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प्रनाम आ जय भोजपुरी
भारत संस्कार के देश ह भारत कई गो भाषा के पहिचान के देश ह भारत सन्युक्त सम्म्लित परिवार के देश ह भारत दुनिया के एक संगे रहे सिखावेला नीमन से बोले बतियावे सिखावेला आदत रहन मय बतावेला बाकि अब ?
ब्रांडेड कपडा ना रहे , रकम रकम के खाये के ना मिलत रहे , रकम रकम के खेलौना ना रहे बाकी आजु से 18-20 साल पहिले जवन चीझु अपनापन मे मिलत रहे उ ब्रांडेड कपडा , रकम रकम के खाना पीना , खेलौना से बहुत बेसी रहे । एह बात के अनुभव तब होला जब रउवा अकेले मे अपना पाछे सोची ।
आजु अपना मेहरारु से दुपहरिया मे खाये घरी बतियावत रहनी ह त इहे कुल्हि दिमाग मे आवत रहल ह आ हमनी के बीचे इहे कुल्हि बतकही चलत रहल ह की आजु के जबाना मे कतना आसान हो गईल बा अपना चाचा चाची बडका बाबुजी बडकी माई भईया भाभी फुआ मौसी मामा मामी आ एह लोगन के लईका लईकिन के । गांव के आस पडोस के भुलाईल कतना आसान बा कतना आसानी से हमनी के भुलवा दे तानी जा !
हमनी के माई बाबुजी के भुलवा देत बानी जा आ एह कुल्हि लोगन के भुलवावे मे मदत करत बा आजु के कम्युनिकेसन सिस्टम ( मोबाईल इंटरनेट आदि ) तड दे लगाव बतियाव उ ओने भले कतनो दुख मे रहिये बाकी मोबाईल प सब नीमने बा आ रउवा कतनो बिपत्ति मे रही सब नीमने बा । टीप छुवे खाति कोरम पुरा करे खाति हाल चाल लिआत दिआत बा बाकि खांटी पन रिश्ता के खाटीपन जवन बा तवन त बहुत आसानी से आराम से सरिहारी के खतम हो गईल बा आ तनी मनी कहि बाचि गईल बा त खतम होखे के कगार प बा ।
हम अपना गांव मे आंखि के सोझा घर बटात देखनी , एगो टोला मे आजु से 18-20 साल पहिले 20 गो घर रहे आजु ओहि टोला 120 गो घर बा , मय लो एके खुंट के बाकी अलगा होखे के स्पीड पहिले से ढेर बेसी ।
जवन घर एक मे माने की सन्युक्त परिवार मे बा ओह घर व्यथा एगो अलगे बा , आ उ ई की ओह घर के लगभग मय लो बहरा रहत बा , पहिले साल छामाही शादी बिआह परब तीज के ले के लोग आईयो जात रहे त एह घरी बेटा बेटी के पढाई लिखाई नोकरी चकरी के अईसन आफत बा की दुईयो दिन खाति आईल गईल पहाड भईल बा ।
बिआह शादी , त पहिएल छव महीना पहिले बिआह तई हो जाई , एक महीना पहिले से हित नात नजदिकाह रिश्तेदार लो आवे लागी लो रोज रकम रकम के खाना बनी घरउ खाना , गीत गवाई दुआर प चल पहल होखे लागी समान बटोरे से ले के तर तईयारा बिआह के दिन ले आ बिआह भईला के दु चार दस दिन आगे ले जवन चल पहल लउकी तवन आवे वाली बहुरिया के ओह घर मे नीमन से मन लगावे खाति काफी रहत रहल ह बाकी आजु के जुग मे , टेंट से खियावे ले , पईसा छींट दिही बिआह के दिने दुआर प सब कुछ हाजिर , माडो आ मंडप के जगहि हाल ले ले बा , तिलक बरईछा दोंगा के जगहि प रिसेप्सन होखत बा , मुह देखाई त बस जीभ रिगाई हो गईल बा ।
सांच पुछी त हर एक लंगे से हमनी समाज मे जवन एकता अखंडता जवन चीझु समाज के बान्ही के राखत रहल ह ओह मे दरार परी गईल बा भा दरकत बा आ ई अईसन दरकल जाता जवना प ना कवनो चिपी सटाई ना कवनो पेवन लागी ।
एकरा के तुरे मे योगदान सबकर बा आ एकरा के जोडे भा सम्हारे मे सबकर योगदान चाही । हम इहो जानत बानी की हमरा बात के असर केहु प ना परी बाकी ई बात त हम कहिये सकत बानी की हाड मास के देहि बस नावे के हाड मास के बा असल मे कल पुर्जा लोहा लकड के देहि हो गईल बिआ । जवना प कुछउ के कुछ असर होखे वाला नईखे ।
हो सकेला अकेला मे रोई के अपना गलती के एहसास हो जाउ बाकी एह से कुछ नईखे होखे वाला । लोर जिआन होई मन थोर होई फेरु उहे काल्हु सबेरे आफिस जाये के बा बेटी के तबियत नीमन नईखे ।
रासन पताई मे दाना दवाई मे
हमनी के जिनगी
बस अतने मे पिसाईल बिआ
अनका के देखि के
छाती पिटाता
रहन संस्कार सभ
रोड प छिटाता
लुकवावे चोरावे मे
आपन बचावे मे
अनकर ओरवावे मे
लंगी लगावे मे
हमनी के जिनगी
बस अतने मे अझुराईल बिया
जय भोजपुरी
Comment by Rajnish Kumar Singh on August 11, 2012 at 10:53am Sahi bhaiya hamni ke apna se bahut alag hokhat bani ja har roj...
hamni samaj me dikhawti pana jyada aur apnapan kam ho gail ba..
pahile ghar , dhan batat rahe aaj t man aur dil hi bata jata ,
sneh ,lagaw sab khatam ho jata . Aajkal prem bhi business ho gail ba.... dhnya ba aaj ke andha daud..
aur eh me kabhi kabhi ham bahut akela mahsoos karila ....
aab bas kuchh na.....
jai bhojpuri.
bhaiya parnam aa jai bhojpuri |
bahut niman lekh ekdam aaj ke samasya ba e baat |
halaki hamara lagat ba kahi kahi abhi sabkuch thik ba
jaise hamara lekha log mane paisa ke abhav javana karan
sab kuch thik ba |lekin raur rachana bilkul sahi ba kafi jagah
raur baat fit ba |
jai bhojpuri |
Comment
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