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माई ! इहे तें आसीस सदा द...

सब केहू के प्रणाम आ जय भोजपुरी...

अक्षयवर दीक्षित जी के पहिला गद्य-पद्य (कविता कहानी) के संग्रह "अँगऊ" जवन १९७७ में छपल रहे..
जब खेत खरिहान से गेंहू भा धान भा कवनो आनाज काट के घरे आवेला त घरे उपयोग से पाहिले "अँगऊ" निकालल जाला जवन गुरु-पुरोहित के समर्पित होला...
दीक्षित जी भी ई पहिला संग्रह अपना गुरु भोजपुरी के भगीरथ आचार्य महेन्द्र शास्त्री जी के समर्पित कईले बानी ...
ओह संग्रह के सबसे पहिला कविता माई आ अपना माटी के समर्पित बा, आ हम त इहे कहब कि एह ले निमन कविता माई के दुलार माटी के करजा खातिर दोसर हम आज ले नईखी सुनले पढले...

माई ! तोरा आँचर तर हम सब सुख पवनी, जनम संवरनी |
कईसन कईसन खेल खेलि के तोरा के सचहूँ अगरवनी ||

जहाँ कबो हम अलगा जाईं तोरा खातिर उ दुखदाई |
प्यार भरल उ अमरित दे तें चाहे केतनो उधम मचवनी ||

अब हम जन-सेवा अपनाईं तोरा दूध के लाज बचाईं |
साँचो सज्जन के गुन गाईं, अब ले केतना समय गँववनी ||
देश-राष्ट्र खातिर ई देहिया अमर शहीदन से नित नेहिया |
इहे तें आसीस सदा दे, केतना लोगन के भरमवनी||

गुरु-पुरोहित के रे माई ! तें अँगऊ दिहले हरसाई |
तोरे सिखवन करत करत हम संतोषे में सुख अपनवनी ||

Views: 41

Comment by Pankaj Praveen on July 23, 2012 at 10:18am

अवनीश जी प्रणाम 

 
बहुत बहुत धन्यबाद राउर जे रउवा अइसन रचना से परिचित करवनी..
जय भोजपुरी
Comment by Rohit Lal on July 23, 2012 at 11:09am

bahut sughar Rachana bave Bhai ji .. Dhanywad Raur

Jai Bhojpuri

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on July 23, 2012 at 7:12pm

अवनीश जी प्रनाम आ जय भोजपुरी

बहुत नीमन रचना , मन के भाव शब्दन मे लउकत बा , अछेबर जी के कोटि कोटि नमन आ रउरा के अनघा धन्यबाद की महान महान भोजपुरिया लोगन के रचना से हमनी के परिचय करावत बानी ।

जय भोजपुरी

Comment by sanjay panday on July 24, 2012 at 1:17pm

tiwari ji parnam |

bahut sunnar rachana ba bhaiya |

bahut bahut dhanyavad |

jai bhojpuri |

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