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बुना बानी के फोहार होई
बगली मे चिउरा चबेनी के भरमार होई
संघतियन संघे धसोरा धसोरी
छिछली खेला मे होत मारा मार होई
Comment by संजीव सिंह on July 11, 2012 at 1:46pm राजीव भईया प्रनाम,
सावानी फुहार से लबरल राउर ई रचना बहुते निमन लागल।
परदेश मे बईठल एगो आदमी अपना देश, गाँव के बारे मे सावन मे का-का सोचत होई, कईसन तस्वीर बनावत होई अपना गाँव घर के, ऊ सभ कुछ बावे ऐह कविता मे। बहुत बढीया।
अउर अंत मे जवन सनेस देले बानी ओकर कवनो मोल नईखे। बहुत बढीया राजीव भईया...।
जय भोजपुरी
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on July 11, 2012 at 6:26pm संजीव भाई जी रउरा नेह छोह खातिर हार्दिक आभार जय भोजपुरी !
bahut sahi bhaiya
jekara dekhe hokhe aab dekhe u.p. bihar ke bhaktee|
jai bhojpuri har har mahadev
bol bam
Comment by Umesh Gautam on July 12, 2012 at 7:27pm राजीव जी प्रनाम,
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on July 13, 2012 at 12:08pm राजीव भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी
नीमन भाव एक दम गह गह गमकत माटी के सोन्ह खुशबु के देखावत झिसी फुहेरा झटास ले ले ... राउर बुनी बानी सांचो बेजोड बा ! आ एकरा वजह से का सीन बनेला ओह के जवाबे नईखे !
बेजोड !
जय भोजपुरी
Comment by Gunjan Singh on July 13, 2012 at 12:41pm
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on July 13, 2012 at 1:58pm संजय भाई जी , उमेश बबुआ . आशुतोष भाई जी , नवीन भाई जी , गुंजन भाई जी ,
Comment by Shyam Narain Verma on July 13, 2012 at 4:54pm
Comment by मुकेश मिश्र (राजू बाबा) on July 13, 2012 at 6:08pm राजीव भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी!
बहुत सुन्दर बुना-बनी के चित्रण कैले बानी.एकदम गाँव के बरसात के सीन आँख के सोझा हो गइल.
आ लास्ट में जवन सनेस बा
मत खेल जा प्रकृति से ना त कबो ना एह कुलही से भेंट-मुलाकात होई !!
एकदम बेजोड़ ...........
जय भोजपुरी!
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