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प्रनाम आ जय भोजपुरी
केहु से पुछब त कही की , बे मरदवा गांव मे का बा ? कुछु ना अब गांव खतम बा , ओजुगा ना लाईन बा ना ओजुगा नीमन दोकानि । ना मोबाईल के बैटरी दु तीन दिन ले आडी आ ना मछर नीमन से सुते दिहन स । कस्बा मे ले कुछ नीमन सामान ना भेटाला त फेरु गांव के बाते छोडs मरदवा । गांव मे अब सब केहु अपना मे लागल बा गांव मे अब उ बात नईखे रहि गईल । गांव से लोग अब शहर मे भागत बा । जबाना बदsलsता नबीन भाई , अब केहु गांव के ओरि लरकत नईखे अब त लोग गांव से टरकत बा ।
बात त जवान सहिये कहत बा आ कुछ अईसने लागल ह की हो सकेला काहे कि हमहु टरकले बानी बाकि तबो कुछ ना कुछ अईसन चीझु हो जाला की कतनो केहु टरको कतनो केहु बदलो बाकी आतमा कबो ना बदली आतमा मे जवन बसल बा तवन हरमेसा ओइसने रही। आ गांव के संगे कुछ अईसने बात बा ।
आ हमरा त इहे लागल ह की , कतनो झटास लागल , कतनो आन्ही बतास आईल , हो सकेला उपरा वाला रंगवा एह आन्ही बतास झटास मे खतम हो गईल होखे भा खतम होखे दाखिल होखे बाकि जवन गांव के आतमा मे करेजा मे बसेला बा ओकरा के केहु खतम ना कई सकेला , आ ओकरा के खतम होखे मे कतने पुहुत पुहतानी खतम हो जाई ।
जी आजुवे के बात ह हमरा गांव मे के एगो यादव जी के घरे लईकी के बरियातियो आईल बिआ आ लईका के तिलको ह । बारह हजार मे चाननी कुरसी मेज चउकी हैलोजन , राड , बलब , बरतन -सरतन के साटा कईले रहले ह बाकि एन मोका प जेकरा के साटा दियाईल रहल ह उ गायब हो गईल ह आ उ कुछउ सामान ना देहलस ह । आ एहि से जेकरा घरे बारात आ तिलक दुनो आईल रहल ह ओकरा घर के लोगन के फेफरी परा गईल ह । घर वाला कपारे हाथ धईले चिंता मे छितराईल रहल हा लो तलेले भईल ह का कि गांव वाला जुटलन ह स केहु अपना घर से तसला त केहु भगोना त केहु चउकी त केहु बिछौना त केहु बलब त केहु गैस त केहु कुरसी त केहु मेज आ दु घांटा के भीतर जतना सामान खाति साटा भईल रहल ह ओह ले बेसी सामान जुटि गईल ह आ गांवे के लोग हाथे हाथे मय बर -बेवस्था कई देहले ह ।
अबे थोरे देरि पहिले गांव प एक जाना बाडे उनुका से ई मालुम भईल आ उनुके से बात होत रहल ह आ बाते बात मे उ इहे कहलस ह कि ए नबीन भाई " गांव ह से गढ ह "
फेरु मन परि गईल ह आपन लईकाई , जब एगो कांपी आ कलम ले के काल्हु बारात आवे वाला रहे एत एह बेरा टोला के कुल्हि लईका मिलि के घरे घरे जाईब जा आ रजाई तोसक बिछौना बरतन चउकी कुरसी मेज चादर कुल्हि जुटाईब जा आ बिआह परोजन के घर के कवनो जाना ना राखे के परत रहल ह कवनो काम खाति । अबहियो उ चीझु कबो कबो लउकत बा बाकी आजु के ई घटना ई साबित कई देहलsस की अबहियो गांव गढे बा आ एह गढ के ढाहे मे नीमन नीमन जाना छितरा जईहे ।
जय भोजपुरी
bahute sughar kahani Bhaiya ji ....
gav ta gave ha gav me atama basela aa sahariya me adami ....
Chiraiya ketano upar udi jai kahi ghume khaye chali jai bad me thakal haral apani khotawa me hi aai ..
JAI HO JAI BHOJPURI ..
Comment by मुकेश मिश्र (राजू बाबा) on June 24, 2012 at 9:45pm भईया प्रणाम आ जय भोजपुरी!
शहर में सभे अपना-२ में हरान रहेला दोसरा के बारे में सोचे के केकरा सवांस बा. बाकिर गाँव के बात कुछ आउर बा.
जय भोजपुरी!
Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on June 25, 2012 at 12:33am भाई जी नतमस्तक एह लेखनी के ..............जय हो ......जय भोजपुरी .........जिहिं जा भोजपुरी !
parnam bhaiya |
bahut sahi aa sanch lekhani "gaav ha ta gadh ha "
sacho gaav ta gave ha, u kahi na bhetai paisa chahe ketano kama le adami |
jai bhojpuri
Comment by Bishwajit yadav on June 25, 2012 at 9:12pm
Comment by संजीव सिंह on June 26, 2012 at 1:54pm नवीन भईया प्रनाम,
मुल रूप से भारत के अपना संस्कृति अउर सभ्यता खातिर जानल जाला। अउर ई खाँटी (ठेठ) संस्कृति अउर सभ्यता त हमनी गाँवे के देखे के मिल सकत बावे। काहे कि शहर के लोग मे ई बहुते कम देखे के मिलेला। हम रउआ बात से सोरह आना सहमत बानी कि "गाँव ह से गढ ह"।
बहुत ही बढीया कहानी बावे। ज्ञान अउर अपना सभ्यता के प्रचुर मिश्रण बावे ऐह कहानी मे भले ही ई एगो बतकही अउर एगो घटना होखे। बहुत बढीया।
जय भोजपुरी
Comment by भास्कर रंजन "सूर्य" on June 27, 2012 at 10:34pm प्रनाम भइया,
साँच के कभिओ आँच ना होला ... भले कुछ देर खातिर बदरी घेर लेव प फेर साफ होखहीं के बा । भाई जी जान जाईं कि इ गाँव घर के संस्कार आ संस्कृति के एगो उदाहरण ह । अइसन ढेर कुल्ह हमनी के गाँव जवार में बा ।
फैशन के चकचकई में भले लोग इ सब बिसारल जात बा प जवन मजा आ संतुष्टि गाँव के पुरान बिधि - बेवस्था, रित - रिवाज आ संस्कार में बा उ कहीं नइखे । उ सब चीज लोग के आपस में हरमेशा एक साथे जोड के राखत रहल ह । लोग के लागे पइसा होत जाता त लोग सोचत बा कि हमरा केहू से का मतलब बा, हम आपन त सब कईये लेब । दोसर ई कि के झमेला मे परो- इहो सोंच बा । पर लोग इ ना सोचेला के इ कबो कबो ओह ले बड झमेला खडा क देला जइसन रउआ अबे बतइनी ह ।
जय भोजपुरी ...
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