समस्या समाप्त काहे की उन्हा के एह विचार के आगे बढ़वानी की , जब सगरो समृधि रही त फेर का करे के बा? एक हाली सगरे जनसंख्या के मुड़ी गिना जाई, सगरो जमीं नापा जाई आ बराबर बराबर सभे के बंटा जाई..  अब नक्सलवाद के जड़ में त मेनली भूमि के असामान वितरण ही नु बा..त जब सगरी भूमि बराबर बराबर बंटा जाई त फेर कईसन समस्या.  राष्ट्रपती जी आदरणीय अन्ना जी रहनी.
देश में  अब आरक्षण के समस्या भी ना रहे काहे की सभे त अब उद्योग पति रहे अब नोकरी केकरा चाहत रहे? चारो तरफ अमनोचैन, सुख शान्ति..पडोसी देश लोग हदस के घुटना टेक देहले रहे..अमेरिकी राष्ट्रपती के जल्दी appointment  ना मिले अपना देश के राष्ट्रपती से मिले के..............................................................................ढक ढक ढचाक...गाडी मोहन नगर पहुँच गईल रहे गड़हा में चक्का पडला से गदकी लागल त नींद खुलल. ...पहिला बेर एतना अफसोस लागत रहे एह तरे से नींद खुल्ला के..हमार सपना चकनाचूर भईला के..पहिला बेर अखिलेश जी पर एतना गोस्सा आवत रहे की इ गगड़हा के  ठीक तs करवा देहले रहते की नींद ना खुलित...एकरा पाहिले जब भी एह गदकी पर नींद खुलो त निमन लागत रहे..इ सूचक रहे की अब हमनी यु पी में प्रवेश कs गईल बानी जा..की आपन प्रदेश में घुसला के ख़ुशी मिळत रहे..की घरे अब अगिला पंद्रह बीस मिनट में पहुंचे के ख़ुशी मिळत रहे..आ ओहू से जादा एह बात के ख़ुशी मिळत रहे की एह पंद्रह बीस मिनट के टाईम में तनी आदमी फ्रेश हो जात रहे आ घरे भाकुवायिल ना पहुंचत रहे..बीवी पर रोब जमावे के मौक़ा मिळत रहे की देखs केतना काम कs के केतना थाक के आईल बानी..की हमरा जल्दी चाय चाँही...............
खैर फेर से डेली के ओही गह जह में लागल बा आदमी  एह उम्मीद के साथ की कहियो त हमनियो के सपना साकार होई....
जय भोजपुरी  

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Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on August 26, 2012 at 8:10pm

आशुतोष भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी

राउर सपना के दुसरका हिस्सा सांच होखो बस अतने हमार सपना बा ! भारत के भाग्य बिधाता के बनावे के ना परेला उ बनि जाला ।

भारत एह लोगन से नीमन चुनाव आयुक्त प्रधानमंत्री राष्ट्रपति उद्योग मंत्री गृहमंत्री देख चुकल बा ।

आठ हजार के बिल के चिंता करी , आ कईसे आठ हजार आ गईल ओकर चिंता करी , भउजी त एगो सलाह दे देले बाडी :-)

जय भोजपुरी

Comment by Anoop Srivastava on August 27, 2012 at 2:33pm

आशुतोश भाई जी परनाम आ जय भोजपुरी ।
बहुत कुछ झकझोरत बा ...फिलहाल ए टूटल सपनवा के मरम्मत कराइला के जरूरत बा, काहे कि ई जागत आँखि के सपना कहीं ना कहीं कुछ कइले के गुन्जाइश छोड़ले रहेला ...... धन्यवाद आ जय भोजपुरी भाई जी।

Comment by Umesh Gautam on August 27, 2012 at 8:51pm
आशुतोष भैया , प्रणाम आ जय भोजपुरी । साँचो झकझोर देनी । धन्यवाद ।
Comment by Umesh Gautam on August 27, 2012 at 8:56pm
आशुतोष भैया , प्रणाम आ जय भोजपुरी । साँचो झकझोर देनी । धन्यवाद ।

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