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प्रनाम आ जयभोजपुरी।

आजकल हमनी के गवँई परिवेश मेँ एगो बिमारी बडी तेजी से पाँव पसार रहल बा। उ बेमारी बा अन्धविशवास के।जेकर परभाव से शिक्षित समाज के लोग भी प्रभावित हो जात हवेँ। एक तरफ गाड पार्टिकिल के एह जुग मेँ विज्ञानी लोग जहाँ भगवान के भी चुनौती दे रहल बाडे वहीँ आजकल जादू टोना आ प्रेतबाधा से जुडल चरचा गाँव घर मेँ जादे सुने के मिल रहल बा।ओझा सोखा के चक्कर मेँ शरीर से जादा मानसिक रोग से लोग परेशान देखात बाडे ।आ एगो ओझा पता नही झूठ या साच मेँ बडा ताव से बता देवे ला कि 'तोहरे ऊपर प्रेत क साया बा','एके त फलनियां पकडले बा','एकरे ऊपर नाग के साया बा तबे एकरे शरीर से दुर्गन्ध आवत बा' पर घबराये के कवनोँ बात नइखे बस कुछ खरचा आई आ ई संकट कट जाइ।एह तरह से जहाँ एगो गरीब के जेब ढीली होत बा वहीँ एह ओझा सोखा बाबा लोग के चाँदी कट रहल बा। आखिर ई सब का बा? एमे केतना सच्चाई बा? एकर का निदान बा? हमेँ त बुझाला ई सब बस मन के बहम बा आ लोगन के ई सब ओझा सोखा के चक्कर छोडके कवनोँ बढिया डाक्टर आ वैद्य के पास जायेके चाही। पर आप सबके एह बारे मेँ का विचार बा ?आपन विचार शेयर करीँ जा.....।

 

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Tags: samsamyik

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on August 12, 2012 at 9:31pm

अर्जुन जी प्रनाम आ जय भोजपुरी

बात त राउर एक दम सांच बा आ एह बेमारी मे ढेर लोग फंसल बा !

जय भोजपुरी

Comment by Anoop Srivastava on August 22, 2012 at 9:44pm

अर्जुन जी प्रणाम आ जय भोजपुरी !
बहुत सही मुद्दा उठवले बानी रउआ ... आजु पढ़ल-लिखल समाज के लोग भी एसे अछूता नइखे ..आदमी जब कई ओर से हार जाला त अक्सर ए कुल चक्कर में पड़ि जाला ...ओकर ओतना गलती ना होला बल्कि ऊ अपने समस्या से पार पावे खातिर कौनो कसर नाही छोड़ल चाहेला .. आ बहुत कुछ जान बूझ के भी अझुरा जाला । ए समस्या से निजात पावे खातिर, अइसन ढोंगी आ पाखंडियन के असलियत समाज के सामने लावे के पड़ी ...धन्यवाद आ जय भोजपुरी ।

Comment by arjun rai on November 19, 2012 at 10:50am

धन्यवाद आ जय भोजपुरी ।

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