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टीम अन्ना से अन्ना पार्टी

सब केहू के प्रणाम,

अन्ना के आन्दोलन ख़त्म!! केजरीवाल के छिपल महत्वाकान्छा उजागर!!! ना जाने अईसन केतना स्लोगन से केतना विश्लेषण से इलेक्ट्रोनिक मीडिया पटल पडल बा. हम कहत बानी की अन्ना आन्दोलन क के कवनो गलती क देहले का? अन्ना भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल बजा के, व्यवस्था के खामियन्न के उजागर क के कवनो अपराध क देहले? अन्ना औरी उनुकर टीम ग्राम सभा के और अधिकार देवे के बात कह के कवनो गुनाह क देहलस? हम जानत बानी की एह समय में अन्ना के समर्थन में एको गो बात बोलला पर ढेरे प्रतिक्रिया मिली. लेकिन का हमार प्रश्न नाजायज बा? मानतानी की अन्ना के आन्दोलन चलावे के तरीका में जरुर बड़हन खराबी रहल होई, जे कारण बन गईल, एह आन्दोलन के स्थागीत होखे के. लेकिन सत्ता पक्ष आ समूचा राजनीतिक जमात भी एह आन्दोलन के नाकाम बनावे के कवनो क़सर ना छोडले रहे. मौजूदा समय में हम इहो मानत बानी की समूचा राजनितिक बिरादर के एक सीरे से नकार के कवनो आन्दोलन के सफल भईल मुश्किल बा, आ एहकर उदाहरण जे पी मूवमेंट बा जेकरा सफलता के पीछे कांग्रेस विरोधी राजनितिक समूह के समर्थन रहे..लेकिन ओहकर का हश्र भईल इहो केहू से छुपल नईखे. का कवनो निःस्वार्थ भाव से कवनो आन्दोलन सफल नईखे हो सकत एह लोकतंत्र में? यदि ना त इ लोकतंत्र के अच्छाई कहाई की बुराई? कम से कम जब ले आन्दोलन चलत रहे आ राजनीतीक पार्टी बनावे के बात ना होत रहे तब तक त एह आन्दोलन के निःस्वार्थ त कहले जा सकेला. यदि एक मिनट ला मान भी लीं की एहमें केहू के निजी स्वार्थ रहबो कईल तबो त इ मुद्दा के दोष भा आन्दोलन के दोष ना कहाई. अब यदि अन्ना आन्दोलन से अन्ना पार्टी बने जा रहल बा त माखौल कईसन. आखिर एहकर इ परिणति त होखाही के रहे, जन्हावा के सरकार मूक बधिर हो जाओ आ विपक्ष खाली हवा में थपडी बजावे खातिर होखो. देश के इतिहास में एतना बड़हन बड़हन घोटाला आरोपित भईला के बाद भी भ्रष्टाचार खातीर एगो सशक्त कानून के आन्दोलन के स्थागीत भईला से राजनीतीक जमात जेतना अट्टहास लगावत होई, उ स्वाभाविक बा. लेकिन एही मुद्दा पर एगो तथाकथीत इमानदार कोशिश यदि होत बा पार्टी बनावे के ताकि संसद में घुस के संसद के सफाई कईल जाओ त एहकर स्वागत होखे के चाँही..तब तक जब तक की एह कृत्य से कुकृत्य के बू आवल ना शुरू हो जाओ. संदेह बा. संदेह लाजिमी बा. दूध के जरल के मठा पर भी विश्वास ना होखे..लेकिन प्रतीक्षा त कईले जा सकत बा. अब जन्हावा एक से एक भ्रष्ट पार्टी आ नेता लोग के एतना मौक़ा दियायील त इंहवा त मौक़ा देवे के भी बात नईखे होत..छौ आठ महीना में अईसही पता पड़ जाई. खैर अंत में हम एतने कहेम की जन्हवा आन्दोलन के आपन मुकाम तक ना पहुंचला से बहुते नुकसान भईल उन्हववे आशा के बात इ बा की भ्रष्टाचारके मुद्दा भी अब राजनीती के केन्द्रविंदु में आवे में सफल रहल.

जय भोजपुरी

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Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on August 7, 2012 at 8:01pm

आसुतोष भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी

हम एह ईमानदार कोशिश खाति त कहिये से एह लोगन से निहोरा करत रहनी ह बाकि तब त ई लो राजनीति खोभारी आ नेता माने माने कुकुर बिलाई बुझत रहल् हा लो ।

खैर ई नीमन बात बा की ई लो चुनाव लडी लो आ संसद मे जाई लो नया नया कानुन बनाई लो !

जहा तक आलोचना कटाक्ष बतकही नीमन बाउर , त ई होखबे करी केहु नीमन करो त केहु बाउर करो त ! बुला इहे प्रजातंत्र ह इहे लोकतंत्र ह !

जय भोजपुरी

Comment by Mantu Singh on August 9, 2012 at 11:44am

प्रश्न सब अपना जगह उचित बा रावुर, आ एकरा से शायद हर कोई सहमत भी होई, पर अन्ना के आन्दोलन समाप्त कर के राजनीती में आवे से हमरा नईखे लागत की देश के कोई फायदा हो सकेला.
कारन उहे की जे तरे सारा राजनितिक दल से बिरोध कर के इनकर आन्दोलन दम तोड़ देलस वही तरे से पार्टी भी दम तोड़ दी, राजनीती के खेल बहुत ही निराली बा भैया हमनी के देश में...

जय भोजपुरी

Comment by Rajnandan singh on August 21, 2012 at 1:37pm

आशुतोष जी, प्रश्न त राउर जायज बा मगर अन्ना जी के पहिचाने में हमनी सभ से कहीं न कहीं भारी भूल हो रहल बा। जवना व्यक्ति के राष्ट्रभक्ति के बोखार महज डेढ साल में ठंढ़ा पड़ जाये उनुकर नियति पर शंका स्वभाविक बा। हमार व्यक्तिगत समझ से त अन्ना जी भीतरीया काँग्रसी हउअन आ काँग्रेसे के इशारा पर उहाँ के छद्म आंदोलन ठनले रहलें। ध्यान देबे के बात बा कि अन्ना जी के आंदोलन ठीक ओह समय पर शुरू भईल जब सरकार लगभग आधा दर्जन घोटाला  के अनदेखी के कारण सुप्रीम कोर्ट के भारी लताड़ झेलत रहे। मंत्री लोग जेल जात रहे। यदि ओह समय अन्ना जी अपना आंदोलन में देश के जनता आउर विपक्ष के ध्यान ना ऊलझवले रहितें तऽ सरकार के मटियामेट ओही समय तय रहे।

आज जब घोटालन के सभे मामला लगभग शांत बा, आरोपी लोग जेल से बाहर बा आउर आम चुनाव लगचाइल बा तऽ अन्ना जी हजारे के  आंदोलन तेज होखे के बदले खत्मे हो गईल, कहत वाड़ें, "टीम का गठन जनलोकपाल कानून को लाने के लिए किया गया था लेकिन सरकार इस पर गंभीर नहीं है, सरकार की अनदेखी की वजह से कोर टीम का कोई औचित्य नहीं रह गया है"

अइसन परिस्थिति में एह लोगिन के महत्वाकांक्षी नाम दिहल अनुचित नईखे। अन्ना जी के अनशन के का परिणाम भईल, देश,जनता, कानून आउर सरकार सभ अपना-अपना जगह पर जस के तस बा, नाम आ यश के भुखल अन्ना जी के असली लक्ष्य के प्राप्ति हो गईल, बाकी टीम के भविष्य खतिर रास्ता खुल गइल, डेढ साल के मेहनत में एह से ज्यादा अब आउर का चाहीं।

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