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धक्का मार झट सारी कहा , नव नवेली गिरी धड़ाम !

कालेज से पास हो निकली , घर बैठी करे आराम !
जीन्स लिबास सिर लगे चश्मा , खुश हो ढूढ़न चली काम !
मनचले की सोख नजर पड़ी , झट पीछे लगा बेकाम!
तेज दौड़ कर आगे निकला , लौटा पीछे बेलगाम !
धक्का मार झट सारी कहा , नव नवेली गिरी धड़ाम !
उठी गुस्से में तमतमाकर , चप्पल मारी सरेआम !
देख आज सिखाऊँगी सबक , तुमको अरे नीच हराम !
कालर पकड़े लगी जमाने , दर्शकों से पथ हुआ जाम !
दोनों में बस चली लड़ाई , सभी देखते हाथ थाम !
नहीं आया कोई छुड़ाने , फाड़े कपड़े खुलेआम!
कोई छोड़ने को ना राजी , दर्शक चले अपने काम !
एक दूसरे पर मार लगी , दोनों टकराये धड़ाम !
दोनों हुए खून से लथपथ , बीच सड़क पड़े नाकाम !
गिरे मोबाईल साइड में , बेहोश रहे हुई शाम !
उधर से पुलिस वाला गुजरा , गाड़ी में डाला धड़ाम !
उठा ले गया बेहोशी में , देखा रात भर नाकाम !
सबेरा हुआ उठी नवेली , पास पड़ा लड़का हराम !
बोलने की कुछ साहस करे , डाँट सुनी लड़की धड़ाम !
पूछा पुलिस सख्त गुस्से में , मियाँ बीवी पिये शराब !
वर्मा पीकर चलते रोड पर, जिन्दगी कर लिया खराब !

श्याम नारायण वर्मा

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Tags: !, 16-14, CHHAND, TATANK, कविता

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