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प्रनाम आ जय भोजपुरी
भाव बता देला की खेतिहर के मोका प पानी मिल जाई त खेत त हरिअराईये जाला संगे संगे खेतिहर के अतमो हरिअरा जाला , आ संगे संगे भाव देखि , माने शब्द अईसन की ओह भाव के के बतावे के अंतिम जगहि ले पहुंच जाला , माने इहे बुझाला की ओकरा बाद ओह चीझु के बतावे खाति अब कुछ बाचि नईखे गईल ।
जी एगो आम आदमी जब आपना मातृभाषा मे बतियावेला त मय चीझु अतना नीमन से सरिहारी देला की बुझे वाला जरि सोरि से ले के पुलई पात के बात बुझि जाला । एगो नमुना देखि सभे -
" जनेरा के बोवन छsब्बीईसs ( छब्बीस प तनी जोर आ टाईम दिआला काहे की देरी के असर के एहि संख्या मे बतावे के बा ) दिन लेट हो गईल रहल ह नबीन भाई आ कई दिन से करिया कुच कुच बादर घेरले रहली हा स, आंखि देखा के मन हुलुसा के भागि जात रहली हा स , बाकी काल्हु अईसन हुंवाड लेखा अराराई के सगरे से बन्हले अवुवे की हमनी के जीउ मे जान आ गवुवे।
अस-अस कसि-कसि के छहर छहर , पीट पीट के बुनी परल ह की हम का बताई , आ झटास अईसन की आंगना त आंगना , केंवाडी मुकि आ जांगला जेकर खुलल रहि गईल रहुवे ओकर त खटिया , नेवार , पलंग आ बिछौना ले भीज गईल बा बाकि ई बुझि ल की अब जनेरा बोवा जाई ( एगो गम्हीराह सांस , सकुन चैन के सांस लेत ) भले तनि लेट हो गईल त का ।
अईसे झीसीया अबहियो परते बा आ एहि बुनि से घामो से आराम मिल गईल ना त घाम आ लुक त अईसन तडेचले रहल ह की सरेहि मे डरे, केहु के डेग डाले के बेंवत ना रहल ह । "
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बनल बनावल भाषा मे अईसन भाव देबे खाति शब्द जोहे के परी , अनुबाद करे के परी बाकी मातृभाषा मे त लोगन के करेजा से शब्द निकलेला आ उ शब्द अईसन की भाव के नीमन से सरिहारी के लोगन के सोझा परोस देला । आ एहि से हम कहेनी की मातृभाषा मे मन के भाव अईसन जवन जोखईले ना जोखाई जबकि मय चीझु रउरा सोझा रही ।
काल्हु हमरा गांवे बुनि परल ह आ गांव के एगो खेतिहर से जवन बात भईल ह ओहि के हम लिखले बानी ।
जय भोजपुरी
Comment by Umesh Gautam on July 10, 2012 at 4:15pm Comment
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