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कठपुतली के नाच

सब केहू के प्रणाम,

कठपुतली ..... कठपुतली के नाच....इयाद बा नु? भोर पर गईल, लड़िकाही में आदमी कठपुतली के नाच देखे जाओ. अब त रीयल लाईफ से एकर प्रजेंस तकरीबन गायब हो चुकल बा. एक दिन सोंचत रहनी की आखिर हमार लईका सब इ सब कईसे जनिहे बुझिहे सन की कठपुतली का कहाला आ कठपुतली के नाच का कहाला. तलेले ध्यान आईल वर्त्तमान राजनीतीक परिदृश्य के ..कहनी के एहसे निमन उदाहरण कठपुतली आ ओकर ड्रामा के और का हो सकेला. काठ के बनल भिन्न भिन्न चेहरा, हर चेहरा के किरदार फिक्स लेकिन बागडोर केहू औरी के हाथ में. बागडोर थामले विभिन्न राजनितिक दल के प्रमुख लोग आपन आपन दल के कठपुतलियाँ के अपना अपना हिसाब से नाचा रहल बा. लोकतंत्र में लोक के जरुरत खाली आपन प्रतीनीधि चुने तक सिमित बा, बाकी देश के दिशा आ दशा त रिंग मास्टर के हाँथ में बा. उ चाहे त केहू के अर्श से फर्श पर पटक देओ उ चाहे त केहू के फर्श से अर्श पर बिठा देओ. खैर एही दरम्यान एगो कठपुतली के दोसर कठपुतली से बतकही होत रहे, कहले की भाई हमार रिंग मास्टर निमन नईखे, उ हमार चेहरा दागी कहिके नाचे के मौक़ा ही नईखे देत जबकि दोसर पार्टी के रिंग मास्टर कतना निमन बाडन जे कवनो भी दाग के बड़ा सफाई से निरमा से धोवे के कुब्बत राखेलन. एगो कठपुतली कहलस की हमरो नेता बने के बा. दोसरका कठपुतली कहलस की भाई तहरा में उ क्वालिटी ही नईखे तू कईसे बनब नेता? पहिलका कहलस की एह देश में झाड़ू पोंछा सभे नेता बन जात बा, हमरा में उ कवन खूबी नईखे जे हम नेता ना बन सकिले? दुसरकू कहले की सब त ठीक बा लेकिन तू नाच ना सक, आ जे नाचे ना जाने उ देश आ जनता के का ख़ाक नचाई? पहिलाकू कहलन की भाई हमरा का कवनो अभिनेता बने के बा जे कमर लाचाकावे के सीखे के पड़ी? दुसर्कू कहलन की ना भाई अभिनेतात नईखे बनके लेकिन नेता बने के इ प्राईमरी शर्त बा की आपन रिंग मास्टर के इशारा पर नाचे के आवे के चाँही ताकि भविष्य में सभाकरा के नचावे के कला में भी पारंगत हो जा. यदि ठीक से रिंगमास्टर के इशारा समझ के उनकरा अंगुलियाँ के थिरकन पर ठुमका लगा सकत बाड़ त बुझाला की कामयाबी के शीर्ष भी तहार कदम चूमी लेकिन तानी ट्यून कईल भाई त भुज की ओही दिन तहार करियर समाप्त. हाँ तानी ट्यून करे के होखे त फेर नचावे वाला कला में माहिर भईल जरुरी बा फेर तू रिंग मास्टर हो जा आ दू चार गो कठपुतलियाँ के तू भारती करके ओकनी के खुदे नाचा सकत बाड़.

खैर मन निश्चिंत भईल के हमनी के सांस्कृतिक धरोहर आज भी कवनो ना कवनो रूप में संरक्षित बा आ इ अफ़सोस ना रही जाई की आगे आवेवाला पीढ़ी तक एह संस्कृति के हमनी के ना पंहुचा पयिनी जा.

जय भोजपुरी

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Comment by नबीन भोजपुरिया ( NB ) on June 16, 2012 at 5:07pm

आशुतोष भाई प्रनाम आ जय भोजपुरी

काठ के पुतली जवना मे जान ना होला अब ओकरा के केहु कईसहु नचा लेत बा आ ओहि काठ के दरवाजा मे सीकड किली लगा दिहल जाउ त घर के रक्षा हो जाई ।

नीमन व्यंग्य लिखनी ।

जय भोजपुरी

Comment by Rajeev Mishra "राजीव भोजपुरिया" on June 17, 2012 at 3:43pm

वाह बहुते नीमन भाई जी !

जय भोजपुरी जिय भोजपुरी !

Comment by संजीव सिंह on June 20, 2012 at 10:46am

बहुत बढीया आशुतोष भईया...

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