परदेशी भईया , जाओगे कवना देश !
जो जइब तू दिल्ली शहरिया , साजन से कहना संदेश !
आधा सावन बीती गईल , कवनो ना आइल खबरिया !
कब से पिया की राह निहारु , हो गईनी बावरिया !
केतने पतिया भेजी के हरनी , हियरा में होला कलेश !
परदेशी भईया , जाओगे कवना देश !
सबके परदेशवा से सावन में अइलें सजना !
हमरो पिया बिना सूना लागे अँगना !
नींद ना आवे का देखी सपना , केकरा से कहीं उदेश !
परदेशी भईया , जाओगे कवना देश !
कहि के गइलें अब सावन में आयब !
तोहरा के झूले खातिर झूला सजायब !
अब त सावन बीतल जाता , अँखिया निहारे हरमेश !
परदेशी भईया , जाओगे कवना देश !
गाड़ी से उतरते पिया के पास जाना !
परदेशी भईया हमार वादा ना भूलाना !
वर्मा हिया के बात तोहसे बतवनी , दिल के लगइह जनि ठेस !
परदेशी भईया , जाओगे कवना देश !
श्याम नारायण वर्मा
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