Come, let's do something for Bhojpuri...
सुननी हई जे ऊ दिल्ली मे ही,
घर आपन बसवले बाडी,
बाकीर तबो ऊनका घरे गईल,
अब ऐतना आसान नईखे,
काहेकि अब ऊ ऐतना निचका ना रहेली,
कि आवाज दी अउर बोला ली।
अब ऊनका लगे जाऐ खतिरा,
दु गो मैट्रो बदले के पडेला,
ना जाने कई गो रेलिंग कुदे के पडे ला,
अउर कई गो पुल लांघे के पडेला।
उनकर घर त अब अईसन भी नईखे,
कि केवाडी खट-खटाई अउर खुल जाव,
हमरा कदम ताल के सुन,
ऊ दुआरी प मुस्कात चली आवस।
अब उनका घर मे जाऐ से पहिले,
एगो चौकिदार हमरा के घुरे ला,
जईसे हम कवनो आतंकवादी हई,
हमरा से एगो रजिस्टर मे,
दस्तखत करवावे ला,
नाम, काम अउर धाम लिखवावे ला,
अउर अंत मे मिले के कारण...
बस ऐह कारण प हम रूक जानी,
दुर कही भुला जानी,
का लिखी अउर का ना लिखी?
का ई कि उनकर घर हमरा खातिर,
कवनो सुनर फुलवारी से कम नईखे,
कि उनका से मिलते ही,
हमरा भीतर ढेर गुलाब खिल जाला?
का ई लिखी कि कुछ सुने-सुनावे के बा,
भलही ऊ हमरा भितर के मौन ही काहे ना होखे?
Comment by Shankar Rai on June 21, 2012 at 6:55pm Bahut Niman lagal bhai ji
Comment by Rajnish Kumar Singh on June 21, 2012 at 9:59pm bahut khub............
jai bhojpuri bhai ji |
bahut sunnar bhav ,kahani se badhiya kavita,kavita se badhiya kahani
ek dusare par bhari ba duno |
bahut bahut dhanyavad |
jai bhojpuri
sanjay pandey
Comment by Umesh Gautam on June 22, 2012 at 8:07pm
Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on June 23, 2012 at 6:38pm संजीव भाई जय भोजपुरी
बुला एकरे के बिकास भईल कहल जाला बाकि हतना मुआही आ तबो लोग बिकास जोहत बा ?
बेजोड लिखनी संजीव भाई बेजोड ! बिकास त भईल बाकी लोगन के प्रेम भाव के बीच मे फईलल दुरी के बिकास भईल बा ।
बेहतरीन रचना !
आ राउर मजबुरी हम बुझि सकेनी ;-)
जय भोजपुरी
Comment by Bishwajit yadav on July 2, 2012 at 9:52pm
Comment by Bishwajit yadav on July 2, 2012 at 9:58pm Comment
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