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कहिया अइब परदेशी सजनवा !

कहिया अइब परदेशी सजनवा !
तोहरा बिना सूना लागे सजल भवनवा !
चढ़त अषाढ़ घनाघन बरिसे ,
सावन खिलेला दवनवा !
भादो मास के रात भयावन ,
ना सूझेला अँगनवा !
कहिया अइब परदेशी सजनवा !
क्वार मास अति धुन्ध पड़त है,
कार्तिक घाम के दिनवा !
अगहन मास काहें ना अइल ,
देखे खातिर तरसल नयनवा !
कहिया अइब परदेशी सजनवा !
पुस मास अति ठंड पड़त है ,
माघ जाड़ के दिनवा !
फाल्गुन फाग केकरा से खेलब ,
तू ना जो अइब भवनवा !
कहिया अइब परदेशी सजनवा !
चैत मास वन केसरी फूले ,
बैशाख गरमी के दिनवा !
जेठ मास के तपस भयावन ,
तोहरा बिना बीती लागे बारहो महिनवा !
कहिया अइब परदेशी सजनवा !
श्याम नारायण वर्मा

Views: 37

Tags: !, गीत

Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on June 23, 2012 at 6:39pm

हमेशा लेखा नीमन लिखनी श्याम जी !

जय भोजपुरी

Comment by Bishwajit yadav on June 27, 2012 at 10:19am
जय भोजपुरी
बहुत सुनर श्याम जी
Comment by Ashutosh Ranjan on June 29, 2012 at 4:35pm

बहुत सुनर श्याम जी

 

जय भोजपुरी

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