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  तंग इनायतपुरी  जी के  लिखल  एगो बेजोड़ आ अभी तक अप्रकाशित  गीत............

 

कल्पना कइलस गजब सिंगार केहू मन पड़ल ,

गीत के बिरवा भइल छितनार केहू मन पड़ल !  

 

           सुधि के सुरुज मन  मुड़ेरा  पर चढ़ल अगरा  गइल,

           रूप दर्शन के सुगंधित  घाम सब   छितरा   गइल !

           फेर फुलाइल आस के कचनार    केहू   मन पड़ल  ,

           गीत के बिरवा भइल छितनार केहू  मन  पड़ल ! !

 

एह किनारा भोग बा आ ओह किनारा जोग बा ,

आत्मा परमात्मा  के बीच में  सन्जोग     बा !

साधना दोहमच में बा लाचार केहू   मन पड़ल  ,  

 गीत के बिरवा भइल छितनार केहू  मन  पड़ल ! !

                 का पता जीवन नदी के धार कहँवा ले   बही,

             राह में बिसभोर के कब के रही के ना  रही  !

             आँख में अचके बसल  संसार केहू   मन पड़ल  ,

             गीत के बिरवा भइल छितनार केहू  मन  पड़ल ! !

 

दीन -दुनिया ,रूप-यौवन ,मोह -माया , धूप-छाँव,

चार  दिन के चाँदनी बा फेर  अन्हरिया ठाँव-ठाँव !

याद के जुगनू करे उजियार    केहू   मन पड़ल  , 

गीत के बिरवा भइल छितनार केहू  मन  पड़ल ! !

            देह माटी मन के गंगा में नहाइल   रात    भर   ,

              सत्य  शिव   आ  सुन्दरम् के सुर सुनाइल रात भर !

              प्रेम पूजा से  मिलल अँकवार केहू  मन  पड़ल ,

              गीत के बिरवा भइल छितनार केहू  मन  पड़ल ! !

                       जय  भोजपुरी

 

 

           

 

 

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Comment by Avanish Tiwari on August 3, 2012 at 7:21pm

संजय भईया परनाम आ जय भोजपुरी ..
एक बहुत ही सुन्दर रचना इनायतपुरी जी के द्वारा लिखल .. बहुत बहुत धन्यवाद राउर इ रचना हमनी से साझ करे खातिर..

जय भोजपुरी...

Comment by भास्कर रंजन "सूर्य" on August 3, 2012 at 8:23pm

भईया परनाम आ जय भोजपुरी

बहुते बहुते धन्यबाद रउआ के कि रउआ हमनी के तंग जी के एह रचना से परिचय करवनी ...

एगो बहुते सुनर रचना बा ई ... उहों के धन्याबाद बा कि एह रचना के हमनी के बीचे रखे के अनुमति रउआ के देहनी ...

जय भोजपुरी

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on August 4, 2012 at 2:14am

संजय भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी

जय भोजपुरी फेरु भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन आ फेरु रउवा चलते हमरा तंग इनायतपुरी जी से मिले के आ सुने के मोका मिलल । उँहा के बोले के आ भोजपुरी साहित्य के टांठ आ खांटी जानकारी आ मंच संचालन के घरी कवि लोगन से सवाल जबाब आ ओकरा बाद ई कविता ...

भोजपुरी साहित्य खाति एगो बरिआर डेग परे वाला बा कम से कम एह रचना के पढला के बाद हम ताल ठोकि के कहि सकेनी ।

राउर बहुत बहुत धन्यवाद एह टटका आ बेजोड रचना से परिचय करावे खाति ।

जय भोजपुरी

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