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जे भुलाईल बा माटी उ होई का सहर के?

सब केहू के प्रणाम,



एके राह चलनी नाही कबो रुकनी,
फाटले बेवान्य तबो नाही थकनी,
बहुत बाधा आईल,
बहुत रोड़ा फेंकायिल,
कबो नाही झुकनी,
कबो नाही टूटनी,
ढेरे ताप धहायिल,
नदियों उफनायिल,
तबो नाही सुखनी,
तबो नाही डूबनी,
ढेरे काँट बिछल,
ढेरे घात खींचल,
ना कांटे से रोवनी,
ना घाते से छुपनी,
रहे एगो हौसला,
रहे एगो फैसला,
भले चलब अकेला,
भले सहब झमेला,
कबो नाही रुकब,
कबो नाही झुकब,
चाहे झुको ज़माना,
चाहे रुको तराना,
उहे राग छेड़ब,
उहे माला फेरब,
जे सीखे सिखावे मानवता के पहाड़ा,
जे देवे दिलावे मातृभूमि के सहारा,
लोग भले बाउर माने,
अक्षत के भले चाउर माने,
जे लिखम लिखायब,
जे बोलम बतियाब,
त बोलब आपन भाषा,
त चलब आपन चासा,
की लागे त लागे भले रउवा गंवारू,
हमके सँवारे के पाहिले अपने के संवारू,
जे भईल नाही आपन, उ होई का दोसर के,
जे भुलाईल बा माटी उ होई का सहर के?


जय भोजपुरी

Views: 70

Comment by sanjay kumar singh on June 29, 2012 at 7:48pm

आशुतोष भाई ,प्रणाम

 

गजब..... हर भोजपुरिया के मन के बात......अपना मातृभाषा  आ मातृभूमि खातिर निर्जीव हो चुकल लोगन के संजीवनी देबे वाली रचना ..... बहुत सुंदर......

 

धन्यवाद आ जय भोजपुरी

Comment by Umesh Gautam on June 29, 2012 at 10:08pm
जे आपन माटी के भुला जाला , उ कही के ना होला । बहुते सुनर । जय भोजपुरी ।
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on June 30, 2012 at 12:44pm

बहुते सुनर भाई जी 

हिला देले बानी 
जय भोजपुरी !
Comment by संजीव सिंह on June 30, 2012 at 1:37pm

आशुतोष भईया प्रनाम,

बहुत सुनर!

माटी के भुला के अगर केहु ई चाहत होखे के ऊ परदेश मे सुखी भा खुश रह पाई ई सम्भव नईखे हो सकत। काहेकि माटी के देह के असली माजा त तबही आवेला जब ऊ अपने माटी मे होखे। अउर वईशे भी बरफ के तासीर पानी मे घुल गईल होला।

बहुत बढीया भईया।

जय भोजपुरी

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on June 30, 2012 at 8:20pm

आशुतोष भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी 

बहुत खुब कहनी , अपना माटी के जे भुला जाई ओकरा माटी मे मिले के भी नसीब ना होई । बेजोड रचना , एक दम पोरे पोर गतरे गतरे रोंवा रोंवा के सोचे के मजबुर कई रहल बिआ राउर एक एक लाईन ! 

माटी मे देहि लसरा जाउ ओकर आनन्द मखमल के गादा प कबो ना भेटाई आ ई आजमावल बात बा भले केहु कतनो मुह भिनुकावे । 

अईसहु कहाईले बा आ केहु गवलहु बा - > 

ई देहि माटी के ह माटिये मे मिल जाई

एह से अपना माटी से नेह छोह कबो ना छोडे के चाही । 

बहुत खुब बतवनी भाई जी 

जय भोजपुरी 

Comment by Bishwajit yadav on July 2, 2012 at 10:06pm
जय भोजपुरी
परनाम भाई जी
हम त एतने जानत बानी कि माई माटी भाषा ई तीनो एक ह एकरा के भुलाईल बहुत मुश्किल बा

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