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कईसे मनाई आजादी के सालगिरह

सब केहू के प्रणाम, 
सब केहू के आजादी के सालगिरह के शुभकामना. काल्ह १५ अगस्त के जश्न से सराबोर देश के देख के मन हर्षित हो गईल, बहुत गर्व भईल आपन लोकतंत्र पर...आज गुलामी के जंजीर से मुक्त होके हमनी आजादी के मुक्त वातावरण में सांस ले रहल बानी जा. एह दौरान बहुत कुछ मिलल त बहुत आजो बाकी बा. एही भावना के समेटले  कुछ लिखे के प्रयास कईले बानी........

 

 

कईसे मनाई आजादी के सालगिरह,

कईसे समझी बीत गईल वेदना- विरह.

आजो ना बुझल पेट के आग, ना जागल हमनी के भाग,

आजो खेत परती बा, मानसून पर निर्भर आजो हमार धरती बा,

सर्व शिक्षा अभियान के निकलल बा हवा,

आजो भुखमरी बा खाली बा तवा,

आजादी के पैसठ साल के कवन उपलब्धि गिनाई,

आजो कुपोषण बा आ महंग बा दवाई,

सरस्वती जी त लक्ष्मी जी के मोहताज हो गईल बाड़ी,

हमार त कुंवार बेटी हमरा सर पर भार हो गईल बाड़ी,

आजो दहेज़ के आग में झुलसत बहु बेटी हमार बाड़ी,

रोजी रोजगार बिजली पानी सब भ्रष्टाचार के आगे लाचार  बाड़ी,

आतंकवाद से देश ग्रसित बा , नक्सलवाद से प्रदेश,

नफ़रत से मानवता ग्रसित बा, पक्षपात से प्रेस,

पछिम में उत्तर विरोध, त दखिन में पूरब विरोध,

विरोध विरोध के खेला में विकास में आईल अवरोध,

कईसे मनाई आजादी के सालगिरह,

कईसे समझी बीत गईल वेदना- विरह.

जब तक हर गरीब के  चेहरा पर अमनो चैन ना होई,

जब तक हर गरीब के अंखियन में सुकून के रैन ना होई,

जब तक गद्दारण के मंशा स्पष्ट ना होई,

तब तक भारत के आजादी स्पष्ट ना होई,

जब तक हर हाँथ में काम आ रोटी ना होई,

जब तक आत्मसम्मान एह देश के हर बेटी के ना होई,

जब तक तक तन ढंके के कपड़ा आ मकान ना होई

तब तक एह देश के आजादी के सपना साकार ना होई.

 

 

 

जय भोजपुरी 

Views: 50

Comment by jitendra kumar thakur " dev " on August 16, 2012 at 6:47pm

bhute bhadhiya

Comment by Umesh Gautam on August 16, 2012 at 10:19pm
आशुतोष भैया , प्रणाम । एकदम साच आ मन के बात लिख देनी । बहुत नीमन । जय भोजपुरी ।
Comment by sanjay panday on August 17, 2012 at 11:08am

bhaiya parnam aa jai bhojpuri |

bahut sahi aa hakikat rachana ba |

hamani ke aajadi ta mil gail  lekin abahi bahut kuch baki ba |

Comment by संजीव सिंह on August 17, 2012 at 12:15pm

आशुतोष भईया प्रनाम,

अब ऐकरा के का कहाई कि अजादी के छियासठवा सावन देखे वाला देस मे आजो रोटी, कपडा, मकान अउर बिजली के समस्या से आदमी के हर रोज दु-चार होखे के पडत बावे। बढीया लिखाईल बावे ई कविता खास कर के जवना-जवना क्षेत्र मे अभी बहुत सारा काम बाकी बावे करे के, ओह सभ के गिना देले बानी।

बहुत बढीया।

जय भोजपुरी

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on August 17, 2012 at 5:07pm

आशुतोष भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी

अब हम का कही , आजादी मिलल हमरा भाषा के लिपी खतम हो गईल , भाषा बोली हो गईल एहि आजादी से !

खैर आजादी भा स्वतंत्रता कबो आर्थिक शारिरिक सांस्कृतिक , सामाजिक , राजनैतिक , सांस्कारिक , खेती बारी , खेल कुद मे समृद्धि के गारंटी न ह ।

तबो हमनी के जरी आजादी बा की हई हई हई मिले के चाहत रहे होखे के चाहत रहे बाकी नईखे होत , कहे के लिखे !

नीमन रचना , बेजोड भाव मन के !

जय भोजपुरी

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