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अबकि के हमहु चक्र ले के आईब झुन्नन : परमवीर चक्र विजेता बीर अब्दुल हमीद

ई कवनो कहानी ना ह ई त सांच ह जेकरा के नीमन से तोपि ढांपि दिहल बा अब एकरा पाछे केहु के का मकसद बा हम जानत नईखी बाकी जवना हिसाब से अपना माटी के लोगन के हमनिये के भुलवावत बानी जा उ दिन दुर नईखे जब लईकन से पुछाई की बबुआ बीर कुंवर सिंह के जानेल ? मंगल पांडे के ? राजेन्दर बाबु के ? आ अईसन कई गो नाव बा जवन आवे वाला पीढी से पुछाई त ओकनी के मुडि डोला के कहियन स कि ई के ह ? हम नईखी जानत । 

आजु हम जेकर बात करे जात बानी ओह महान , माटी के लाल अमर शहीद के नाव ह बीर अब्दुल हमीद । जी बीर अब्दुल हमीद , जिनिकर जनम 1 जुलाई , 1933 मे भोजपुरिया माटी के पावन क्षेत्र गाजीपुर जिला के एगो छोटहन गांव धामुपुर ( धामपुर )  मे भईल रहे , बाबुजी आ बाबा के कसरती देहि आ पहलवानी वाला शरीर के असर अब्द्लु हमीद प परल रहे । बाबुजी दरजी के काम करत रहले आ एगो गरीब परिवार मे अब्दुल हमीद के जिनगी आगे बढे लागल । लईकाई गोली डंटा कबड्डी चीका जईसन गंवही खेल मे बीते लागल,  खेते आईल गईल कबो नदी मे पंवरे खाति गिरोह मे गईल , केहु के बदमाशी आ गलत काम के बिरोध कईल त अब्दुल हमीद के खुन मे बसल रहे । एहि तरे गांव के जरी के स्कुल मे पढत आ अपना गांव के लईकन के संगे खेलत कुदत , अपना बाबुजी मोहम्मद उस्मान के छत्र छाया मे अब्दुल हमीद के जिनगी आगे बडे लागल । कसरत आ दंगल मे भाग लेहला के संगे संगे लाठी भाजे के सवख अब्दुल हमीद के कसरती देहि के अउर ढीठगर बना देहलस । 

मगई नदी के किनार प बसल एह गांव के लोग कबो ई ना सोचले रहे की उनुका गांव मे एगो अईसना सपुत के जनम भईल बा जवना प आपन देश त आपन देश सेना के इतिहास मे देश विदेश मय इयाद करी । रेलवे के नोकरी खाति गांव से भरती होखे गईलन बाकि रेलवे के जगहि प सेना मे भरती हो गईले बीर अब्दुल हमीद । 

बीर अब्दुल हमीद 27 दिसम्बर 1954 मे सेना के ग्रेनेडियर इंफेंट्री रेजिमेंट मे भरती भईलन बाद मे उनुका के रेजिमेंट के 4था बटालियन मे भेज दिहल गईल जहवा से उ शहीद होखे के घरी ले देश के सेवा कईलन । सेना के ओर से अब्दुल हमीद के आगरा अमृतसर जम्मु कश्मीर दिल्ली जाये के परल । चीन के संगे लडाई मे इनिकर बटालियन , 7वा इंफेंट्री ब्रिगेड के संगे रहे , एह लोगन के बटालियन के चीन के संगे लडाई नमका चु नाव के जगहि प भईल रहे , इनिकर बटालियन चारो ओर से घेरा गईल रहे बाकी अपना दुश्मन देश के सेना के काटत पीटत चीरत भारत पैदले इनिकर बटालियन भुटान आ बाद मे मिसामेरी ले गईल रहे । 

बाकि बीर अब्दुल हमीद के अभी असल लडाई त बाकिये रहल , अपना मातृभुमि अपना भारत माई के रक्षा के कसम खईले ई बीर भोजपुरिया जवान 5 साल से एंटी टैंक बिभाग मे काम कईले आ बाद मे इनिका राईफल निशानेबाजी के अनुभव के देखि के इनिकर ट्रांसफर परमोसन के संगे एन सी ओ कमांडिंग बना के राईफल प्लाटुन मे भेज दिहल गईल । एक हाली जब ई अपना गांवे गईल रहले त अईसही बतकही मे अपना भाई से कहले रहले के " सेना मे जेकरा लगे कवनो ना कवनो चक्र ईनाम मे मिलल रहेला ओकर सेना मे बहुत मान सम्मान रहेला बाडा लोग इज्जत देला , अबकि के हमहु चक्र ले के आईब झुन्नन " 

बात 1965 के ह जब पाकिस्तानी सेना अपना पुरा दमखम के संगे पैटन टैंक ले ले खेम-करन - अमृतसर रोड प बढत रहे आ पाकिस्तानी सेना के योजना पुरा अमृतसर के चारो ओर से घेरि के कब्जिया लेबे के रहे । उंखि के खेत होखाला के वजह से ओजुगा राईफल प्लाटुन के राखल गईल रहे , आ जब पाकिस्तानी सेना खेम-करन - अमृतसर रोड पे बढे लागल त एक हाली लागल की अमृतसर अब बाची ना । बाकी तब लोग जानत ना रहे की ओजुगा एगो माई के लाल ठाढ बा जेकरा आगे कतनो टैंक आ जाउ बाकी उ केहु के भारत माई के जमीन प ठाड ना होखे दिही । 

8 सितम्बर 1965 के जब पाकिस्तानी से 4था रेजिमेंट प धाईँ धाईँ फायरिंग करत रहे गोला बरसावत रहे ओहि दिने दुपहरिया ले बीर अब्दुल हमीद पाकिस्तानी सेना के दु गो टैंक ढाही देले रहले । एगो टैंक के कमांडर त इनिके से पाता पुछत रहे आ ओकरा बाद ओहि टैंक के धुंवा धुंवा कई देहले बीर अब्दुल हमीद । 

10 सितम्बर 1965 के फेरु पाकिस्तानी सेना अपना आर्मर सपोर्ट के संगे संगे पैटन टैंक ले के दोगुना रफ्तार से हमला कईलस बाकी 4थ बटालियन के एह राईफल प्लाटुन के चीर ना पवलस काहे की ओजुगा ठाड रहे एगो अईसन सिपाही जवन सोच के आईल रहे कि आगे बढे ना देम एकनी के चाहे कुछौ हो जाउ । एगो डीह के पाछे आपन पोजिसन बना के अब्दुल हमीद चतुराई से पाकिस्तानी सेना के तीन गो टैंक के माटी मे मेरा देले रहले आ एहि से पुरा 4था बटालियन के जोश कई गुना बढि गईल रहे आ पाकिस्तानी सेना के संगे दिक्कत इहे रहे की उ अब्दुल हमीद के जोहि ना पावत रहे । दिमाग दिल आ देहि , तीनो के बेजोड संग साथ मिलवले अब्दुल हमीद पाकिस्तानी सेना के चीर फारि के लुगरी बना देले रहले , जब ले ई ओह डीह से पाकिस्तानी सेना के धुरकुस उडावत रहले तब ले पाकिस्तानी सेना 4था बटालियन के घेराव के ना तुरी पवलस आ एहि तुरे के चक्कर मे ओकर तीन गो टैंक दु दिन पहिले आ तीन गो टैंक 10 सितम्बर के धुरकुस हो गईल रहे , बाकि तबले पाकिस्तानी सेना के आह लागि गईल रहे आ ओकरा बाद पाकिस्तानी सेना के आर्मर सिपाही इनिका उपर हमला कई देहले , बाकि शहीद होत होत बीर अब्दुल हमीद ओह दिन के चौथा टैंक के मटियामेट कई देले रहले । अपना ओह तीन दिन मे अमृतसर के बचावे खाति बीर अब्दुल हमीद अपना दिल दिमाग आ देहि के बल प पाकिस्तानी सेना के 7 गो पैटन टैंकन के माटी मे मिला देले रहले । बाद मे 4था बटालियन के सपोर्ट भेटा गईल ओकरा बाद पाकिस्तानी सेना के भागे के परि गईल । जवन पाकिस्तानी सेना के ई टुकडी रहे ओकर नाव रहे एम 48 प्लाटुन जवना के उ अंतिम लडाई रहे काहे की पाकिस्तानी सेना के एह प्लाटुन के बेईज्जत हो के खेमकरन अमृतसर से जाये के परल रहे कई गो पैट्न टैंक भारत के सेना कब्जियाईयो ले ले रहे , आ एहि से ओहि जगहि के नाव " पटन नगर " भी परि गईल । 

बीर अब्दुल हमीद के शहीद शरीर दिल्ली आईल आ उनुका मेहरारु श्रिमती रसुलन बीबी के बीर अब्दुल हमीद के देश सेवा खाति 16 सितम्बर 1965 के भारतीय सेना के सबसे बडहन पुरस्कार " परम वीर चक्र " दिहल गईल । बीर अब्दुल हमीद के अपना देश के सेवा करत परम वीर चक्र के अलावा , सैन्य सेवा मेडल , समर सेवा मेडल,  रक्षा मेडल मिलल रहे । 

इँहा के नाव प डाक टिकट भी जारी भईल , एगो धारावाहिक परमवीर चक्र आवत रहे जवना मे इँहा के रोल नसिरुद्दीन शाह कईले रहले । इँहा के गांव धामुपुर मे इँहा के याद मे मेमोरियल भी बनल बा । बाकी जईसे की रउवा सभे जानत बानी की हमनी के क्षेत्र के महान लोगन के पहिचान के कवना हिसाब से दुर्गति भईल बा त ओह दुर्गति से बीर अब्दुल हमीद के मेमोरियल भी ना बांचि पावल आ स्थिति ई बा की गते गते लोग अब बीर अब्दुल हमीद के भुलवले जात बा । 

सुने मे आवता ( पिछिले साल सुनले रहनी ) की इनिका उपर फिलिम भी आवे वाली बिआ ! बाकी अबले बुला आईल नईखे । 

हमरा मन परेला हमनी के जब कक्षा चार भा पांच मे पढत रहनी जा तब हमनी के बीर अब्दुल हमीद के बारे मे पढावल गईल रहे , आजु हमरा के इँहा के मन परनी ह काहे की काल्हु हम एक जाना से इँहा के बारे मे पुछले रहनी आ उनुकर जबाब कुछ अईसन रहे - ( उ भोजपुरिया माटी से ना हवे एह से हिन्दी मे सवाल रहे ) 

सवाल - अब्दुल हमीद कौन थे ? 


जबाब - आँ , ह्म्म्म्म होगा कोई 

सवाल - अच्छा वीर अब्दुल हमीद कौन थे ? 

जबाब- आँई , पता नही कितने वीर है इस देश मे 

सवाल - अच्छा अच्छा परम वीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद कौन थे ? 

जबाब - देखिये भाई साहब आप तो पीछे ही पड गये , हमको नही पता भाई साहब , अब आप हमे जाने दिजिये ।

बस हम आपन बात एजुगे खतम करत बानी , आ इहे उमेद रही की कम से कम हमनी के अपना आवे वाला पीढी के अईसन महान महान लोगन से परिचय करावत रहब जा बतावत रहब जा आ भोजपुरिया माटी के गुन से अपना आवे वाला पीढियन के सोच के के भोज्पुरियामय बनावत रहब जा ! 

जब ले जिआ

टांठ हो के जिआ जवान 

भारत माई खाति जिआ

भोजपुरिया बन के जिआ जवान 

जय भोजपुरी 

स्रोत - विकी, गुगल , प्रवक्ता , नभाटा 

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Tags: अब्दुल, आर्मी, जय, बीर, भोजपुरी, रेजिमेंट, सेना, हमीद

Comment by Rohit Lal on June 30, 2012 at 10:47pm

Sat sat Naman ba eh Bharat mata ke sapoot , Bhojpuria jwana ke ..

jai Ho Abdul Hamid ji

Jai Bhojpuri ....

Comment by संजीव सिंह on July 2, 2012 at 10:42am

अब त हालत अईसन हो चुकल बावे कि राष्ट्र अउर राष्ट्रवाद के बात करे वाला लोग खतिरा वीर अब्दुल हमीद के परिवार के पीडा वोट बटोरे मे खास काम नईके आवत, ना त वीर अब्दुल हमीद के बारे में भी जरूर विचार कईल जाईत। अउर ऐतना आसानी से उनका के ना भुलावल गईल रहीत। वीर अब्दुल हमीद के हमार शत शत नमन बावे अउर दिक्कार बावे अईसन समाज प जवन अपना इतिहास के भुला गईल बावे।

नवीन भईया बहुत बहुत धन्यवाद। बहुते दुलचस्प मरम से भरल अउर प्रेरणा देवे वाला लेख लिखले बानी। अईसने वीर के शहादत ही ऐह भारतभूमि के गौरव बनवले रखले बावे।

जय भोजपुरी

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on July 2, 2012 at 8:14pm

रोहित जी संजीव भाई जय भोजपुरी 

बहुत बहुत धन्यबाद एह लेख के पढे खाति आ एह प आपन बिचार राखे खाति । 

जे जे एह लेख के पसन कईले बा ओहु लोगन के अउलाह धन्यबाद आ शुभकामना बडुवे । 

जय भोजपुरी 

Comment by Umesh Gautam on July 2, 2012 at 8:45pm
एह लेख खातिर रउरा के बहुते धन्यवाद ! जय भोजपुरी ।
Comment by Sudhir Kumar on July 3, 2012 at 12:45am

नवीन भाई, प्रणाम आ जय भोजपुरी, वीर अब्दुल हमीद के भुला चुकल ई पीढी शायद अपना देश के, देश प्रेम के, अउर शहादत शब्द के मतलब भी बहुत जल्दिये भुला जाई। शत-शत नमन बा एह योद्धा के, जे देश खातिर आपन जान लुटा दिहलन...

Comment by संजीव सिंह on July 3, 2012 at 1:06pm

Comment by Bishwajit yadav on July 3, 2012 at 9:04pm
जय भोजपुरी
परनाम भईया
हम त अब्दुल हमीद जी के बारे मे अपना बाबुजी से सुनले रहनी पर राउर लेख पढ के बहुत जानकारी मिलल एकरा खाती रउआ के हम गोड लागत बानी और हमरा आशा ना विश्वास बा कि रउआ और भी भोजपुरियाँ माटि के महान लोग के जीवन से परिचय कराईम
Comment by sanjay panday on July 12, 2012 at 11:48am

bhaiya parnam |

bahut sahi aa jwalant sawal ba |

sayad ave wala deen me aisane kuch hokhe wala ba |

hamani hi jimmedar hi hokhab.kahe se ki sab apan laika

ke privet school me padhai ta ohije itihas me ee kul na mili 

hamani ke jimmedari ba bacha log ke bataval jav |

halaki ham padhale bani |

bahut jankari milal ba raur lekh se etana hamahu na janat rahani 

hameed ke bare |

bahut bahut dhanyavad |

jai bhojpuri |

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