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फेसबुकिया हो गइली !

उमर बा चालीस के , बतावतारी बीस के , आँटी केहुँ कही दे त , परसु दाँत पीस के , रहली अनार अब त चुकिया हो गइली । भउजी त खाँटी फेसबुकियाँ हो गइली ।। *छउकी छउकी के ,भेजत बाड़ी रिकवेस्ट । गुड त बड़ले बाड़ी , बुझसु खुद के बेस्ट ।। नकली प्रोफाइल के , कइले बाड़ी पेस्ट । भइया का बोलिहे ? उ त लाइफ टाइम अरेस्ट ।। * मारी के चवन्निया मुसुकी , करतारी बात , सिस्टम के आहनी कढली , दिन अरु रात , आँखी रहे बड़े बड़े , चश्मुकियाँ हो गइली । भउजी त खाँटी फेसबुकिया हो गइली ।। * अनकर कविता से करसु अपडेटिँग । भइया से होत बाटे कबो कबो भेटिँग ।। भइया के सिस्टम होखे लागल हैँग हो । काहे ए भउजी ? काहे करतारु चिटीँग ? * लोलन , बकलोलवन के , फेसबुक प गोल बा , बाँची के रहीह , ओहिजा कतने तिरीछोल बा , चैटिँग के फेर मेँ कतने हकबकिया हो गइली । भउजी त खाँटी फेसबुकिया हो गइली ।। * फेसबुक बाबा के त मुअल बरम्हचरज बा । मानी जा ए भउजी , इ त देवारा के अरज बा ।। बहुते खराब तोह के धइले इ मरज बा । भइया के ताहारा प बहुते नु करज बा ।। * हाठा काठा देहियाँ उनुकर , सुखी के भइल ढ़ाठा बा , चिन्ता मेँ चिहुँकतारे , बड़ी तबाह पाठा बा . लउका अस रही सतपुतियाँ हो गइली ।
भउजी त खाँटी फेसबुकिया हो गइली ।।

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Tags: उमेश, कविता, गइली, गौतम, फेसबुकिया, व्यँग, हो

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