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रतन काका (एगो कहानी ) *पहिलका भाग *

रतन काका के परिवार मेँ चार गो सदस्य रहले । काका , काकी , उनकर बेटा आकाश आ बेटी चिन्ता । काका खुद त पढ़े लिखे ना पवले रहन बाकिर अपना बेटा के पढावे मेँ आपन हाड़ गड़ा दिहले आ हाड़ गलल त गलल खेत बधार कुल्ही गवा देले । खैर लईका ईँजीनियर बन गईल आ नौकरी लागला के दु साल बाद घरे आईल त काका के लागल कि अब गँगा नहाए के दिन आ गइल । अभी ले बबुआ नगद नारायन भलही नून तेल भर देले रहन बाकिर सपना खुब देखवले रहन आ देखावे के का बात बेटी के बियाह , ढहल घर काका के सुतलो मेँ सुते ना देत रहे । जवान बेटी के बाप के निन्द त असहुँ लागेला आ टुटेला । अब काका के दु गो साध रहे बेटी के बियाह आ नाया घर । गाँव जवार मेँ हाला रहे कि रतन काका के दिन अब लवटी गईल । (बाकी बाद मेँ )

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Tags: उमेश, कहानी, काका, गौतम, पहिलका, भाग, रतन

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on August 12, 2012 at 9:33pm

प्रनाम आ जय भोजपुरी

ढेर छोट हो गईल बा तनी बड करी , बाकी शुरुवात बेजोड बा अगिला के इंतेजार बा !

जय भोजपुरी

Comment by sanjay panday on August 13, 2012 at 12:01pm

baad me ka ji ?

age batai na , hamara lagal ha ki kahani tani lambi hoi 

raua ta ekdam hi kat dehani age badhai | ham jihat bani |

jai bhojpur i

Comment by Umesh Gautam on August 14, 2012 at 7:36pm
नवीन भईया आ सँजय भैया , प्रणाम । कहानी के दूसरका भाग आज पोस्ट क देले बानी । इ प्यार हमेशा मिलत रहे । जय भोजपुरी ।

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