धान के पतई सर सर करे , मस्त हवा करेला जोर !
चल देख खेतवा के नजारा , पानी मारेला हिलोर ।
हरी हरी घसीयन के चढ़ल जवानी ।
रिम झिम बारिस चलावता घानी !
भींजी के खेतवा में होता किसानी !
परती खेत वालन कहेलन हरानी !
घेरी घेरी बरसे ला बदरा , पवन मचावेला शोर ।
चल देख खेतवा के नजारा , पानी मारेला हिलोर ।
मस्ती में झूमेला रहरी के डलिया !
अभी त आवता काँकर में कलिया !
मकई से कागा कहे आपन हलिया !
जोन्हरी व बजरा में आवेला बलिया !
हवा में रंग भरे लहरा के सांवा , साठी के बढ़ेला पोर !
चल देख खेतवा के नजारा , पानी मारेला हिलोर ।
झुकी झुकी सोहत में गावेलन गाना ।
मियाँ बीवी मिलि के लेआवेलन खाना !
रंग रंग के पाखी चली आवेलन नाना !
बैलन के पीछे गुस्सा में चलावेलन ताना !
वर्मा भींजेलन बरखा में झुमी के , सावन के आईल बा जोर !
चल देख खेतवा के नजारा , पानी मारेला हिलोर ।
श्याम नारायण वर्मा
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