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पी के देत बाड़े गारी , उठा के आपन सँड़सा ।

भीड़ भईल भारी , खड़ा बाड़ें मंदिर के पुजारी ।
पी के देत बाड़े गारी , उठा के आपन सँड़सा ।
गाँजा भाँग पियेवालन के लागेला मेला ।
रात दिन शराब पी के होला झमेला ।
गाँव के लोगवा उनके कुछ ना कहेला ।
घर बार छोड़ी के बाड़े सबसे अकेला ।
घरवा में रोवतारी उनकर महतारी ।
पी के देत बाड़े गारी , उठा के आपन सँड़सा ।
सारा कमाई नशा में उड़ावेलन ।
केहू समझावे ओही के समझावेलन ।
गाँजा भाँग के फायदा बतावेलन ।
जे ना मानी वो के गारी सुनावेलन ।
भूखे लईकन संग रोवतारी नारी ।
पी के देत बाड़े गारी , उठा के आपन सँड़सा ।
सारा नगरीया मने मने जरेला ।
सामने गईला से सब केहू डरेला ।
पीये वालन के बस साथ रहेला ।
चुप चाप जाके सब पूजा करेला ।
वर्मा नशा पड़ेला सब पर ही भारी ।
पी के देत बाड़े गारी , उठा के आपन सँड़सा ।
श्याम नारायण वर्मा

Views: 30

Tags: !, गीत

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on August 23, 2012 at 10:29pm

बहुत खुब बर्मा जी

Comment by Rajesh Yadav on August 25, 2012 at 7:45pm

चुप चाप जाके सब पूजा करेला ।
वर्मा नशा पड़ेला सब पर ही भारी

Wahhhhhhhhhh.....Wahhhhhhhhhhhhhhhhh....Shyam Bhai.

 

Jai Bhojpuri.

Comment by Bishwajit yadav on August 28, 2012 at 5:09pm
क्या बात है बहुत सुनर........जय हो
Comment by mukesh vishwakarma on September 1, 2012 at 2:06pm

bahut niman ba.

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