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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव राज्य के विधायक लोग के एगो बढीया उपहार देबे के कोशिश कईले हन। ऊ दू लाख करोड रूपया के करजा वाला राज्य के विधायक लोग के अपना विधायक निधि से 20 लाख तक के कार खरीदे के कह देले रहले हन। अखिलेश यादव से उनकर सहयोगी अउर समर्थक लोग के बहुते उम्मीद बावे बाकीर साँच त ईहो बावे कि उनकर विरोधी लोग से ओह उम्मीद के पुरा होत ना देखल जाई। कुर्सी के एगो बहुते खराब नशा हवे, ऊ नेता के जमीनी हकीकत से एकदम काट के रख देवेला। जनता के दिहल वोट ले के सत्ता मे आवे वाला नेता लोग के बुझाला कि चुनाव के संगही लोकतंत्र ओरा गईल अउर राजतंत्र शुरू हो गईल। बस ऐही से सरकार चलावे वाला लोग खुरमा बाँटल आपन एगो संवैधानीक अधिकार बुझे लागेला। मुख्यमंत्री जी के जे भी ई सलाह देले होई कम से कम ऊ उनकर हित ता ना होई। बाकीर अपना फैसला के वापस ले के मुख्यमंत्री ई देखा देले बाडे कि उनका में गलती से सिखे के अउर ओकरा के सुधारे के हिम्मत कुट-कुट के भरल बावे।
बात अगर खाली विधायक निधी अउर सांसद निधि के कईल जाव त ई दुनु निधि कवनो क्षेत्र विशेष के होखला ना बजाऐ ओह क्षेत्र के विधायक भा सांसद लो के पैतृक सम्पती नियन ही बन क रह जाला। जवना के अपना अनुसार खरचा कईल जाला भा जोगा के, चोरा के आ सरीया के राख दिहल जाला। हाल त ई बावे कि अपना-अपना क्षेत्र मे काम करवावे खतिरा विधायक अउर सांसद लोग एगो अलगे ठिकदारन के फौज बनवले राखे ला। भले ही ऊ काम इमानदारी से होखे भा कमीशन के लालच मे। जवना जनता खतिरा काम होखेले ओकरा त ई मालूम ही रहे ला कि ऐह मे विधायक अउर सांसद लोग के केतना कमीशन बाँधल बावे। सीएजी रिपोर्ट पढला प अउर विधायक निधि भा सांसद निधि भईल काम के बाजार भाव मालूम कईला प बुझाला कि अपना देश मे कलमाडी जी लो के कवनो कमी नईखे। अउर कुछ नेता लोग त ऐतना व्यस्त रहेला कि अपना निधि के पईसा ही ना खरचा कर पावे ला लो।
उत्तर प्रदेश मे अबकी सत्ता बदलल हवे। ई जेतना महत्वपूर्ण बावे ओह ले बेसी विशेष बावे अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनल। राज्य के राजनीतिक दलन के अगुआ लो मे ढेर दिन से कवनो परिवर्तन ना भईल रहल हवे। उहे-उहे चेहरा देखे से जनता भी उबीया गईल रहल सीय। अखिलेश के रूप मे एगो पढल-लिखल अउर नौजवान चेहरा सामने आईल, जेकरा मे अपना विरोधीयन के भी स्म्मान देबे के देशीला हुनर अउर जज्बा बावे। लोग के उम्मीद रहुवे भा अभीयो बावे कि समाजवादी पार्टी आपन कार्यसंस्कृति बदली अउर उत्तर प्रदेश बदले लागी। सभका ई विश्वास बावे कि युवा मुख्यमंत्री के रूप मे अखिलेश यादव विकास के नया-नया उपाय बतईहे अउर यूपी के सझुरईहे। विधायक लो के अपना-अपना क्षेत्र से जमीनी स्तर प जुडे खतिरा प्रोत्साहित करीहे, ओह लोग के अईसन सुविधा दिहे जवना से विधायक लो के लगाव अपना क्षेत्र अउर जनता से बढो। बाकिर ऐकरा खातिर बीस लाख के कार दीहल, ई कुछ हजम होखे वाला बात नईखे।
उत्तर प्रदेश मे भंडारण करे के क्षमता नईखे। ऐहसे कि ऐजुगा के त लाखो टन गेंहू ऐही त सड जाला। पुरा देश मे पैदा होखे वाला सब्जी अउर फल-मुन के तीसरा हिस्सा त भंडारण के अभाव मे ही जियान हो जाला। अईसे मे विधायक निधि से पहिला खरचा करे के चाहत रहुवे राज्य मे कोल्ड स्टोरेज बनावावे मे। यूपी के वित्त निगम त दु करोड तक के कोल्ड स्टोरेज प 25% सब्सिडी भी देवे ला। विधायक निधि मे कुल बढल पईसा के पहिला साल मे खाली कोल्ड सेटोरेज प खरचा कईल जाव त राज्य मे कम से कम 80 गो नया कोल्ड स्टोरेज बन सकत बावे। जेकरा से कृषक लोग आपन उत्पाद के ढेर दिन तक सही सलामत राख सकत बावे अउर बढिया मुनाफा ले सकत बावे। संगही रोजगारो बढीत जवना से सरकार के बेरोजगारी भत्ता के बिल घटीत। जवना राज्य के लगे संसाधन के कमी होखे ओकरा रहे वाला संसाधन के बेहतर उपयोग खातिर नया-नया तरीका खोजे के चाही।
मुलायम सिंह यादव राज्य के तीन बेर मुख्यमंत्री बनले बाकीर तीनू बेर ऊ सरकार चलावे मे जेतना बुता लगावस ओकरा से बेसी सरकार बचावे मे लगावस। निश्चय ही अखिलेश के मुलायम सिंह यादव के तुलना बढीया सिंहासन भेंटाईल बावे। इनका त सरकार के स्थिर रहे के बारे मे कवनो फिकीर कईला के जरूरते नईखे। चुनाव मे उनका अन्नईस-बीस सारा वर्ग के समर्थन मिलल बावे। वईसे ई एगो बढीया बात बावे कि अखिलेश यादव जातिवाद अउर सांप्रदायवाद के पालकी प सवार हो के सत्ता मे नईखन आईल। अउर सभका ई मालूम बावे कि अगर कवनो अनहोनी नईखे होत त यूपी मे मायावती के बाद अखिलेश के सरकार ही पुरा पांच बरीष तक लखनऊ के किला मे राज करी।
कांग्रेस, भाजपा भा बसपा मे से केहू के लगे अभी ऐतना बुता नईखे जे ऊ ऐह पाँच साल के भितर अखिलेष के सिंहासन डोला सको। माने अखिलेश के त एकदम निष्कंटक राज मिलल बावे। बाकीर उनका असली खतरा बावे त बस अपने पार्टी के अईसन सलाहकार लोग से जे जनता के पईसा मे से विधायक लोग खतिरा 20 लाख तक के गाडी खरीदे के सलाह दे देत बावे। अखिलेश के निजी समर्थक लोग उनका के अर्जुन कहे ला जे कौरवन से घेराईल बाडे। अगर अईसने बावे त अखिलेश के जल्दी से जल्दी ऐह चक्रव्यूह से बाहर निकले के पडी। काहेकि उम्मीद के नाउम्मीदी मे बदले मे जादा देर ना लागेला। अउर वईसे भी राजनीति मे सही फैसला से भी जादा सही होखेले सही समय प कईल गईल सही फैसला।
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on July 10, 2012 at 12:11am संजीव भाई जय भोजपुरी
खेतिहर के खेत हरल जात बा आ हरे वाला केहु अउरी ना सरकारे बिआ चाहे उ कवनो सरकार होखे ।
बहुत पहिले चुनाव के बेरि हम इहे लिखले रहनी की हर पांच हजार आबादी प एगो शीत घर ( कोल्ड स्टोरेज ) होखे के चाही । यु पी के माटी मे बहुत कुल्हि फसल पैदा होली स बाकी खेतिहर लोगन के ओकर नीमन दाम ना मिल पावेला आ जब सहता रहेला आनाज त ओह के राखे के बर बेवस्था ना हो पावेला ।
आ एह चीझु के रउवा बहुत नीमन से देखवले बानी आ इहो सांच बा की जेकरा जनता जनार्दन के आंच के ताप नईखे भेटात उ जल्दिये एह आग मे जरि के स्वाहा हो जाई ।
बहुत नीमन से किसानन के आ यु पी के स्थिति के देखा देहनी रउवा !
जय भोजपुरी
Comment by Umesh Gautam on July 10, 2012 at 4:24pm Comment
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