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जहाँ सज्जन लोग ही रहते , बदनाम है क्यों बस्ती ।

कहीं इमान के बाजार में , बेइमान की क्या हस्ती ।
जहाँ सज्जन लोग ही रहते , बदनाम है क्यों बस्ती ।
पुलिस वालों का काम होता , सबका हिफाजत करना ,
जहाँ पर पुलिस ही घर लूटे , वहाँ किस काम की गस्ती ।
किसीका विवाहित जीवन है , जीवन भर नीभाने को ,
बीच में ही जब बन्धन टूटे , फिर कैसे होगा मस्ती ।
बनाने वाले ने नाव दिया , सब तरह से ही देखकर ,
खुशी से जब सब सवार हुए , फिर कैसे डूबी किस्ती ।
महँगाई के इस मौसम में , आसमान छू रहा भाव ,
वर्मा पानी नहीं मिलाया , दूध कैसे मिला सस्ती ।
श्याम नारायण वर्मा

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Tags: कविता, छन्द, ताटंक, ,

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