राखी
राखी पर आव भाभी संग , चली ना कवनो बहाना !
पावन परब राखी ह भैया , छोटी बहन ना भुलाना !
कलाई में बान्हबी धागा , राखी पर भैया आना ।
कहीं रहीह हमरो भईया , बहन को ना भूल जाना ।
भाभी त जाएगी मायका , बान्हें राखी भैया को ।
कैसे साथ आएगी बहना , आयेगें हम राखी को !
जान से प्यारी है दुलारी , भुलायें बहन को कैसे ।
वादा बा आयब राखी पर , बन्हवाने हम कहीं से ।
कहिया से रहिया देखेनी , भैया आएँगे हमार ।
साल भर पर खुशी लाया है , ये राखी का त्यौहार !
कच्चे धागे से बढ़ता है , भाई बहना का नाता !
वर्मा पावन पर्व है राखी , भाई कभी ना भुलाता ।
श्याम नारायण वर्मा
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