Come, let's do something for Bhojpuri...
साल भर पहिले एक जाना भर सीकम ठेहुन ना नाक प ले भोजपुरी मे डुबत उतरात रहले , हमरो लागल की अईसन लोग भोजपुरी खाति भीड जाई त फेरि भोजपुरी हर ओह जगहि प पहुंच जाई जहवा एगो नीमन आ बरिआर भाषा के रहे के चाही ।
काल्हु उनुका के देखनी , देखनी की बेचारु अब का दो राष्ट्रीय भाषा खाति लागल बाडे आ हम पुछनी कि - काहे हो का भईल हो ? एक साल पहिले ले त बडा बाँहि भाजत रहलs , एक साल मे अईसन का लउक गईल की अब हमरो से भोजपुरी मे बतियावल छोड देहलs । त जवान जवन बात कहलस , उ सुनि के हमार दिमाग हिलि ना गईल हिले लागल ।
असल मे उ जवान कहलस कि नबीन भाई भोजपुरी भोजपुरी कईला मे कुछ बा ना आ भोजपुरी से धरम करम ना चली ।
फेरु हम मन मे सोचनी की ह ई त बात सही बा भोजपुरी खेतिहर किसान मजदुर जमीन से जुडल लोगन के भाषा ह एकरा के सरकार से कवनो दाम पानी भेटात नईखे एह से अईसना भाषा खाति कुछ कई के अपना लग से काहे के गलावल जाउ ।
कुछ लोग आजुओ भोजपुरी भोजपुरी एहि से जपत बा काहे की ओकरा अबहियो ई उमेद बा की भोजपुरी के सरकारी दाम पानी भेटाई जवना से ओकर धरम करम चली ।
बाकी एह दुनो कटगरी के लोग भोजपुरी ना भोजपुरिया समाज खाति खतरा बा आ भोजपुरी के छोड के कवनो दोसरो भाषा खाति लागल बा त ओहु भाषा खाति खतरा बा काहे की अईसना सोच वाला लोगन खाति देवता पितर खलिहा एह लोगन के आपन नाव आ अंटी मे आवत दाम बाटे , एह लोगन से भाषा नीमन से नसाई जात बिआ नासातिया ।
अईसना बाँहि भाजवा लोगन से सावधान रहला के काम बा ! काहे अईसन लोग कवनो भाषा से ओइसही चपकल बा जईसे गाई भईस के देहि मे जोंक । गते गते एकनी के ओह भाषा के खुन चुसत बाडन स अपने लाल भईल जात बाडन स आ उ भाषा सुखि के अंठई ।
नवीन भाई, प्रणाम आ जय भोजपुरी, दुनिया में दू तरह के लोग होला, एक जे भाषा के कुछ देवेला - एह में साहित्यकार लोग होला, अउर ऊ लोग होला, जे ओह भाषा में जियेला, अउर दोसर ऊ लोग होला, जे भाषा से कुछ ना कुछ निकाले में लागल रहेला, एह में भाषा के बदनाम कई रहल कुछ गायक, गीतकार, फिल्मकार के नांव लिहल जा सकेला। अउर ओह से भी घटिया ई लोग होला, जेकर जिक्र रउआ एह पोस्ट में कइले बानी, भाषा के इस्तेमाल कइ के, भाषा के नांव पर राजनीति कइ के, अउर अपने आप के भाषा के भगवान घोषित कइ के, ओकरा के नोंच-खसोट के फायदा उठाये के कोशिश करे वाला लोग...।
Comment by Umesh Gautam on August 19, 2012 at 7:10pm
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on August 19, 2012 at 7:54pm अईसना बाँहि भाजवा लोगन से सावधान रहला के काम बा ! काहे अईसन लोग कवनो भाषा से ओइसही चपकल बा जईसे गाई भईस के देहि मे जोंक । गते गते एकनी के ओह भाषा के खुन चुसत बाडन स अपने लाल भईल जात बाडन स आ उ भाषा सुखि के अंठई । ekdam sahi kahni bhai jee !
नविन भाई प्रणाम,
Comment by संजीव सिंह on August 21, 2012 at 10:09am नवीन भईया प्रनाम,
संभवंत: उनका नजर मे भोजपुरी के भितर कवनो विशेष खामी लउकल होई, ऐह से ऊ आपन रास्ता बदल लीहले बाडे। बाकीर ओकरा से हमनी के का करे के बावे? ऊ उनकर आपन फैसला बावे। हमनी खतीरा त बस ईहे जरूरत बावे कि हमनी आपन सारा ध्यान अपना मजील के पावे मे लगाईं सन, बाकीर सफर मे केहु साथ छोडत बावे त छोडो। ओहसे कवनो घबडईला के जरूरत नईखे।
जय भोजपुरी
Comment by sanjay kumar singh on August 21, 2012 at 8:24pm ना एने के ना ओने के ......... ऐसन गबरघिचोरवन से घबड़ाये के नैखे बस तनी सावधान रहला के काम बा ।
जय भोजपुरी
भाई जी प्रणाम,
ई जोंक तब्बे ले खून पिए न सन जबले ओकनी के लगे ले आपन हाथ ना पहुँचेला ...जय भोजपुरी ।
Comment by Chandra Prakash Dubey on August 24, 2012 at 11:29am नवीन जी,
जय भोजपुरी,
अइसने लोग भोजपुरी के रास्ता में रोड़ा होला लोग. जबले फायदा लऊकेला तबले लटकल रहेला, जब फायदा के सम्भावना कम होखे लागेला तब दूसर रास्ता प चल देला लोग.
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